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Udhampur News: मात्र 30 रुपये दिहाड़ी पर स्कूली बच्चों की भूख मिटा रहे रसोइए
Thu, 19 Jun 2025 01:40 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Thu, 19 Jun 2025 01:40 AM IST
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- वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर पंचैरी में हुआ प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। सरकारी स्कूलों में मात्र 30 रुपये प्रतिदिन वेतन पर बच्चों को खाना खिला रहे रसोइयों ने मांगों को लेकर पंचैरी में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी न होने तक स्कूलों में खाना न बनाने का एलान किया और सरकार से सभी को कम से कम न्यूनतम दिहाड़ी के आधार पर वेतनमान देने की मांग की।
प्रदर्शनकारी पुरषोत्तम शर्मा, शोभा देवी और रोमेश कुमार ने बताया कि पिछले लंबे समय से वह सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील के तहत खाना बनाने का काम कर रहे हैं। मगर मेहनताना के नाम पर 30 रुपये रोजाना के आधार पर वेतन देकर सरकार उनके साथ मजाक कर रही है। उनका कहना था कि रोजाना लगभग 50 से 200 बच्चों प्रत्येक स्कूल में खाना बनता है। मगर आज तक किसी भी कर्मी ने अपने काम को लेकर कोताही नहीं बरती। पंचायत चुलना के पूर्व सरपंच कुलदीप कुमार ने कहा कि महंगाई के इस दौर में मात्र 30 रुपये दिहाड़ी पर कोई व्यक्ति परिवार को तो दूर खुद का भी पेट नहीं भर सकता। ऐसे में सरकार को चाहिए कि कम से कम निर्धारित न्यूनतम दिहाड़ी के आधार पर या फिर महीने का कम से कम 10 हजार रुपये वेतन दिया जाए। अगर उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया तो काम छोड़ हड़ताल पर चले जाएंगे।
फोटो सहित
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। सरकारी स्कूलों में मात्र 30 रुपये प्रतिदिन वेतन पर बच्चों को खाना खिला रहे रसोइयों ने मांगों को लेकर पंचैरी में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी न होने तक स्कूलों में खाना न बनाने का एलान किया और सरकार से सभी को कम से कम न्यूनतम दिहाड़ी के आधार पर वेतनमान देने की मांग की।
प्रदर्शनकारी पुरषोत्तम शर्मा, शोभा देवी और रोमेश कुमार ने बताया कि पिछले लंबे समय से वह सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील के तहत खाना बनाने का काम कर रहे हैं। मगर मेहनताना के नाम पर 30 रुपये रोजाना के आधार पर वेतन देकर सरकार उनके साथ मजाक कर रही है। उनका कहना था कि रोजाना लगभग 50 से 200 बच्चों प्रत्येक स्कूल में खाना बनता है। मगर आज तक किसी भी कर्मी ने अपने काम को लेकर कोताही नहीं बरती। पंचायत चुलना के पूर्व सरपंच कुलदीप कुमार ने कहा कि महंगाई के इस दौर में मात्र 30 रुपये दिहाड़ी पर कोई व्यक्ति परिवार को तो दूर खुद का भी पेट नहीं भर सकता। ऐसे में सरकार को चाहिए कि कम से कम निर्धारित न्यूनतम दिहाड़ी के आधार पर या फिर महीने का कम से कम 10 हजार रुपये वेतन दिया जाए। अगर उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया तो काम छोड़ हड़ताल पर चले जाएंगे।
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