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Udhampur News: कठिन चढ़ाई, पथरीला व संकरा मार्ग पार कर किए बाबा युग के दर्शन
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चिनैनी। युगधार मेले में रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। कठिन चढ़ाई, पथरीला व संकरा मार्ग पार कर बाबा युग के दर्शन किए।
सुबह सुंदरकांड पाठ, भजन कीर्तन व यज्ञ का दौर चला। सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कला को दर्शाया गया। कलाकारों ने कुड, भाख, डोगरी गानों के जरिये संस्कृति को उजागर किया। नृत्य को देखकर लोग झूमने को मजबूर हो गए।
बाबा युग स्थल पर जाने के लिए कठिन चढ़ाई, पथरीला व संकरा मार्ग भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सका। आस्था इतनी थी कि श्रद्धालु करीब साढ़े चार किलोमीटर पैदल मार्ग पर जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे। पूर्व संध्या पर भी सैकड़ों श्रद्धालु बाबा युग के दर्शन के लिए पहुंच चुके थे जबकि सुबह के समय श्रद्धालु चढ़ाई चढ़ने के लिए पहुंच गए थे। चिनैनी से बदनसू तक लोग गाड़ियों के जरिये आए। इसके बाद कठिन चढ़ाई शुरू की। ऊंची चोटी पर स्थित बाबा युग के दर्शन के लिए श्रद्धालु धीरे-धीरे आगे बढ़कर रास्ता तय कर रहे थे और बाबा युग के स्थान पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं की थकान दूर हो गई।
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कई श्रद्धालुओं ने हाथों में छड़ी ली हुई थी ताकि आसानी से चढ़ा जा सके। कई लोगों ने घोड़े की सुविधा का लाभ लिया। ठंडे मौसम के बीच उत्साह इस कदर था कि हर कोई मेले में पहुंच कर वहां की खूबसूरती को देखना चाह रहा था। दूर तक फैला बड़ा मैदान हर किसी को आकर्षित कर रहा था। अंतिम चढ़ाई पार करते ही श्रद्धालु वादियों को देखकर आनंदित महसूस कर रहे थे। मेले में अस्थायी दुकानें लगाई गई थीं जहां लोगों ने खूब खरीदारी की जबकि मेलास्थल पर लोगों ने मिठाइयां, खिलौने और अन्य सामान खरीदकर प्राचीन परंपरा को निभाया।
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क्रिकेट का भी उठाया आनंद
मेले के दौरान पहुंचे लोगों ने मैदान देखकर क्रिकेट का खूब आनंद उठाया। दर्शन के बाद मैदान में क्रिकेट खेलना शुरू किया। बाबा युग में मेला कमेटी की ओर से विशाल लंगर का आयोजन किया गया था। इसके लिए श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी हुई थी जबकि पीने के पानी के लिए कमेटी की ओर से विशेष इंतजाम किए हुए थे। चोटी पर स्थित बाबा युग में पानी के लिए करीब एक किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है लेकिन सेवादारों ने मेलास्थल पर पानी की सुविधा देकर श्रद्धालुओं की मुश्किलें आसान कीं।
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सुबह सुंदरकांड पाठ, भजन कीर्तन व यज्ञ का दौर चला। सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कला को दर्शाया गया। कलाकारों ने कुड, भाख, डोगरी गानों के जरिये संस्कृति को उजागर किया। नृत्य को देखकर लोग झूमने को मजबूर हो गए।
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बाबा युग स्थल पर जाने के लिए कठिन चढ़ाई, पथरीला व संकरा मार्ग भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सका। आस्था इतनी थी कि श्रद्धालु करीब साढ़े चार किलोमीटर पैदल मार्ग पर जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे। पूर्व संध्या पर भी सैकड़ों श्रद्धालु बाबा युग के दर्शन के लिए पहुंच चुके थे जबकि सुबह के समय श्रद्धालु चढ़ाई चढ़ने के लिए पहुंच गए थे। चिनैनी से बदनसू तक लोग गाड़ियों के जरिये आए। इसके बाद कठिन चढ़ाई शुरू की। ऊंची चोटी पर स्थित बाबा युग के दर्शन के लिए श्रद्धालु धीरे-धीरे आगे बढ़कर रास्ता तय कर रहे थे और बाबा युग के स्थान पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं की थकान दूर हो गई।
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कई श्रद्धालुओं ने हाथों में छड़ी ली हुई थी ताकि आसानी से चढ़ा जा सके। कई लोगों ने घोड़े की सुविधा का लाभ लिया। ठंडे मौसम के बीच उत्साह इस कदर था कि हर कोई मेले में पहुंच कर वहां की खूबसूरती को देखना चाह रहा था। दूर तक फैला बड़ा मैदान हर किसी को आकर्षित कर रहा था। अंतिम चढ़ाई पार करते ही श्रद्धालु वादियों को देखकर आनंदित महसूस कर रहे थे। मेले में अस्थायी दुकानें लगाई गई थीं जहां लोगों ने खूब खरीदारी की जबकि मेलास्थल पर लोगों ने मिठाइयां, खिलौने और अन्य सामान खरीदकर प्राचीन परंपरा को निभाया।
क्रिकेट का भी उठाया आनंद
मेले के दौरान पहुंचे लोगों ने मैदान देखकर क्रिकेट का खूब आनंद उठाया। दर्शन के बाद मैदान में क्रिकेट खेलना शुरू किया। बाबा युग में मेला कमेटी की ओर से विशाल लंगर का आयोजन किया गया था। इसके लिए श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी हुई थी जबकि पीने के पानी के लिए कमेटी की ओर से विशेष इंतजाम किए हुए थे। चोटी पर स्थित बाबा युग में पानी के लिए करीब एक किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है लेकिन सेवादारों ने मेलास्थल पर पानी की सुविधा देकर श्रद्धालुओं की मुश्किलें आसान कीं।