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Udhampur News: रक्तदान करने से मिलता है कई बीमारियों से छुटकारा
Sat, 14 Jun 2025 01:42 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Sat, 14 Jun 2025 01:42 AM IST
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उधमपुर के जीएमसी अस्पताल में बना ब्लड सेंटर। संवाद
- फोटो : udhampur
विश्व रक्तदान दिवस आज
जिला अस्पताल में लगाया जाएगा रक्तदान शिविर, युवा करेंगे रक्तदान
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। हर साल ब्लड सेंटर की ओर से 11 रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। 14 जून को पूरे विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है। इसके चलते अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई युवा व अन्य संस्थाओं के सदस्य आकर अपना रक्तदान करेंगे।
हर एक व्यक्ति साल में 4 बार अपना रक्तदान कर सकता है। क्योंकि जो भी व्यक्ति अपना रक्तदान करता है वह 90 दिनों के बाद फिर से अपना रक्तदान कर सकता है। जीएमसी अस्पताल में बने ब्लड सेंटर में प्रति वर्ष 13 सौ यूनिट ब्लड लोगों द्वारा दान किए जाने पर एकत्रित होता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों भारत ओर पाकिस्तान के बीच हुए तनाव व गोलाबारी के दौरान ब्लड बैंक से जीएमसी जम्मू को 30 यूनिट ब्लड भेजा गया था। ताकि गोलाबारी में घायल हुए लोगों को अगर खून की इलाज के दौरान कमी न आए। वहीं जीएमसी अस्पताल में हर माह 130 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है जोकि ब्लड बैंक में जमा रखे गए ब्लड देकर मरीजों की जान बचाई जाती है।
रक्तदान करने के फायदे
1. अतिरिक्त आयरन को हटाता है
2. एंडोर्फिन नामक अच्छे हार्मोन को रिलीज़ करता है
3. हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है
4. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है
5. वजन घटाने में मदद करता है
6. आयरन के अवशोषण में सुधार करता है
अस्पताल में प्रति वर्ष जमा होता है कई यूनिट ब्लड
अस्पताल में बने ब्लड सेंटर की बात करे तो प्रति वर्ष अस्पताल में विभिन्न संस्थाओं व संत निरंकारी, सीआरपीएफ, बीएसएफ, कॉलेज के विद्यार्थी, बैंक कर्मचारी के अलावा अन्य कई लोगों द्वारा रक्तदान कर 13 सौ यूनिट ब्लड दान किया जाता है। हालांकि पूरे वर्ष अस्पताल में 12 सौ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। जिसके चलते अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में रक्त जमा होता है ताकि गंभीर रूप से बीमार या कोई दुर्घटना में घायल हुए मरीज को इमरजेंसी में खून की जरूरत पड़ती है तो उन्हें सेंटर से दिया जाता है।
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अस्पताल में रोजाना 5 से 6 यूनिट ब्लड की पड़ती है जरूरत
जीएमसी जिला का मुख्य अस्पताल होने के चलते रोजाना अस्पताल में 5 से 6 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है जोकि अस्पताल में बने ब्लड सेंटर से दिया जा रहा है। अगर हम प्रति माह की बात करे तो 150 यूनिट ब्लड हर माह लगता है। कई बार तो अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए तो उस दिन 10 यूनिट की भी जरूरत पड़ जाती है जो कि अस्पताल में पर्याप्त रूप से उपलब्ध होता है। खासतौर पर गर्भवती महिलाएं जिनमें खून की कमी होती है उन्हें भी सेंटर से दिया जाता है ताकि समय पर उसका इलाज हो सके।
ब्लड सेंटर में नेगेटिव ग्रुप के लोगों की बना कर रखी गई है सूची
गौरतलब है कि एबी पॉजीटिव ब्लड मिलना बहुत आसान होता है अगर यू कहे कि पॉजिटिव ब्लड गु्रप सौ में से 80 से अधिक लोगों का होता है जबकि नेगेटिव गु्रप 10 से 20 प्रतिशत ही लोगों का होता है। जिसके चलते ब्लड सेंटर की ओर से ए नेगटिव, एबी नेगटिव, ओ नेगटिव, ब्लड गु्रप के लोगों की सेंटर के पास तकरीबन 50 लोगों की सूची बनाकर रखी गई है। ताकि कोई आपात स्थिति या फिर किसी मरीज को नेगटिव ब्लड की इमरजेंसी जरूरत पड़े तो सूची में लिखे उस व्यक्ति को काल कर बुलाकर उसका रक्त लिया जा सके। वैसे तो सेंटर में नेगटिव ब्लड को भी सेफ रखा गया है।
कोट
सेंटर में पर्याप्त मात्रा में ब्लड जमा है। जिसके चलते अस्पताल में इमरजेंसी में अगर किसी को रक्त की जरूरत पड़ती है तो सेंटर से उसी समय दे दिया जाता है। प्रति वर्ष 1300 यूनिट रक्त सेंटर में जमा होता है। जबकि निगेटिव ग्रुप के ब्लड को भी जमा रखा जाता है। ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मरीज को अगर नेगेटिव ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ती है तो उसे फौरन देकर उसकी जान बचाई जा सके।
