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लापरवाही अफसरों की, दांव पर बच्चों का भविष्य
Udhampur
Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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कटड़ा। वन विभाग द्वारा अवैध निर्माण पर की गई कार्रवाई विवादों के घेरे में फंसती जा रही है। शिक्षा अधिकारी और पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि इस कार्रवाई के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। जबकि वन विभाग के अफसर कहना है कि कि जेडईओ को कार्रवाई के संबंध में पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। बहरहाल, अफसरों की लापरवाही के कारण मूरी पंचायत के मिडिल स्कूल के बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। इससे अभिभावकों में रोष बढ़ रहा है। दूसरी तरफ चैक पोस्ट पर तालाबंदी से सुरक्षा व्यवस्था बाधित हो सकती है।
स्थानीय सरपंच रमेश चंद्र ने वन विभाग पर रोष जताते हुए कहा कि स्कूल का निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था। तब यह प्राइमरी स्कूल था। 1990 में इसे अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बनाया गया। अब यदि वन विभाग को इतने दिनों बाद अवैध निर्माण की याद आई तो कार्रवाई से पूर्व कम से कम बच्चों के भविष्य को देखते हुए कुछ समय दिया जाना चाहिए था ताकि शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई का वैकल्पिक व्यवस्था कर लिया होता। इस सवाल के जवाब में डीएफओ डा. शैयद नदीम शाह ने बताया कि जोनल एजूकेशनल आफिसर को वन विभाग द्वारा पहले से नोटिस जारी किया जा चुका था। उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को बताया कि नहीं, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
पुलिस को भी सूचना नहीं
स्कूल भवन को सील करने के बाद डीएफओ ने सोमवार को कहा कि जल्द ही चैक पोस्ट को भी सील किया जाएगा। लेकिन सोमवार की देर शाम तक इस संबंध में पुलिस विभाग को भी कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि एसपी कुलवीर सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग की ओर से कोई स्थायी तौर पर अवैध निर्माण किया ही नहीं गया है। अलबत्ता अगर कोई कार्रवाई होती है तो विभाग उसका समाधान तुरंत ढूंढेगा। यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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स्कूल पर कार्रवाई के संबंध में हमें वन विभाग की ओर से कोई नोटिस या सूचना नहीं मिली थी। बिना बताए अचानक कार्रवाई की गई है।
बोधराज, जेडईओ
मुझे पहले से कोई जानकारी नहीं थी। कार्रवाई के समय स्कूल से पता चला कि इमारत को सील किया जा रहा है। इस संबंध में डीसी डॉ. शाहीद इकबाल चौधरी से बात हुई है। उनसे आग्रह किया गया है कि स्कूल परिसर में ही कुछ दिनों के लिए एक कमरा तत्काल उपलब्ध करवाया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। बहुल जल्द स्कूल भवन की व्यवस्था की जाएगी।
अशोक कुमार, सीईओ
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स्थानीय सरपंच रमेश चंद्र ने वन विभाग पर रोष जताते हुए कहा कि स्कूल का निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था। तब यह प्राइमरी स्कूल था। 1990 में इसे अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बनाया गया। अब यदि वन विभाग को इतने दिनों बाद अवैध निर्माण की याद आई तो कार्रवाई से पूर्व कम से कम बच्चों के भविष्य को देखते हुए कुछ समय दिया जाना चाहिए था ताकि शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई का वैकल्पिक व्यवस्था कर लिया होता। इस सवाल के जवाब में डीएफओ डा. शैयद नदीम शाह ने बताया कि जोनल एजूकेशनल आफिसर को वन विभाग द्वारा पहले से नोटिस जारी किया जा चुका था। उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को बताया कि नहीं, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
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पुलिस को भी सूचना नहीं
स्कूल भवन को सील करने के बाद डीएफओ ने सोमवार को कहा कि जल्द ही चैक पोस्ट को भी सील किया जाएगा। लेकिन सोमवार की देर शाम तक इस संबंध में पुलिस विभाग को भी कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि एसपी कुलवीर सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग की ओर से कोई स्थायी तौर पर अवैध निर्माण किया ही नहीं गया है। अलबत्ता अगर कोई कार्रवाई होती है तो विभाग उसका समाधान तुरंत ढूंढेगा। यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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स्कूल पर कार्रवाई के संबंध में हमें वन विभाग की ओर से कोई नोटिस या सूचना नहीं मिली थी। बिना बताए अचानक कार्रवाई की गई है।
बोधराज, जेडईओ
मुझे पहले से कोई जानकारी नहीं थी। कार्रवाई के समय स्कूल से पता चला कि इमारत को सील किया जा रहा है। इस संबंध में डीसी डॉ. शाहीद इकबाल चौधरी से बात हुई है। उनसे आग्रह किया गया है कि स्कूल परिसर में ही कुछ दिनों के लिए एक कमरा तत्काल उपलब्ध करवाया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। बहुल जल्द स्कूल भवन की व्यवस्था की जाएगी।
अशोक कुमार, सीईओ