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Udhampur News: आईटीबीपी में भर्ती होकर नीलाक्षी ने कायम की महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल
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नीलाक्षी शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिला उधमपुर के ब्लाॅक घोरड़ी के सुलगार गांव (काल्डी) की नीलाक्षी शर्मा ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में चयनित होकर महिला सशक्तीकरण की एक मिसाल पेश की है। वह अपने क्षेत्र से पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने आईटीबीपी में शामिल होने का साहस दिखाया।
बीते साल के अंत में घोषित एसएससी जीडी फाइनल रिजल्ट 2024 में नीलाक्षी शर्मा ने यह कीर्तिमान स्थापित करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण का नई रोशनी दिखाई है। आईटीबीपी में चयन से वह जिला की अन्य महिलाओं के लिए भी एक रोल माडल के रूप में प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। नीलाक्षी की इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार खुश है बल्कि जिला वासी भी खुद पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री की तरफ से महिला सशक्तीकरण को दिया जा रहा बढ़ावा
आईटीबीपी को देश की कठिन पुलिस फोर्स में से एक माना जाता है। इसमें महिलाएं अधिक रुचि नहीं दिखाती हैं। लेकिन नीलाक्षी ने आईटीबीपी में शामिल होकर दूसरी महिलाओं को भी नई राह दिखाई है। अपने चयन से उत्साहित नीलाक्षी का कहना है कि आज प्रधानमंत्री की तरफ से महिला सशक्तीकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और यही वजह है कि आज महिलाएं अन्य क्षेत्रों के साथ ही बेल्ट फोर्सेज में भी अपना कॅरिअर बना रहीं हैं।
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पिता भी पुलिस में हैं, परिवार का मिला पूरा सहयोग
नीलाक्षी का कहना है कि बचपन से ही सपना था कि कुछ ऐसा अच्छा काम करना है जिससे परिवार उस पर गर्व करे और दूसरे भी उससे प्रेरणा ले सकें। खासकर महिलाओं के लिए एक उदाहरण बनने की चाहत थी कि महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं, वे पुरुषों की तरह हर क्षेत्र में अच्छा मुकाम हासिल कर सकती हैं। उनका कहना था कि इस मंजिल तक पहुंचने में उन्हें अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। परिवार में बहुत से लोग बेल्ट फोर्सेज में हैं। पिता भी स्वयं पुलिस में हैं। परिवार का भी पूरा सहयोग मिला है।
बेटियों को आगे बढ़ने में सहयोग दें, उन पर रोक न लगाएं
नीलाक्षी का मानना है कि आईटीबीपी बेशक एक कठिन पुलिस बल है और बहुत सी लड़कियां इसमें अपना कॅरिअर बनाना चाहती हैं लेकिन समाज के डर और हिचक से वह खुलकर आगे नहीं आ पातीं। मेरे इस प्रयास से ऐसी कई लड़कियों और उनके परिवारों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे बिना किसी डर व संकोच के अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करेंगी। अभिभावकों के लिए भी यही संदेश है कि अपनी बेटियों को आगे बढ़ने में सहयोग दें उन पर रोक न लगाएं।
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उधमपुर। जिला उधमपुर के ब्लाॅक घोरड़ी के सुलगार गांव (काल्डी) की नीलाक्षी शर्मा ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में चयनित होकर महिला सशक्तीकरण की एक मिसाल पेश की है। वह अपने क्षेत्र से पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने आईटीबीपी में शामिल होने का साहस दिखाया।
बीते साल के अंत में घोषित एसएससी जीडी फाइनल रिजल्ट 2024 में नीलाक्षी शर्मा ने यह कीर्तिमान स्थापित करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण का नई रोशनी दिखाई है। आईटीबीपी में चयन से वह जिला की अन्य महिलाओं के लिए भी एक रोल माडल के रूप में प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। नीलाक्षी की इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार खुश है बल्कि जिला वासी भी खुद पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री की तरफ से महिला सशक्तीकरण को दिया जा रहा बढ़ावा
आईटीबीपी को देश की कठिन पुलिस फोर्स में से एक माना जाता है। इसमें महिलाएं अधिक रुचि नहीं दिखाती हैं। लेकिन नीलाक्षी ने आईटीबीपी में शामिल होकर दूसरी महिलाओं को भी नई राह दिखाई है। अपने चयन से उत्साहित नीलाक्षी का कहना है कि आज प्रधानमंत्री की तरफ से महिला सशक्तीकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और यही वजह है कि आज महिलाएं अन्य क्षेत्रों के साथ ही बेल्ट फोर्सेज में भी अपना कॅरिअर बना रहीं हैं।
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पिता भी पुलिस में हैं, परिवार का मिला पूरा सहयोग
नीलाक्षी का कहना है कि बचपन से ही सपना था कि कुछ ऐसा अच्छा काम करना है जिससे परिवार उस पर गर्व करे और दूसरे भी उससे प्रेरणा ले सकें। खासकर महिलाओं के लिए एक उदाहरण बनने की चाहत थी कि महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं, वे पुरुषों की तरह हर क्षेत्र में अच्छा मुकाम हासिल कर सकती हैं। उनका कहना था कि इस मंजिल तक पहुंचने में उन्हें अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। परिवार में बहुत से लोग बेल्ट फोर्सेज में हैं। पिता भी स्वयं पुलिस में हैं। परिवार का भी पूरा सहयोग मिला है।
बेटियों को आगे बढ़ने में सहयोग दें, उन पर रोक न लगाएं
नीलाक्षी का मानना है कि आईटीबीपी बेशक एक कठिन पुलिस बल है और बहुत सी लड़कियां इसमें अपना कॅरिअर बनाना चाहती हैं लेकिन समाज के डर और हिचक से वह खुलकर आगे नहीं आ पातीं। मेरे इस प्रयास से ऐसी कई लड़कियों और उनके परिवारों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे बिना किसी डर व संकोच के अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करेंगी। अभिभावकों के लिए भी यही संदेश है कि अपनी बेटियों को आगे बढ़ने में सहयोग दें उन पर रोक न लगाएं।