{"_id":"62703d30c91da921173b482d","slug":"cultural-udhampur-news-jmu2590152194","type":"story","status":"publish","title_hn":"देविका तट पर कलश यात्रा के साथ आरंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देविका तट पर कलश यात्रा के साथ आरंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर। देविका घाट पर सोमवार को कथावाचक सुभाष शास्त्री की तरफ से 2 से 8 मई तक चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कथा से पहले शोभायात्रा व कलश यात्रा निकालकर कथावाचक सुभाष शास्त्री का स्वागत किया गया।
कथा के दौरान सुभाष शास्त्री ने कहा कि आज के युग में हर कोई दुखी ही नजर आता है। इसका कारण हमारे मन में उठते अशुभ विचार हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों से ईष्या करने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, सदा शक करने वाला और पराए आसरे (सहारे) जीने वाला मनुष्य सदा दुखी ही रहता है। इनसे बचने का उपाय है कि जब क्रोध आए तो मुस्कराने लगें, जब कोई चिंता सताए तो चिंतन करने लगें और जब कोई बुरा विचार आए तो प्रभु नाम का स्मरण करने लगें।
उन्होंने कहा कि यह प्रकृति का नियम है कि आप जितना बोते हैं, उससे कई गुणा अधिक आपको मिलता है। इसकी जीती-जागती मिसाल हैं हमारे किसान। वह यदि 50 किलो बीज खेतों में लगाते हैं, तो उसकी फसल (फल) कई गुना ज्यादा उन्हें मिल जाती है। उन्होंने समझाया कि यदि दु:खों से वास्तव में बचना चाहते हैं, तो मन को प्रकुपित न होने दें। वाणी पर संयम बरतें। मन में बुरे विचार न आने दें। सदा अच्छा आचरण ही करें। यही तो हर मनुष्य की इच्छा भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कथा के दौरान सुभाष शास्त्री ने कहा कि आज के युग में हर कोई दुखी ही नजर आता है। इसका कारण हमारे मन में उठते अशुभ विचार हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों से ईष्या करने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, सदा शक करने वाला और पराए आसरे (सहारे) जीने वाला मनुष्य सदा दुखी ही रहता है। इनसे बचने का उपाय है कि जब क्रोध आए तो मुस्कराने लगें, जब कोई चिंता सताए तो चिंतन करने लगें और जब कोई बुरा विचार आए तो प्रभु नाम का स्मरण करने लगें।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यह प्रकृति का नियम है कि आप जितना बोते हैं, उससे कई गुणा अधिक आपको मिलता है। इसकी जीती-जागती मिसाल हैं हमारे किसान। वह यदि 50 किलो बीज खेतों में लगाते हैं, तो उसकी फसल (फल) कई गुना ज्यादा उन्हें मिल जाती है। उन्होंने समझाया कि यदि दु:खों से वास्तव में बचना चाहते हैं, तो मन को प्रकुपित न होने दें। वाणी पर संयम बरतें। मन में बुरे विचार न आने दें। सदा अच्छा आचरण ही करें। यही तो हर मनुष्य की इच्छा भी है।
विज्ञापन