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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   udhampur district hospital every year throws 48 blood bottles

J&K: जरूरतमंद तड़पते हैं और खून फेंक दिया जाता है

Wed, 11 May 2016 03:55 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 11 May 2016 03:55 PM IST
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udhampur district hospital every year throws 48 blood bottles
- फोटो : BBC

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से हर साल औषतन 48 बोतल खून को यूं ही फेंक दिया जाता है। वह या तो एक्सपायर हो चुका होता है या फिर हिमोलाइज्ड होता है। बर्बाद होने वाले खून में पाजिटिव ग्रुप के भी शामिल होते हैं। इससे साफ होता है कि खून लेने वालों की सही तरीके से पहले जांच नहीं की जाती है।

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दरअसल, सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट संजीत कुमार बवोरिया ने एडीसी से जानकारी मांगी थी कि 01 जनवरी 1997 से 31 मार्च 2016 तक जिला अस्पताल में कितने बोलत नेगेटिव ग्रुप या एक्सपायरी खून को नष्ट किया गया है।
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इस पर प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि 4 अप्रैल 2001 से लेकर 31 मार्च 2016 तक जिला अस्पताल में कुुल 22781 बोतल खून प्राप्त हुआ। इसमें से 721 बोतल खून को नष्ट किया गया।

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खून दान देने वालों के साथ भी धोखा किया जाता है

udhampur district hospital every year throws 48 blood bottles
रक्‍तदान

इनमें पाजिटिव ग्रुप के 92 बोतल, एक्सपायरी डेट की 302 और हिमोलाइज्ड 210 बोतल खून के अलावा नेगेटिव ग्रुप के 117 बोतल खून शामिल थे। इन आंकड़ों पर बवोरिया ने जिला अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाया और कहा कि जिला अस्पताल में मरीज खून लेने के लिए तड़पते रहते हैं, लेकिन दूसरी तरफ खून को पानी की तरह बहाया जा रहा है।

इससे साफ जाहिर हो रहा कि जिला अस्पताल न केवल उन लोगों के साथ धोखा करता है जो खून के लिए तड़पते रहते हैं, बल्कि खून दान देने वालों के साथ भी धोखा किया जाता है। यह भी सवाल उठाया कि बिना जांच किए ऐसा खून क्यों लिया जाता है जो किसी के काम नहीं आ सकता है। खून लेने से पहले उसकी सही तरीके से जांच करनी चाहिए।

किसी से भी लिया गया खून कभी खराब नहीं होता, लेकिन कई बार नेगेटिव खून और एचआईवी संक्रमित खून मिल जाने का कारण उसे नष्ट करना पड़ता है। खून एक्सपायर होने से पहले ही जरूरतमंद लोगों को दे दिया जाता है। जिला अस्पताल प्रशासन कोशिश कर रहा है कि खून को नाड़ियों में बहाया जाए न कि नालियों में।- नरेंद्र सिंह भत्याल, सुपरिंटेंडेंट, जिला अस्पताल

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