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30 लाख खर्चने पर भी शुरू नहीं हुई आरटीपीसीआर प्रयोगशाला
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उधमपुर के जिला अस्पताल में चार महीने स्थापित की गई आरटीपीसीआर लैब व मौजूद मशीनरी
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। जिला अस्पताल में करीब चार महीने पहले कोरोना संक्रमण की जांच करने के लिए करीब 30 लाख रुपये में आरटीपीसीआर टेस्ट प्रयोगशाला स्थापित की गई थी। लेकिन, स्टाफ व फंड की कमी से आज तक यह प्रयोगशाला काम में नहीं लाई गई है।
उधमपुर में हर रोज सैकड़ों लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन, इनके सैंपल जम्मू या सेना के कमांड अस्पताल भेजे जा रहे हैं। कोरोना संकट से निपटने के लिए जिला अस्पताल को सरकार की हर मदद मिल रही है। अस्पताल में दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए जा चुके हैं। कोरोना संक्रमितों का पता लगाने के लिए उधमपुर में हर रोज सैकड़ों आरटीपीसीआर टेस्ट किए जाते हैं, और इनके सैंपल जम्मू या कमांड अस्पताल भेजे जाते हैं।
जम्मू भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को दो दिन बाद मिलती है। इससे कोरोना संक्रमित का पता लगाने में बहुत देरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने करीब 30 लाख रुपये की लागत से अगस्त 2021 में जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर प्रयोगशाला स्थापित की थी। इसको चलाने के लिए माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर सहित पांच से छह कर्मचारियों की जरूरत थी। लेकिन, आज तक इनकी व्यवस्था नहीं हो सकी। इसलिए, यह प्रयोगशाला आज तक काम में नहीं लाई गई है।
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जब प्रयोगशाला को स्थापित किया गया था तो साथ में ही कुछ कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी। लेकिन, आज तक ये कर्मचारी अपनी प्रयोगशाला में काम नहीं कर पाए हैं। अगर कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर आती है तो उधमपुर में जांच को लेकर हालात फिर से खराब होंगे और उधमपुर जम्मू और कमांड अस्पताल की प्रयोगशाला पर निर्भर रहेगा।
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प्रयोगशाला में एक दिन में एक हजार जांच की क्षमता
जिला अस्पताल में प्रयोगशाला को पांच कमरों में स्थापित किया गया है। इसमें आरएनए एक्सट्रेक्शन यूनिट, बाई सेफ्टी यूनिट, पीसीआर यूनिट, ऑटो क्लेव और -80 से -20 तापमान का रेफ्रिजरेटर लगाया गया है। इस लैब में एक दिन में एक हजार आरटीपीसीआर टेस्ट करने की क्षमता है।
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माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर व फंड की कमी के कारण ही प्रयोगशाला शुरू नहीं हो पा रही है। इसको चलाने के लिए हर महीने दस लाख रुपये फंड की जरूरत है। इस बारे में उपायुक्त और मुख्य सचिव सहित कई अधिकारियों को बताया गया है और फंड की मांग की है। अधिकारियों की तरफ से इसकी व्यवस्था करने के आश्वासन दिए गए हैं।
- डॉ. विजय रैना, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल उधमपुर
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उधमपुर में हर रोज सैकड़ों लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन, इनके सैंपल जम्मू या सेना के कमांड अस्पताल भेजे जा रहे हैं। कोरोना संकट से निपटने के लिए जिला अस्पताल को सरकार की हर मदद मिल रही है। अस्पताल में दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए जा चुके हैं। कोरोना संक्रमितों का पता लगाने के लिए उधमपुर में हर रोज सैकड़ों आरटीपीसीआर टेस्ट किए जाते हैं, और इनके सैंपल जम्मू या कमांड अस्पताल भेजे जाते हैं।
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जम्मू भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को दो दिन बाद मिलती है। इससे कोरोना संक्रमित का पता लगाने में बहुत देरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने करीब 30 लाख रुपये की लागत से अगस्त 2021 में जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर प्रयोगशाला स्थापित की थी। इसको चलाने के लिए माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर सहित पांच से छह कर्मचारियों की जरूरत थी। लेकिन, आज तक इनकी व्यवस्था नहीं हो सकी। इसलिए, यह प्रयोगशाला आज तक काम में नहीं लाई गई है।
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जब प्रयोगशाला को स्थापित किया गया था तो साथ में ही कुछ कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी। लेकिन, आज तक ये कर्मचारी अपनी प्रयोगशाला में काम नहीं कर पाए हैं। अगर कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर आती है तो उधमपुर में जांच को लेकर हालात फिर से खराब होंगे और उधमपुर जम्मू और कमांड अस्पताल की प्रयोगशाला पर निर्भर रहेगा।
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प्रयोगशाला में एक दिन में एक हजार जांच की क्षमता
जिला अस्पताल में प्रयोगशाला को पांच कमरों में स्थापित किया गया है। इसमें आरएनए एक्सट्रेक्शन यूनिट, बाई सेफ्टी यूनिट, पीसीआर यूनिट, ऑटो क्लेव और -80 से -20 तापमान का रेफ्रिजरेटर लगाया गया है। इस लैब में एक दिन में एक हजार आरटीपीसीआर टेस्ट करने की क्षमता है।
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माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर व फंड की कमी के कारण ही प्रयोगशाला शुरू नहीं हो पा रही है। इसको चलाने के लिए हर महीने दस लाख रुपये फंड की जरूरत है। इस बारे में उपायुक्त और मुख्य सचिव सहित कई अधिकारियों को बताया गया है और फंड की मांग की है। अधिकारियों की तरफ से इसकी व्यवस्था करने के आश्वासन दिए गए हैं।
- डॉ. विजय रैना, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल उधमपुर

उधमपुर के जिला अस्पताल में चार महीने स्थापित की गई आरटीपीसीआर लैब व मौजूद मशीनरी- फोटो : UDHAMPUR