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दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करे सरकार
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उधमपुर। जिले की पंचैरी और मोंगरी तहसील में आज भी कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसलिए सरकार को ऐसे क्षेत्रों का संज्ञान लेकर मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवानी चाहिए। यह मांग डीडीसी सदस्य पंचैरी जसवीर सिंह ने प्रेसवार्ता में उठाई है।
उन्होंने कहा कि सरकार के अधिकतर विभाग कर्मचारियों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं का परिपालन एक बड़ी चुनौती है। सरकार को बड़े स्तर पर कर्मचारी भर्ती करने की आवश्यकता है। हालांकि कुछ समय में केंद्र सरकार, उप-राज्यपाल प्रशासन और पंचायती राज संस्था की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं के तेजी से निपटारे के लिए कदम उठाए गए हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी रफ्तार बहुत धीमी है। पंचैरी और मोंगरी क्षेत्र में अभी भी बहुत से गांव ऐसे हैं जहां बिजली की सुविधा नहीं है। लड्डा ए, लड्डा बी, दमनोत, कुलटैड का सड्डल, मंगोल सेरी, बकरूबड़ के अलावा 2014 में प्राकृतिक आपदा की चपेट में आया सद्दल गांव भी शामिल है। जहां आज तक लोगों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है।
इसके अलावा पंचैरी तहसील में तहसीलदार और मोंगरी में नायब तहसीलदार का पद रिक्त पड़ा है। पिछले कुछ समय में घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है। अधूरे कार्यों में तेजी से काम होना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण भी चुनौती से कम नहीं है। केंद्रीय सहायता से चल रही सरकारी परियोजनाओं और योजनाओं के परिपालन की गति बहुत धीमी है। बागवानी और पर्यटन जैसे उद्योगों में कुछ खास परिवर्तन नहीं लाया गया है। प्रदेश प्रशासन को इसके लिए जल्द उचित कदम उठाने चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सरकार के अधिकतर विभाग कर्मचारियों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं का परिपालन एक बड़ी चुनौती है। सरकार को बड़े स्तर पर कर्मचारी भर्ती करने की आवश्यकता है। हालांकि कुछ समय में केंद्र सरकार, उप-राज्यपाल प्रशासन और पंचायती राज संस्था की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं के तेजी से निपटारे के लिए कदम उठाए गए हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी रफ्तार बहुत धीमी है। पंचैरी और मोंगरी क्षेत्र में अभी भी बहुत से गांव ऐसे हैं जहां बिजली की सुविधा नहीं है। लड्डा ए, लड्डा बी, दमनोत, कुलटैड का सड्डल, मंगोल सेरी, बकरूबड़ के अलावा 2014 में प्राकृतिक आपदा की चपेट में आया सद्दल गांव भी शामिल है। जहां आज तक लोगों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है।
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इसके अलावा पंचैरी तहसील में तहसीलदार और मोंगरी में नायब तहसीलदार का पद रिक्त पड़ा है। पिछले कुछ समय में घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है। अधूरे कार्यों में तेजी से काम होना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण भी चुनौती से कम नहीं है। केंद्रीय सहायता से चल रही सरकारी परियोजनाओं और योजनाओं के परिपालन की गति बहुत धीमी है। बागवानी और पर्यटन जैसे उद्योगों में कुछ खास परिवर्तन नहीं लाया गया है। प्रदेश प्रशासन को इसके लिए जल्द उचित कदम उठाने चाहिए।
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