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Udhampur News: श्रद्धालुओं ने सत्संग की अविरल धारा में लगाई डुबकी
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उधमपुर। गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य पर मां राजराजेश्वरी आश्रम में आयोजित सद्भावना सत्संग में प्रव
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मानव उत्थान सेवा समिति की तरफ से रविवार को मां राजराजेश्वरी आश्रम में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सद्भावना सत्संग का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सत्संग की अविरल धारा में डुबकी लगाकर जीवन धन्य किया।
सद्गुरुदेव सतपाल महाराज की आत्मानुभवी महात्मा शमां बाई, महात्मा त्रिपुरा बाई और महात्मा संयमी बाई ने अपने सारगर्भित आध्यात्मिक प्रवचनों में गुरु की महिमा और महत्व के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु बिन भव निधि तरइ न कोई। जौ बिरंचि शंकर सम होई॥ अर्थात बिना गुरु के कोई भी व्यक्ति चाहे वह ब्रह्मा या शंकर के समान ज्ञानी या शक्तिशाली क्यों न हो, संसार रूपी सागर से पार नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों के पश्चात मनुष्य जन्म पाकर सच्चे सद्गुरु की शरण ग्रहण कर आत्मज्ञान प्राप्त कर अपनी आत्मा का कल्याण करें। बाईगण ने समझाया गुरु महाराज की महिमा अनंत है। गुरु और शिष्य का जन्म-जन्म का नाता है। सेवा भक्ति ही जीवन का सार है। उनका कहना था कि जीवन मूल्य सद्गुरु शरण में जाकर ही समझ में आता है।
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कार्यक्रम के अंत में भंडारे का आयोजन किया गया।
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उधमपुर। मानव उत्थान सेवा समिति की तरफ से रविवार को मां राजराजेश्वरी आश्रम में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सद्भावना सत्संग का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सत्संग की अविरल धारा में डुबकी लगाकर जीवन धन्य किया।
सद्गुरुदेव सतपाल महाराज की आत्मानुभवी महात्मा शमां बाई, महात्मा त्रिपुरा बाई और महात्मा संयमी बाई ने अपने सारगर्भित आध्यात्मिक प्रवचनों में गुरु की महिमा और महत्व के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु बिन भव निधि तरइ न कोई। जौ बिरंचि शंकर सम होई॥ अर्थात बिना गुरु के कोई भी व्यक्ति चाहे वह ब्रह्मा या शंकर के समान ज्ञानी या शक्तिशाली क्यों न हो, संसार रूपी सागर से पार नहीं हो सकता।
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उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों के पश्चात मनुष्य जन्म पाकर सच्चे सद्गुरु की शरण ग्रहण कर आत्मज्ञान प्राप्त कर अपनी आत्मा का कल्याण करें। बाईगण ने समझाया गुरु महाराज की महिमा अनंत है। गुरु और शिष्य का जन्म-जन्म का नाता है। सेवा भक्ति ही जीवन का सार है। उनका कहना था कि जीवन मूल्य सद्गुरु शरण में जाकर ही समझ में आता है।
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कार्यक्रम के अंत में भंडारे का आयोजन किया गया।