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Udhampur News: नशे में उपद्रव करना पड़ा महंगा, अब अस्पताल में करना होगा झाड़ू पोछा
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- कारावास से नहीं अब सामुदायिक सेवा से सुधरने का मौका
- बीएनएस की धारा 355 के तहत जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट ने सुनाई सजा
सौरभ सागर
उधमपुर। नए आपराधिक कानून के तहत जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट (टी) रिशभ कौशल की अदालत ने मंगलवारक को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसमें बीएनएस की धारा 355 के तहत दो आरोपियों को जेल भेजने की बजाय अस्पताल में तीन दिन तक झाड़ू-पोछा करने की सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई गई।
जानकारी के अनुसार चार अप्रैल को दोपहर 12:40 बजे गश्त के दौरान पुलिस ने मंथल राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो लोगों को नशे की हालत में पकड़ा था। वह सार्वजनिक उपद्रव कर रहे हैं। यातायात के साथ-साथ आवागमन में भी बाधा उत्पन्न कर रहे थे। रेहंबल पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया। आरोपियों ने धारा 355 के तहत अपराध स्वीकार करने के लिए आवेदन दिया। आरोपियों ने कहा कि वो गरीब हैं और उन्हें अपना अपराध स्वीकार है। उनके खिलाफ नरम रुख अपनाया जाए। क्योंकि वे ड्राइवर के रूप में काम करते हैं और उनके पास जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं हैं। आरोपियों को अपराध के लिए दोषी ठहराया गया। वकील ने दलील दी कि आरोपी अपने तौर-तरीके सुधारने के लिए तैयार हैं और वचन देते हैं कि वे इस तरह के अपराध दोबारा नहीं करेंगे।
सामुदायिक सेवा का उद्देश्य अपराधी के पुनर्वास को बढ़ावा देना
बीएनएस की धारा 355 में कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति नशे की हालत में किसी सार्वजनिक पर या किसी ऐसे स्थान पर दिखाई देता है, जहां प्रवेश करना उसके लिए अतिचार माना जाता है और वहां ऐसा आचरण करता है, जिससे किसी व्यक्ति को परेशानी हो तो उसे चौबीस घंटे तक की साधारण कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों या सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा। सामुदायिक सेवा का उद्देश्य समुदाय के लाभ और बेहतरी के लिए है क्योंकि यह अपराधी के पुनर्वास को बढ़ावा देने और अपराधी को कुछ ऐसी गतिविधियों में शामिल करने के लिए सजा का एक पारंपरिक रूप है जो समग्र रूप से समुदाय और अपराधी के व्यक्तिगत विकास के लिए उपयोगी हैं। सामुदायिक सेवा की सजा अपराधी को समाज को बेहतर ढंग से समझने और जिम्मेदारी और सहानुभूति की भावना विकसित करने और नए कौशल और अनुभव प्राप्त करने में भी मदद कर सकती है।
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सेवा के दौरान करनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने दोषी को सामुदायिक सेवा के तहत 8 से 10 अप्रैल तक तीन दिन रोज एक घंटे की अवधि के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर की सफाई और पोछा करने को कहा है। दोषियों को इस संबंध में रेहंबल थाना प्रभारी द्वारा नियुक्त किए जाने वाले पुलिस अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा जो उनकी सामुदायिक सेवा की निगरानी करेगा।
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- बीएनएस की धारा 355 के तहत जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट ने सुनाई सजा
सौरभ सागर
उधमपुर। नए आपराधिक कानून के तहत जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट (टी) रिशभ कौशल की अदालत ने मंगलवारक को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसमें बीएनएस की धारा 355 के तहत दो आरोपियों को जेल भेजने की बजाय अस्पताल में तीन दिन तक झाड़ू-पोछा करने की सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई गई।
जानकारी के अनुसार चार अप्रैल को दोपहर 12:40 बजे गश्त के दौरान पुलिस ने मंथल राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो लोगों को नशे की हालत में पकड़ा था। वह सार्वजनिक उपद्रव कर रहे हैं। यातायात के साथ-साथ आवागमन में भी बाधा उत्पन्न कर रहे थे। रेहंबल पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया। आरोपियों ने धारा 355 के तहत अपराध स्वीकार करने के लिए आवेदन दिया। आरोपियों ने कहा कि वो गरीब हैं और उन्हें अपना अपराध स्वीकार है। उनके खिलाफ नरम रुख अपनाया जाए। क्योंकि वे ड्राइवर के रूप में काम करते हैं और उनके पास जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं हैं। आरोपियों को अपराध के लिए दोषी ठहराया गया। वकील ने दलील दी कि आरोपी अपने तौर-तरीके सुधारने के लिए तैयार हैं और वचन देते हैं कि वे इस तरह के अपराध दोबारा नहीं करेंगे।
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सामुदायिक सेवा का उद्देश्य अपराधी के पुनर्वास को बढ़ावा देना
बीएनएस की धारा 355 में कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति नशे की हालत में किसी सार्वजनिक पर या किसी ऐसे स्थान पर दिखाई देता है, जहां प्रवेश करना उसके लिए अतिचार माना जाता है और वहां ऐसा आचरण करता है, जिससे किसी व्यक्ति को परेशानी हो तो उसे चौबीस घंटे तक की साधारण कारावास या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों या सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा। सामुदायिक सेवा का उद्देश्य समुदाय के लाभ और बेहतरी के लिए है क्योंकि यह अपराधी के पुनर्वास को बढ़ावा देने और अपराधी को कुछ ऐसी गतिविधियों में शामिल करने के लिए सजा का एक पारंपरिक रूप है जो समग्र रूप से समुदाय और अपराधी के व्यक्तिगत विकास के लिए उपयोगी हैं। सामुदायिक सेवा की सजा अपराधी को समाज को बेहतर ढंग से समझने और जिम्मेदारी और सहानुभूति की भावना विकसित करने और नए कौशल और अनुभव प्राप्त करने में भी मदद कर सकती है।
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सेवा के दौरान करनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने दोषी को सामुदायिक सेवा के तहत 8 से 10 अप्रैल तक तीन दिन रोज एक घंटे की अवधि के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर की सफाई और पोछा करने को कहा है। दोषियों को इस संबंध में रेहंबल थाना प्रभारी द्वारा नियुक्त किए जाने वाले पुलिस अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा जो उनकी सामुदायिक सेवा की निगरानी करेगा।