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Udhampur News: मिट्टी की जांच और पर्याप्त खाद से बढ़ेगी पैदावार
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उधमपुर। बिना मिट्टी की जांच के अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग खेतों की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रहा हैै। ऐसे में किसान विभाग की निशुल्क मृदा परीक्षण सुविधा का लाभ उठाकर अपनी मिट्टी के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करें ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बरकरार रखी जा सके।
जिला आज भी लगभग 70 प्रतिशत कृषि पर निर्भर है। जिले में अधिकांश क्षेत्रों में रेतीली मिट्टी पाई जाती है, इसलिए किसानों को फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही खाद का प्रयोग करना चाहिए। मिट्टी में 17 प्रकार के आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जिनमें मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स शामिल हैं। कई किसान निर्धारित मात्रा से अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग कर देते हैं, जिससे समय के साथ मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।
धीरे-धीरे मिट्टी की सेहत में किया जा सकता है सुधार
रासायनिक खेती से सीधे प्राकृतिक खेती की ओर जाना संभव नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे रासायनिक खाद का उपयोग कम कर और जैविक विकल्प अपनाकर मिट्टी की सेहत में सुधार किया जा सकता है। किसानों को जीवामृत (वन अमृत) जैसी जैविक खाद अपनानी चाहिए, जिसे गुड़, बेसन, दही, गोबर और गोमूत्र से तैयार किया जाता है। इसके प्रयोग से मिट्टी के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। अब तक जिले के सात ब्लाकों से 125 मिट्टी के सैम्पल एकत्र किए जा चुके हैं। इनमें आज भी जैविक खेती की जाती है। विभाग की तरफ से मृदा परीक्षण सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। जांच के बाद किसानों को मिट्टी की स्थिति के अनुसार उर्वरकों और पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी जाती है।
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कैसे लिया जाता है मिट्टी का सैम्पल
कृषि विभाग के अनुसार मिट्टी का सैम्पल जलभराव, कीचड़ या असामान्य स्थानों से नहीं लिया जाना चाहिए। खेत में जेड आकार में पांच अलग-अलग स्थानों से लगभग 15 सेंटीमीटर गहराई तक वी आकार में मिट्टी निकाली जाती है। सभी नमूनों को अच्छी तरह मिलाकर चार बराबर भाग किए जाते हैं। दो विपरीत भाग हटाकर शेष मिट्टी को फिर मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक लगभग 500 ग्राम मिट्टी न बच जाए। इसके बाद सैम्पल को साफ बैग में भरकर या अखबार में लपेटकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला लाया जाता है।
कृषि विस्तार अधिकारी जय माला ने किसानों से अपील की है कि प्रत्येक फसल चक्र से पहले अपने खेत की मिट्टी की मुफ्त जांच अवश्य कराएं। इससे सही मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग होगा, उत्पादन बढ़ेगा, लागत कम होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित रहेगी।
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जिला आज भी लगभग 70 प्रतिशत कृषि पर निर्भर है। जिले में अधिकांश क्षेत्रों में रेतीली मिट्टी पाई जाती है, इसलिए किसानों को फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही खाद का प्रयोग करना चाहिए। मिट्टी में 17 प्रकार के आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जिनमें मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स शामिल हैं। कई किसान निर्धारित मात्रा से अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग कर देते हैं, जिससे समय के साथ मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।
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धीरे-धीरे मिट्टी की सेहत में किया जा सकता है सुधार
रासायनिक खेती से सीधे प्राकृतिक खेती की ओर जाना संभव नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे रासायनिक खाद का उपयोग कम कर और जैविक विकल्प अपनाकर मिट्टी की सेहत में सुधार किया जा सकता है। किसानों को जीवामृत (वन अमृत) जैसी जैविक खाद अपनानी चाहिए, जिसे गुड़, बेसन, दही, गोबर और गोमूत्र से तैयार किया जाता है। इसके प्रयोग से मिट्टी के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। अब तक जिले के सात ब्लाकों से 125 मिट्टी के सैम्पल एकत्र किए जा चुके हैं। इनमें आज भी जैविक खेती की जाती है। विभाग की तरफ से मृदा परीक्षण सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। जांच के बाद किसानों को मिट्टी की स्थिति के अनुसार उर्वरकों और पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी जाती है।
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कैसे लिया जाता है मिट्टी का सैम्पल
कृषि विभाग के अनुसार मिट्टी का सैम्पल जलभराव, कीचड़ या असामान्य स्थानों से नहीं लिया जाना चाहिए। खेत में जेड आकार में पांच अलग-अलग स्थानों से लगभग 15 सेंटीमीटर गहराई तक वी आकार में मिट्टी निकाली जाती है। सभी नमूनों को अच्छी तरह मिलाकर चार बराबर भाग किए जाते हैं। दो विपरीत भाग हटाकर शेष मिट्टी को फिर मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक लगभग 500 ग्राम मिट्टी न बच जाए। इसके बाद सैम्पल को साफ बैग में भरकर या अखबार में लपेटकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला लाया जाता है।
कृषि विस्तार अधिकारी जय माला ने किसानों से अपील की है कि प्रत्येक फसल चक्र से पहले अपने खेत की मिट्टी की मुफ्त जांच अवश्य कराएं। इससे सही मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग होगा, उत्पादन बढ़ेगा, लागत कम होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित रहेगी।