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Udhampur News: क्रोशे से बुन दिया आत्मनिर्भरता का संकल्प... नाजनीन बनीं महिला सशक्तीकरण की मिसाल
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उधमपुर। अगर इंसान हुनर पर भरोसा करे तो वह किसी भी परिस्थिति में अलग पहचान बना सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है कि नगरोटा की नाजनीन सालारिया ने, जो महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हैं। एमए और बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद निजी स्कूल में अध्यापन किया और बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाई लेकिन मन में हमेशा अलग करने की इच्छा थी।
बचपन में दादी से सीखी क्रोशे और हस्तशिल्प कला को उन्होंने आजीविका का माध्यम बनाने का निर्णय लिया। शुरुआत में छोटे स्तर पर काम शुरू किया और नाज क्राफ्ट्स हैंडमेड नाम से सोशल मीडिया पर पेज बनाया। इसके माध्यम से क्रोशे क्राफ्ट, हैंडबैग, यार्न आइटम, सजावटी सामान और कस्टमाइज्ड उत्पादों की बिक्री शुरू की। धीरे-धीरे लोगों को काम पसंद आने लगा और सोशल मीडिया के जरिये उन्हें पहचान मिलने लगी। इसके बाद उनके पास लगातार ऑर्डर आने शुरू हो गए।
34 साल की नाजनीन की मेहनत और लगन को देखते हुए हस्तशिल्प विभाग ने भी सहयोग प्रदान किया। इसके बाद उन्हें कई प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं में भाग लेने का अवसर मिला। उधमपुर, कटड़ा, कुल्लू-मनाली सहित कई राज्यों में उत्पाद प्रदर्शित किए जहां लोगों ने हस्तनिर्मित सामान की खूब सराहना की। एक प्रदर्शनी में उन्होंने लगभग 40 हजार रुपये तक की बिक्री की जबकि उनका सालाना टर्नओवर करीब एक लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
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दो महिलाओं को दिया रोजगार
नाजनीन ने सफलता को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। इसके अलावा महिलाओं और युवतियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि महिलाओं में आत्मविश्वास हो तो वे घर बैठे भी पहचान बना सकती हैं। शुरुआत में काम को शुरू करने में हिचक महसूस हुई लेकिन अब उन्हें समाज में सम्मान मिला है। उन्होंने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रतिभा को कम नहीं समझना चाहिए क्योंकि वही हुनर एक दिन सफलता का कारण बन सकता है।
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बचपन में दादी से सीखी क्रोशे और हस्तशिल्प कला को उन्होंने आजीविका का माध्यम बनाने का निर्णय लिया। शुरुआत में छोटे स्तर पर काम शुरू किया और नाज क्राफ्ट्स हैंडमेड नाम से सोशल मीडिया पर पेज बनाया। इसके माध्यम से क्रोशे क्राफ्ट, हैंडबैग, यार्न आइटम, सजावटी सामान और कस्टमाइज्ड उत्पादों की बिक्री शुरू की। धीरे-धीरे लोगों को काम पसंद आने लगा और सोशल मीडिया के जरिये उन्हें पहचान मिलने लगी। इसके बाद उनके पास लगातार ऑर्डर आने शुरू हो गए।
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34 साल की नाजनीन की मेहनत और लगन को देखते हुए हस्तशिल्प विभाग ने भी सहयोग प्रदान किया। इसके बाद उन्हें कई प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं में भाग लेने का अवसर मिला। उधमपुर, कटड़ा, कुल्लू-मनाली सहित कई राज्यों में उत्पाद प्रदर्शित किए जहां लोगों ने हस्तनिर्मित सामान की खूब सराहना की। एक प्रदर्शनी में उन्होंने लगभग 40 हजार रुपये तक की बिक्री की जबकि उनका सालाना टर्नओवर करीब एक लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
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दो महिलाओं को दिया रोजगार
नाजनीन ने सफलता को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। इसके अलावा महिलाओं और युवतियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि महिलाओं में आत्मविश्वास हो तो वे घर बैठे भी पहचान बना सकती हैं। शुरुआत में काम को शुरू करने में हिचक महसूस हुई लेकिन अब उन्हें समाज में सम्मान मिला है। उन्होंने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रतिभा को कम नहीं समझना चाहिए क्योंकि वही हुनर एक दिन सफलता का कारण बन सकता है।