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नशे के खिलाफ अभियान में विभागों के बीच समन्वय जरूरी : डीसी
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रामबन। उपायुक्त रामबन मोहम्मद इलियास खान ने शुक्रवार को जिला स्तरीय नारको समन्वय समिति (एनसीओआरडी) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नशे के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई। उन्होंने जिले में नशे के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने तथा नशे के खतरे को समाप्त करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वित प्रयासों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
उपायुक्त ने दोहराया कि नशे के खिलाफ लड़ाई मिशन मोड में जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि रामबन को नशामुक्त जिला बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर कार्रवाई, रोकथाम संबंधी उपायों और जनभागीदारी को सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक में एसएसपी रामबन अन्ना लता सिन्हा, अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक, एसीआर शौकत हयात मट्टू, एसडीएम रामसू सैयद मजाहिर हुसैन शाह, एसीडी मोहम्मद इमरान नाइक, प्रिंसिपल जीडीसी रामबन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ), तहसीलदारों, ड्रग कंट्रोल अधिकारी सहित विभिन्न प्रवर्तन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अन्य एसडीएम और संबंधित अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लिया।
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पिछली बैठक में जारी निर्देशों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने ड्रग इंस्पेक्टर को संबंधित तहसीलदारों और पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और दुरुपयोग के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए।
नशे की रोकथाम के लिए सक्रिय और प्रभावी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए डीसी ने युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले कारणों की गहन समीक्षा करने और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।
जिला अस्पताल रामबन में संचालित नशा मुक्ति उपचार केंद्र (एटीएफ) की कार्यप्रणाली और नवनियुक्त कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ओपीडी और आईपीडी सुविधाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावी पुनर्वास और दोबारा नशे की लत से बचाव के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा, परामर्श और नियमित फॉलोअप उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया।
उपायुक्त ने जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ), मुख्य शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों में सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियानों के माध्यम से जागरूकता गतिविधियां तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने आबकारी विभाग को विशेष रूप से युवाओं पर केंद्रित व्यापक जागरूकता अभियान चलाने तथा संवेदनशील स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करने को भी कहा।
जीडीसी कॉलेजों के प्रिंसिपलों और मुख्य शिक्षा अधिकारी को विद्यार्थियों की गतिविधियों पर करीबी निगरानी रखने तथा उन्हें नशे से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों के निर्धारित दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध को प्रवर्तन एजेंसियों की मदद से सख्ती से लागू करने को कहा गया।
डीसी ने सभी जिला एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने और अपने कर्मचारियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जुड़े किसी भी मामले की जानकारी मिलने पर उचित उपचार, हस्तक्षेप और सहायता के लिए उसे संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाए।
एसडीएम और संबंधित तहसीलदारों को निर्धारित मानदंडों एवं सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पंचायतों को नशामुक्त घोषित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।
इस अवसर पर एसएसपी रामबन अन्ना लता सिन्हा ने समाज को नशामुक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, सामुदायिक संगठनों और नागरिक समाज के बीच बेहतर तालमेल एवं समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
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उपायुक्त ने दोहराया कि नशे के खिलाफ लड़ाई मिशन मोड में जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि रामबन को नशामुक्त जिला बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर कार्रवाई, रोकथाम संबंधी उपायों और जनभागीदारी को सुनिश्चित किया जाएगा।
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बैठक में एसएसपी रामबन अन्ना लता सिन्हा, अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक, एसीआर शौकत हयात मट्टू, एसडीएम रामसू सैयद मजाहिर हुसैन शाह, एसीडी मोहम्मद इमरान नाइक, प्रिंसिपल जीडीसी रामबन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ), तहसीलदारों, ड्रग कंट्रोल अधिकारी सहित विभिन्न प्रवर्तन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अन्य एसडीएम और संबंधित अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लिया।
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पिछली बैठक में जारी निर्देशों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने ड्रग इंस्पेक्टर को संबंधित तहसीलदारों और पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और दुरुपयोग के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए।
नशे की रोकथाम के लिए सक्रिय और प्रभावी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए डीसी ने युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले कारणों की गहन समीक्षा करने और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।
जिला अस्पताल रामबन में संचालित नशा मुक्ति उपचार केंद्र (एटीएफ) की कार्यप्रणाली और नवनियुक्त कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ओपीडी और आईपीडी सुविधाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावी पुनर्वास और दोबारा नशे की लत से बचाव के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा, परामर्श और नियमित फॉलोअप उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया।
उपायुक्त ने जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ), मुख्य शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों में सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियानों के माध्यम से जागरूकता गतिविधियां तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने आबकारी विभाग को विशेष रूप से युवाओं पर केंद्रित व्यापक जागरूकता अभियान चलाने तथा संवेदनशील स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करने को भी कहा।
जीडीसी कॉलेजों के प्रिंसिपलों और मुख्य शिक्षा अधिकारी को विद्यार्थियों की गतिविधियों पर करीबी निगरानी रखने तथा उन्हें नशे से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों के निर्धारित दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध को प्रवर्तन एजेंसियों की मदद से सख्ती से लागू करने को कहा गया।
डीसी ने सभी जिला एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने और अपने कर्मचारियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जुड़े किसी भी मामले की जानकारी मिलने पर उचित उपचार, हस्तक्षेप और सहायता के लिए उसे संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाए।
एसडीएम और संबंधित तहसीलदारों को निर्धारित मानदंडों एवं सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पंचायतों को नशामुक्त घोषित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।
इस अवसर पर एसएसपी रामबन अन्ना लता सिन्हा ने समाज को नशामुक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, सामुदायिक संगठनों और नागरिक समाज के बीच बेहतर तालमेल एवं समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।