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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Udhampur News ›   Ancient statue of Mahadeo was grabbed

एक किसान उठा लाया था महादेव की प्राचीन मूर्ति

Fri, 22 May 2015 01:26 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, चिनैनी
अमर उजाला/ब्यूरो, चिनैनी Updated Fri, 22 May 2015 01:26 AM IST
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Ancient statue of Mahadeo was grabbed

देश के कोने-कोने से हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों के लिए सुद्धमहादेव पहुंचते हैं और वहां ऐतिहासिक मंदिर में मौजूद भगवान शिव परिवार की प्राचीन मूर्ति के दर्शन करते हैं।

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इस बार भी एक जून से आरंभ हो रहा तीन दिवसीय सुद्धमहादेव मेले में श्रद्धालुओं की लाइनें भगवान शिव परिवार की मूर्ति के दर्शन को लगेगी। स्थानीय बुजुर्गों की मानें तो सुद्धमहादेव से करीब एक किलोमीटर दूर एक गांव में खेत जोतते समय ये मूर्तियां चमत्कारिक रूप से मिली थीं।
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किसान जब हल चला रहा था तो जमीन से खून निकलने लगा। किसान डर गया कि उसने कोई पाप तो नहीं कर दिया, लेकिन जब उसने जमीन खोद कर देखा तो जमीन में एक सुंदर मूर्ति भगवान शिव परिवार की थी।
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उसे उठाकर वह चिनैनी के राजा के पास लाने लगा। किसान जब सुद्धमहादेव पहुंचा तो उसने विश्राम करने के लिए जब मूर्ति को जमीन पर रखा और बाद में उठाने लगा तो मूर्ति नहीं उठाई गई।

इसके बारे में उसने चिनैनी के राजा को बताया और राजा भी अपने सिपाहियों के साथ सुद्धमहादेव पहुंचे और उन्होंने भी मूर्ति उठाने का प्रयास किया। जब मूर्ति किसी हालत में नहीं उठाई गई तो वहां पर ही मंदिर का निर्माण कर दिया गया। आज भी इस मंदिर में जो कामना की जाए वह पूरी हो जाती है।

शिव के वरदान के बाद सुद्धांत राक्षस के नाम पर है सुद्धमहादेव
सुद्धमहादेव मंदिर में भगवान शिव का वह त्रिशूल है, जिससे उन्होंने एक राक्षस का अंत किया था। जो अब भी तीन टुकड़ों में वहां पर पड़ा हुआ है। बताते हैं कि राक्षस भी भगवान शिव का भक्त था।

मानतलाई से माता पार्वती गौरीकुंड में स्नान के लिए जाती थी और सुद्धमहादेव में भगवान शिव की पूजा करती थी। एक दिन राक्षस ने जब देखा कि भगवान शिव की पूजा कौन कर रहा है और वह पहले कुछ मांग लेगा तो राक्षस ने अपनी डरावनी आवाज से माता पार्वती को डराया।

माता पार्वती ने भगवान शिव को पुकारा तभी भगवान शिव ने कैलाश पर्वत से अपना त्रिशूल फेंका जो राक्षस को लगा। वहीं राक्षस भी ओम नम: शिवाय का जाप करने लगा यह सुन कर भगवान शिव ने राक्षस को दर्शन दिए और कोई वर मांगने को कहा तो राक्षस ने कहा कि इस जगह का नाम उसके और भगवान शिव के नाम से चलता रहे।


उस राक्षस का नाम सुद्धांत था। इसलिए यहां का नाम सुद्धमहादेव पड़ा। मंदिर में तीन टुकड़ों में पड़ा त्रिशूल भगवान शिव का है। जिसके दर्शनों के लिए तांता लगता है।

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