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पांच साल के दौरान जिला अस्पताल में 81 कैंसर पीड़ितों की स्क्रीनिंग

Tue, 31 May 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर Updated Tue, 31 May 2016 12:57 AM IST
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In five years, screened 81 cancer victims
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आज विश्व तंबाकू दिवस है। लेकिन इन दिन की अहमियत पर शायद ही कोई गौर करता होगा। जिस तरह से नई पीढ़ी तंबाकू जनित नशे के शिकार हो रहे हैं, उसी तरह से कैंसर पीड़ितों की संख्या भी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों से साफ है कि कैंसर यदि मौत का रूप है तो तंबाकू यमदूत से कम नहीं।

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पिछले पांच साल में जिला अस्पताल में कैंसर पीड़ित मरीजों की संख्या 81 के करीब पहुंच गई हैं। इनमें से अधिकतर मरीज अपनी स्क्रीनिंग और उपचार जिला अस्पताल में करवा रहे हैं। नशे के दुष्प्रभावों से लोगों को जागरूक करने के लिए समाजसेवी संस्थाएं और स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता शिविर लगाया जाता है, लेकिन इसका खास असर लोगों पर होता नहीं दिख रहा है। तंबाकू का सेवन करने वाले लोग इसे अनदेखा कर तंबाकू का सेवन कर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे रहे हैं।
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तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में अधिकतर मुंह का कैंसर होता है, लेकिन डाक्टरों के मुताबिक तंबाकू से मुंह के साथ रक्त और फेफड़ों का कैंसर भी हो रहा है। हालांकि सिगरेट और तंबाकू के पैकेट के 30 फीसदी हिस्से पर चेतावनी लिखी होती है। लेकिन इससे बेफिक्र लोग सिगरेट के धुएं या गुटका और पान मसाला की खुशबू के रूप में तंबाकू ग्रहण कर रहे हैं।
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सबसे बड़ी बात तो यह है कि तंबाकू की ब्रिकी सरेआम होती है। इससे इसके सेवन करने वाले लोगों में भी कोई कमी नहीं आ रही है। बाद में जब लोगों को कैंसर जैसी घातक बीमारी का पता चलता है तो वह उस स्टेज पर पहुंच गया होता है कि उसका उपचार कर पाना डाक्टरों के लिए भी संभव नहीं होता है।


स्वास्थ्य विभाग हरसंभव प्रयास करता है, लेकिन केवल जागरूकता से नशे पर रोकथाम संभव नहीं है। इसके लिए सरकार को कड़ा रुख अपनाना होगा। तंबाकू जैसे जानलेवा उत्पादक अगर बाजारों तक नहीं पहुंच पाएंगे तो लोग इसका सेवन नहीं कर सकते हैं। इसके लिए जनसहमति भी जरूरी है।
-डॉ. नरेंद्र सिंह भत्याल, सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल

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