डॉ. लुभना नसीर, अस्सिस्टेंट प्रोफेसर, इंचार्ज ब्लड सेंटर जीएमसी
फोटो सहित
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जिला अस्पताल में लगाया जाएगा रक्तदान शिविर, युवा करेंगे रक्तदान
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। हर साल ब्लड सेंटर की ओर से 11 रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। 14 जून को पूरे विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है। इसके चलते अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई युवा व अन्य संस्थाओं के सदस्य आकर अपना रक्तदान करेंगे।
हर एक व्यक्ति साल में 4 बार अपना रक्तदान कर सकता है। क्योंकि जो भी व्यक्ति अपना रक्तदान करता है वह 90 दिनों के बाद फिर से अपना रक्तदान कर सकता है। जीएमसी अस्पताल में बने ब्लड सेंटर में प्रति वर्ष 13 सौ यूनिट ब्लड लोगों द्वारा दान किए जाने पर एकत्रित होता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों भारत ओर पाकिस्तान के बीच हुए तनाव व गोलाबारी के दौरान ब्लड बैंक से जीएमसी जम्मू को 30 यूनिट ब्लड भेजा गया था। ताकि गोलाबारी में घायल हुए लोगों को अगर खून की इलाज के दौरान कमी न आए। वहीं जीएमसी अस्पताल में हर माह 130 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है जोकि ब्लड बैंक में जमा रखे गए ब्लड देकर मरीजों की जान बचाई जाती है।
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रक्तदान करने के फायदे
1. अतिरिक्त आयरन को हटाता है
2. एंडोर्फिन नामक अच्छे हार्मोन को रिलीज़ करता है
3. हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है
4. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है
5. वजन घटाने में मदद करता है
6. आयरन के अवशोषण में सुधार करता है
अस्पताल में प्रति वर्ष जमा होता है कई यूनिट ब्लड
अस्पताल में बने ब्लड सेंटर की बात करे तो प्रति वर्ष अस्पताल में विभिन्न संस्थाओं व संत निरंकारी, सीआरपीएफ, बीएसएफ, कॉलेज के विद्यार्थी, बैंक कर्मचारी के अलावा अन्य कई लोगों द्वारा रक्तदान कर 13 सौ यूनिट ब्लड दान किया जाता है। हालांकि पूरे वर्ष अस्पताल में 12 सौ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। जिसके चलते अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में रक्त जमा होता है ताकि गंभीर रूप से बीमार या कोई दुर्घटना में घायल हुए मरीज को इमरजेंसी में खून की जरूरत पड़ती है तो उन्हें सेंटर से दिया जाता है।
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अस्पताल में रोजाना 5 से 6 यूनिट ब्लड की पड़ती है जरूरत
जीएमसी जिला का मुख्य अस्पताल होने के चलते रोजाना अस्पताल में 5 से 6 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है जोकि अस्पताल में बने ब्लड सेंटर से दिया जा रहा है। अगर हम प्रति माह की बात करे तो 150 यूनिट ब्लड हर माह लगता है। कई बार तो अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए तो उस दिन 10 यूनिट की भी जरूरत पड़ जाती है जो कि अस्पताल में पर्याप्त रूप से उपलब्ध होता है। खासतौर पर गर्भवती महिलाएं जिनमें खून की कमी होती है उन्हें भी सेंटर से दिया जाता है ताकि समय पर उसका इलाज हो सके।
ब्लड सेंटर में नेगेटिव ग्रुप के लोगों की बना कर रखी गई है सूची
गौरतलब है कि एबी पॉजीटिव ब्लड मिलना बहुत आसान होता है अगर यू कहे कि पॉजिटिव ब्लड गु्रप सौ में से 80 से अधिक लोगों का होता है जबकि नेगेटिव गु्रप 10 से 20 प्रतिशत ही लोगों का होता है। जिसके चलते ब्लड सेंटर की ओर से ए नेगटिव, एबी नेगटिव, ओ नेगटिव, ब्लड गु्रप के लोगों की सेंटर के पास तकरीबन 50 लोगों की सूची बनाकर रखी गई है। ताकि कोई आपात स्थिति या फिर किसी मरीज को नेगटिव ब्लड की इमरजेंसी जरूरत पड़े तो सूची में लिखे उस व्यक्ति को काल कर बुलाकर उसका रक्त लिया जा सके। वैसे तो सेंटर में नेगटिव ब्लड को भी सेफ रखा गया है।
कोट
सेंटर में पर्याप्त मात्रा में ब्लड जमा है। जिसके चलते अस्पताल में इमरजेंसी में अगर किसी को रक्त की जरूरत पड़ती है तो सेंटर से उसी समय दे दिया जाता है। प्रति वर्ष 1300 यूनिट रक्त सेंटर में जमा होता है। जबकि निगेटिव ग्रुप के ब्लड को भी जमा रखा जाता है। ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मरीज को अगर नेगेटिव ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ती है तो उसे फौरन देकर उसकी जान बचाई जा सके।
डॉ. लुभना नसीर, अस्सिस्टेंट प्रोफेसर, इंचार्ज ब्लड सेंटर जीएमसी
फोटो सहित