{"_id":"6abebfb727f64934090d9d1a","slug":"jammu-kashmir-news-udhampur-news-c-202-1-sjam1011-141236-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजालता हत्याकांड: नौ साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी अवंत सिंह को उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजालता हत्याकांड: नौ साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी अवंत सिंह को उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना
विज्ञापन
उधमपुर। अतिरिक्त प्रधान सत्र न्यायाधीश वाईपी शर्मा की अदालत ने नौ साल पुराने चर्चित हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना राशि न चुकाने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं जुर्माने की राशि मृतक की पत्नी को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
मामले के अनुसार 17 अप्रैल 2017 को मजालता पुलिस स्टेशन को फोन पर गुप्त सूचना मिली थी कि चन्नी मोड़ सरमाली निवासी अवंत सिंह ने पुरानी रंजिश के चलते सुबह करीब 9 बजकर 45 मिनट पर प्रेम सिंह के घर में घुसकर लोहे के एंगल से उसके सिर पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में प्रेम सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। सूचना के आधार पर मजालता पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में अदालत में चालान पेश किया।
सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ सिद्ध हुआ अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है, जिसमें एक अनमोल मानव जीवन का अंत हुआ है। हालांकि सजा सुनाते समय केवल अपराध की जघन्यता ही नहीं, बल्कि दोषी की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होना और सुधार की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
विज्ञापन
अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या के मामलों में आजीवन कारावास एक नियम है, जबकि मृत्युदंड केवल दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही दिया जाता है। अपराध के समय दोषी की उम्र 29 वर्ष थी और वह पिछले आठ साल से अधिक समय से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोषी अवंत सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आदेश दिया कि जांच और ट्रायल के दौरान उधमपुर जिला जेल में बिताई गई हिरासत की अवधि को धारा 428 सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत समायोजित किया जाएगा।
विज्ञापन
मामले के अनुसार 17 अप्रैल 2017 को मजालता पुलिस स्टेशन को फोन पर गुप्त सूचना मिली थी कि चन्नी मोड़ सरमाली निवासी अवंत सिंह ने पुरानी रंजिश के चलते सुबह करीब 9 बजकर 45 मिनट पर प्रेम सिंह के घर में घुसकर लोहे के एंगल से उसके सिर पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में प्रेम सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। सूचना के आधार पर मजालता पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में अदालत में चालान पेश किया।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ सिद्ध हुआ अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है, जिसमें एक अनमोल मानव जीवन का अंत हुआ है। हालांकि सजा सुनाते समय केवल अपराध की जघन्यता ही नहीं, बल्कि दोषी की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होना और सुधार की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
विज्ञापन
अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या के मामलों में आजीवन कारावास एक नियम है, जबकि मृत्युदंड केवल दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही दिया जाता है। अपराध के समय दोषी की उम्र 29 वर्ष थी और वह पिछले आठ साल से अधिक समय से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोषी अवंत सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आदेश दिया कि जांच और ट्रायल के दौरान उधमपुर जिला जेल में बिताई गई हिरासत की अवधि को धारा 428 सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत समायोजित किया जाएगा।