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आपदा प्रबंधन का प्रोजेक्ट अधर में
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर
Updated Fri, 05 Feb 2016 12:56 AM IST
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जिले में भूस्खलन, बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदा के लिए मंजूर किया 13 करोड़ का आपदा प्रबंधन प्रोजेक्ट अभी तक अधर में लटका हुआ है।
इस प्रोजेक्ट पर चल रहे काम में सालों लग गए। इस बीच दर्जनों लोग प्राकृतिक आपदा में जान भी गंवा चुके हैं। प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने से अभी तक सद्दल गांव सबसे अधिक प्रभावित रहा।
दो साल से उधमपुर जिला प्राकृतिक आपदा का शिकार हो रहा है। सद्दल सबसे बड़ी त्रासदी का गवाह रहा है। आसपास क्षेत्रों में माल-मवेशी का काफी नुकसान हुआ।
सद्दल के गांव के लिए नई जगह की तलाश की गई। कई लोग अब भी छत के बिना खुले आसमान तले रात गुजराने पर मजबूर हैं। कई मकान गिरे और जानवरों की भी मौत हो गई थी। पैंथर्स अध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया के अनुसार इस आपदा से निपटने के लिए उन्होंने जिले के लिए 13 करोड़ रुपये का आपदा प्रबंधन प्रोजेक्ट को पास कराया था।
प्रोजेक्ट के तहत केवल बिरमा पुल पर ही काम हुआ। एक साल में काम पूरा किया जाना था। इसमें कई साल लग गए। इसके कहीं कोई काम नहीं हुआ है।
उन्होंने मांग की कि प्रोजेक्ट पर काम जल्द पूरा किया जाए। लोगों को मुआवजा भी पूरी तरह से नहीं मिल पाया है। यह जम्मू संभाग से भेदभाव की मिसाल है।
उन्होंने मांग की है कि इस राशि को लोगों के राहत के लिए उपयोग में लाकर प्राकृतिक आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाया जाए।
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इस प्रोजेक्ट पर चल रहे काम में सालों लग गए। इस बीच दर्जनों लोग प्राकृतिक आपदा में जान भी गंवा चुके हैं। प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने से अभी तक सद्दल गांव सबसे अधिक प्रभावित रहा।
दो साल से उधमपुर जिला प्राकृतिक आपदा का शिकार हो रहा है। सद्दल सबसे बड़ी त्रासदी का गवाह रहा है। आसपास क्षेत्रों में माल-मवेशी का काफी नुकसान हुआ।
सद्दल के गांव के लिए नई जगह की तलाश की गई। कई लोग अब भी छत के बिना खुले आसमान तले रात गुजराने पर मजबूर हैं। कई मकान गिरे और जानवरों की भी मौत हो गई थी। पैंथर्स अध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया के अनुसार इस आपदा से निपटने के लिए उन्होंने जिले के लिए 13 करोड़ रुपये का आपदा प्रबंधन प्रोजेक्ट को पास कराया था।
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प्रोजेक्ट के तहत केवल बिरमा पुल पर ही काम हुआ। एक साल में काम पूरा किया जाना था। इसमें कई साल लग गए। इसके कहीं कोई काम नहीं हुआ है।
उन्होंने मांग की कि प्रोजेक्ट पर काम जल्द पूरा किया जाए। लोगों को मुआवजा भी पूरी तरह से नहीं मिल पाया है। यह जम्मू संभाग से भेदभाव की मिसाल है।
उन्होंने मांग की है कि इस राशि को लोगों के राहत के लिए उपयोग में लाकर प्राकृतिक आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाया जाए।