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Udhampur News: तीन डॉक्टरों के सहारे पीएचस मजालता, नाम बदला पर व्यवस्थाएं नहीं
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मजालता। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मजालता का नाम तो बदल गया, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं। आयुष्मान आरोग्य मन्दिर बने इस पीएचसी में स्टाफ की कमी बरकार है। इससे मरीजों को सभी तरह का उपचार नहीं मिल पा रहा। नाम बदलने के साथ तहसील मुख्यालय के इस अस्पताल में सेवाओं का विस्तार जरूरी है। पीएचसी में प्रतिदिन औसतन 35 मरीज पहुंचते हैं। गायनी और बच्चों का डॉक्टर नहीं होने से लोगों को जीएमसी उधमपुर या फिर जम्मू का रुख करना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से एमबीबीएस डॉक्टर ओपीडी या फिर इमरजेंसी में इलाज करते हैं। अगर बच्चा गंभीर होता है तो उधमपुर या जम्मू अस्पताल रेफर किया जाता है। पीएचसी तीन एमबीबीएस के सहारे चल रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, लेकिन टेस्ट हफ्ते या पंद्रह दिन दिन में एक बार होता है। एक्सरे भी हफ्ते में तीन दिन होता है। यह सब स्टाफ की कमी की वजह से है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित में स्टाफ पूरा करवाने के लिए अवगत करवाया गया है। समस्या के समाधान की जगह केवल आश्वासन मिला है। अब अस्पताल परिसर में एक नए ब्लॉक का निर्माण हो रहा है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सुविधा मिलेगी।
दो राज्यों को जोड़ता है धार रोड
मजालता तहसील मुख्यालय धार रोड से सटा है। यह रोड हिमाचल, पंजाब सहित कठुआ और सांबा जिले को उधमपुर व कश्मीर घाटी के साथ जोड़ता है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मानसर झील के करीब होने की वजह से बाहरी राज्यों से पर्यटकों की भी आवाजाही है। ऐसे में सड़क हादसों के दौरान गंभीर घायलों के लिए मजालता व उसके आसपास इमरजेंसी से जुड़ी पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं नहीं हैं।
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ब्लॉक दिवस पर उठाई गई थी मांग
डीडीसी मजालता अमित शर्मा ने बताया कि सभी मंचों पर उपजिला अस्पताल और स्टाफ की कमी को लेकर मुद्दा उठाया गया है। अभी ब्लॉक दिवस पर लगे डीसी दरबार में भी यह मुद्दा उठाया गया। प्रशासन को चाहिए कि मजालता वासियों की मांग को जल्द पूरा किया जाए।
.........
कोट
उपजिला अस्पताल की मांग से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। वहीं डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी को दूर करने पर भी बात हुई है। जल्द ही स्टाफ की नियुक्ति की उम्मीद है।
-डॉ. मोहम्मद लतीफ, बीएमओ मजालता
फोटो सहित
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से एमबीबीएस डॉक्टर ओपीडी या फिर इमरजेंसी में इलाज करते हैं। अगर बच्चा गंभीर होता है तो उधमपुर या जम्मू अस्पताल रेफर किया जाता है। पीएचसी तीन एमबीबीएस के सहारे चल रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, लेकिन टेस्ट हफ्ते या पंद्रह दिन दिन में एक बार होता है। एक्सरे भी हफ्ते में तीन दिन होता है। यह सब स्टाफ की कमी की वजह से है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित में स्टाफ पूरा करवाने के लिए अवगत करवाया गया है। समस्या के समाधान की जगह केवल आश्वासन मिला है। अब अस्पताल परिसर में एक नए ब्लॉक का निर्माण हो रहा है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सुविधा मिलेगी।
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दो राज्यों को जोड़ता है धार रोड
मजालता तहसील मुख्यालय धार रोड से सटा है। यह रोड हिमाचल, पंजाब सहित कठुआ और सांबा जिले को उधमपुर व कश्मीर घाटी के साथ जोड़ता है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मानसर झील के करीब होने की वजह से बाहरी राज्यों से पर्यटकों की भी आवाजाही है। ऐसे में सड़क हादसों के दौरान गंभीर घायलों के लिए मजालता व उसके आसपास इमरजेंसी से जुड़ी पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं नहीं हैं।
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ब्लॉक दिवस पर उठाई गई थी मांग
डीडीसी मजालता अमित शर्मा ने बताया कि सभी मंचों पर उपजिला अस्पताल और स्टाफ की कमी को लेकर मुद्दा उठाया गया है। अभी ब्लॉक दिवस पर लगे डीसी दरबार में भी यह मुद्दा उठाया गया। प्रशासन को चाहिए कि मजालता वासियों की मांग को जल्द पूरा किया जाए।
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कोट
उपजिला अस्पताल की मांग से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। वहीं डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी को दूर करने पर भी बात हुई है। जल्द ही स्टाफ की नियुक्ति की उम्मीद है।
-डॉ. मोहम्मद लतीफ, बीएमओ मजालता
फोटो सहित