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Udhampur News: श्री राजामाता आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा जारी
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कथा के वाद अरती करते भक्त ंसवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भूमिका मंदिर के पास स्थित श्री राजमाता आश्रम शनि मंदिर में सोमवार को सद्गुरु राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने प्रवचन किए। उन्होंने ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण-कुंती प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि कुंती ने भगवान कृष्ण से वरदान में यह मांगा कि मुझे जीवन में दुख आएं। इसलिए नहीं कि दुख में भगवान याद आते हैं। बल्कि दुख मांगने के पीछे उद्देश्य यह था की दुख ही तो हमको आध्यात्मिक ज्ञान की ओर अग्रसर करते हैं। छैनी और हथौड़ी से पत्थर में से मूर्ति प्रकट हो जाती हैं तो दूसरी तरफ दुख से मनुष्य के जीवन में चमक तेजस्विता निखार आता है।
सुख साधनों से युक्त व्यक्ति के तो शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करते हैं लेकिन दुखी व्यक्ति का सब ऐसे साथ छोड़ जाते हैं। जैसे अंधेरे में परछाईं छोड़ जाती हैं। यानी दुख तो जीवन की सत्यता से परिचित कराता है। कथाव्यास आचार्य मनोज कृष्ण महाराज ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया।
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कटड़ा। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भूमिका मंदिर के पास स्थित श्री राजमाता आश्रम शनि मंदिर में सोमवार को सद्गुरु राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने प्रवचन किए। उन्होंने ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण-कुंती प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि कुंती ने भगवान कृष्ण से वरदान में यह मांगा कि मुझे जीवन में दुख आएं। इसलिए नहीं कि दुख में भगवान याद आते हैं। बल्कि दुख मांगने के पीछे उद्देश्य यह था की दुख ही तो हमको आध्यात्मिक ज्ञान की ओर अग्रसर करते हैं। छैनी और हथौड़ी से पत्थर में से मूर्ति प्रकट हो जाती हैं तो दूसरी तरफ दुख से मनुष्य के जीवन में चमक तेजस्विता निखार आता है।
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सुख साधनों से युक्त व्यक्ति के तो शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करते हैं लेकिन दुखी व्यक्ति का सब ऐसे साथ छोड़ जाते हैं। जैसे अंधेरे में परछाईं छोड़ जाती हैं। यानी दुख तो जीवन की सत्यता से परिचित कराता है। कथाव्यास आचार्य मनोज कृष्ण महाराज ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया।
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