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उत्तरी कमान ने मनाया 50वां स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस
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उधमपुर। उधमपुर में वीरवार को उत्तरी कमान का 50वां स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर नार्दर्न कमान मुख्यालय के सीओएस लेफ्टिनेंट जनरल एस हरिमोहन अय्यर के नेतृत्व में कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी आदि ने ध्रुव युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
बताया कि 17 जून, 1972 को उत्तरी कमान का गठन किया गया था। सेना कमांडर ने कहा कि यह गौरवशाली वर्ष ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन स्नो लैपर्ड में उत्तरी कमान की ऐतिहासिक उपलब्धियों का प्रमाण है। नियंत्रण रेखा और एलएसी पर की गई कार्रवाई में सेना ने कई पुरस्कार जीते हैं। जवानों ने न केवल राष्ट्र को अस्थिर करने के प्रयासों को विफल किया है, बल्कि स्थानीय लोगों के दिल में भी खास जगह बनाई है।
हर आपदा में सेना ने की लोगों की मदद
उत्तरी कमान हर प्राकृतिक आपदा जैसे बर्फीले तूफान, भूकंप (2005), लेह में बादल फटने (2010), जम्मू और कश्मीर में बाढ़ (2014) और हिमस्खलन के दौरान प्रदेश और लद्दाख के प्रशासन और लोगों की सहायता करने में सबसे आगे रही है। वर्तमान कोरोना महामारी से मुक्त होने में सेना लोगों की सहायता करने सहित अन्य जरूरी सामान मुहैया करवा रही है। इस मौके पर उन्होंने कमान, सेना और राष्ट्रीय ध्वज को ऊंचा रखने के लिए उनके असाधारण नेतृत्व, साहस और बलिदान के लिए सभी रैंकों की सराहना की। वहीं, राष्ट्र की अखंडता की रक्षा करने और साहस के साथ संघर्ष करने के संकल्प लिया है।
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बताया कि 17 जून, 1972 को उत्तरी कमान का गठन किया गया था। सेना कमांडर ने कहा कि यह गौरवशाली वर्ष ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन स्नो लैपर्ड में उत्तरी कमान की ऐतिहासिक उपलब्धियों का प्रमाण है। नियंत्रण रेखा और एलएसी पर की गई कार्रवाई में सेना ने कई पुरस्कार जीते हैं। जवानों ने न केवल राष्ट्र को अस्थिर करने के प्रयासों को विफल किया है, बल्कि स्थानीय लोगों के दिल में भी खास जगह बनाई है।
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हर आपदा में सेना ने की लोगों की मदद
उत्तरी कमान हर प्राकृतिक आपदा जैसे बर्फीले तूफान, भूकंप (2005), लेह में बादल फटने (2010), जम्मू और कश्मीर में बाढ़ (2014) और हिमस्खलन के दौरान प्रदेश और लद्दाख के प्रशासन और लोगों की सहायता करने में सबसे आगे रही है। वर्तमान कोरोना महामारी से मुक्त होने में सेना लोगों की सहायता करने सहित अन्य जरूरी सामान मुहैया करवा रही है। इस मौके पर उन्होंने कमान, सेना और राष्ट्रीय ध्वज को ऊंचा रखने के लिए उनके असाधारण नेतृत्व, साहस और बलिदान के लिए सभी रैंकों की सराहना की। वहीं, राष्ट्र की अखंडता की रक्षा करने और साहस के साथ संघर्ष करने के संकल्प लिया है।
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