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संतोष ने छोड़ी पति के घर लौटने की उम्मीद, नहीं रखा करवाचौथ व्रत

Thu, 20 Oct 2016 12:32 AM IST
अमन वर्मा/अमर उजाला,उध्ामपुर
अमन वर्मा/अमर उजाला,उध्ामपुर Updated Thu, 20 Oct 2016 12:32 AM IST
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Satisfaction of the husband left home to return
करवा चौथ

44 वर्षों से पति के घर लौटने का इंतजार कर रही संतोष ने उनके वापस आने उम्मीद छोड़ दी है। वह हर वर्ष पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखती रही, लेकिन पथराई आंखें लिए संतोष ने इस बार व्रत नहीं रखा। बकौल संतोष, सरकार के रवैये के आगे उसकी उम्मीद हार गई। अब वह पति की घर वापसी की उम्मीद पूरी तरह छोड़ चुकी है।

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उधमपुर के रामनगर चौक की रहने वाली संतोष ने बताया कि वर्ष 1971 के भारत-पाक के युद्ध में संतोष के पति नायक कृष्ण लाल पाकिस्तानी जवानों के हत्थे चढ़ गए। तब से कृष्ण लाल पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। कुछ वर्ष पहले ही उन्हें उनके कोट लखपत जेल में कैद होने के बारे में पता चला था। राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक वह हर जगह जाकर पति की घर वापसी के लिए भरपूर कोशिश करती रही।
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दिल्ली में जंतर मंतर पर भी धरना दिया। सेना के अधिकारियों से बात की। यहां तक कि भारत दौरे पर आए पाक उच्चायुक्त अंसार बर्नी को कृष्ण लाल की एक फाइल भी सौंपी गई, पर कुछ भी नहीं हो पाया।
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वर्ष 2009 में सरबजीत को फांसी के फैसले के बाद बर्नी सरबजीत के  परिवार से मिलने पंजाब आए थे। कई सरकारें आई और गईं, लेकिन किसी ने भी देश के पूरा जीवन समर्पित करने वाले वीर सिपाही कृष्ण लाल के लिए कोई कोशिश नहीं की। 44 वर्षों से उम्मीद का दामन थामने के बाद आखिरकार उनके सब्र ने जवाब दे दिया। अब वह पति के घर लोटने की उम्मीद छोड़ चुकी हैं, इसलिए इस वर्ष उन्होंने पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ व्रत नहीं रखा।

संतोष के जमाई बिशन शर्मा ने कहा कि इतने वर्षों तक जद्दोजहद करने के बाद भी उनके हाथों में सिर्फ असफलता ही आई। अब तब किसी भी सरकार ने सकारात्मक रवैया नहीं दिखाया। शुरू से ही सरकारें इस मामले में अपने खामोश बनी रहीं। सरकारों के नकारात्मक रवैये के कारण ही कई लोग अपनों से मिलने की उम्मीद छोड़ बैठे हैं।

पति के युद्धबंदी होने के बाद संतोष के जीवन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। शादी के एक साल बाद ही कृष्ण लाल युद्ध पर गए, फिर लौटकर नहीं आए। पति के युद्धबंदी होने के कुछ दिनों बाद संतोष ने बेटी को जन्म दिया। बेटी के लालन पालन में संतोष को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा।


शिक्षा विभाग में शिक्षक की नौकरी कर संतोष ने अपनी बेटी को भी पाला, साथ ही अपने पति की घर वापसी के लिए प्रयास भी करती रही। बेटी ने जन्म के बाद से पिता के बारे में मां से केवल सुना ही है। वह अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में ही देख पाई है।

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