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जोजिला दर्रा हुआ बहाल: श्रीनगर से लद्दाख पहुंचना होगा आसान, ट्रायल के तौर पर आवाजाही शुरू
Sat, 19 Mar 2022 04:26 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sat, 19 Mar 2022 04:26 PM IST
सार
जोजिला दर्रा आज ट्रायल के तौर पर यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। बर्फबारी के चलते छह जनवरी से इसे आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था। मौसम साफ होने पर तीन फरवरी से यहां बर्फ हटाने का काम जारी था, जो अब पूरा हो गया है।
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जोजिला दर्रा यातायात के लिए बहाल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने कश्मीर को लद्दाख के साथ जोड़ने वाले जोजिला दर्रा को आज बहाल कर दिया है। आज ट्रायल के तौर पर इस मार्ग को शुरू कर दिया गया है। सब कुछ ठीक रहने पर इसे पूरी तरह से आवाजाही के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इससे श्रीनगर से लद्दाख जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी। आर्गेनाइजेशन ने इस साल 73 दिनों के रिकॉर्ड समय के बीच इसे खोल दिया है। 11,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित जोजिला दर्रा श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण दर्रा है और लद्दाख संभाग में तैनात भारतीय सेना और अन्य सुरक्षाबलों के ऑपरेशनल तैयारियों के लिए लाइफ लाइन माना जाता है।
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सर्दियों की शुरुआत में बर्फबारी के बाद अक्सर यह दर्रा नवंबर के आखिरी दिनों में बंद हो जाता है और अप्रैल के दूसरे सप्ताह के करीब खोला जाता है। पहले करीब 135 दिनों तक जोजिला पास बंद रहता था, जिसे बीआरओ ने अब घटा दिया है। बीआरओ के प्रोजेक्ट बीकन के एक अधिकारी ने बताया कि जोजिला दर्रा, सोनमर्ग, गांदरबल से श्रीनगर की ओर 108 किलोमीटर की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट बीकन के पास है, जबकि जोजिला के उस पार गुमरि से आगे लेह की ओर बीआरओ का प्रोजेक्ट विजयक सभी जिम्मेदारियां निभाता है।
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डीजीबीआर, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए प्रोजेक्ट बीकन और विजयक के अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे लद्दाख के लोगों तक आवश्यक सामान की आपूर्ति करने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सेना के काफिले की आवाजाही के लिए भी यह पास महत्वपूर्ण है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में सबसे आगे रहने और चरम सीमाओं में बढ़िया मार्ग बनाने के लिए बीआरओ की प्रतिबद्धता को दोहराया। लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा कि आज ट्रायल मूवमेंट का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया और नागरिक यातायात के लिए सड़क खोलने का निर्णय नागरिक प्रशासन द्वारा संयुक्त निरीक्षण के बाद लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीआरओ अपने लोकाचार 'हम रास्ता खोज निकालेंगे या फिर उसका निर्माण करेंगे' पर कायम है।
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