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अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ रही पानी की किल्लत
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उधमपुर। जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने शुक्रवार को लगातार 29वें दिन हड़ताल को जारी रख कर रोष प्रकट किया। कुछ कर्मचारी जम्मू में चल रहे धरना प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुए। हड़ताल के कारण जिले के शहरी व ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।
हड़ताल शुरू होने के साथ ही अस्थायी कर्मचारियों ने पीएचई स्टेशन बाड़यां के बाहर धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कर्मचारी हर रोज सुबह दस से शाम चार बजे तक धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। शुक्रवार को संभाग स्तर का प्रदर्शन भाजपा मुख्यालय के बाहर किया गया था। इसमें हिस्सा लेने के लिए उधमपुर से भी कुछ कर्मचारी जम्मू रवाना हो गए। जगदीश कुमार, संजय कुमार, अमित व अन्य कर्मचारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से मांगों को लेकर कुछ नहीं किया जा रहा है। वहीं, कुछ अधिकारियों व नेताओं ने उनकी नियुक्ति पर ही सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया है। इसकी सभी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। करीब 20 वर्ष से सरकार व जलशक्ति विभाग के अधिकारी उनसे काम करवा रहे हैं। नियम अनुसार सबको सात वर्ष का अस्थायी कार्यकाल पूरा करने के बाद ही स्थायी कर देना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया और झूठे आश्वासन देकर लगातार काम करवाया। इसके साथ ही प्रशासन ने साढ़े चार वर्ष से वेतन न देकर हद पार कर दी है। उनके सभी त्योहार बिना वेतन के मनाए जा रहे हैं। सरकार को एक बात समझ लेनी चाहिए कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल के कारण लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। पंचैरी, चिनैनी, मजालता, रामनगर में सबसे ज्यादा जलापूर्ति प्रभावित है। शहर के विभिन्न हिस्सों में भी लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।
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हड़ताल शुरू होने के साथ ही अस्थायी कर्मचारियों ने पीएचई स्टेशन बाड़यां के बाहर धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कर्मचारी हर रोज सुबह दस से शाम चार बजे तक धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। शुक्रवार को संभाग स्तर का प्रदर्शन भाजपा मुख्यालय के बाहर किया गया था। इसमें हिस्सा लेने के लिए उधमपुर से भी कुछ कर्मचारी जम्मू रवाना हो गए। जगदीश कुमार, संजय कुमार, अमित व अन्य कर्मचारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से मांगों को लेकर कुछ नहीं किया जा रहा है। वहीं, कुछ अधिकारियों व नेताओं ने उनकी नियुक्ति पर ही सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया है। इसकी सभी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। करीब 20 वर्ष से सरकार व जलशक्ति विभाग के अधिकारी उनसे काम करवा रहे हैं। नियम अनुसार सबको सात वर्ष का अस्थायी कार्यकाल पूरा करने के बाद ही स्थायी कर देना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया और झूठे आश्वासन देकर लगातार काम करवाया। इसके साथ ही प्रशासन ने साढ़े चार वर्ष से वेतन न देकर हद पार कर दी है। उनके सभी त्योहार बिना वेतन के मनाए जा रहे हैं। सरकार को एक बात समझ लेनी चाहिए कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल के कारण लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। पंचैरी, चिनैनी, मजालता, रामनगर में सबसे ज्यादा जलापूर्ति प्रभावित है। शहर के विभिन्न हिस्सों में भी लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।
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