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Srinagar News: तीन भाइयों के घरों के बुझे चिराग, एक साथ किया सुपुर्द-ए-खाक
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बांदीपोरा के हाजिन में हादसे के बाद बचाव कार्य के लिए जुटे युवा और मौके पर मौजूद लोग। संवाद
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- हादसे ने लोगों को झकझोरा, पूरे चंदरगीर गांव में मातम
अजीम यूसुफ/भट शहजाद
श्रीनगर/बांदीपोरा। हाजिन में शुक्रवार को एक ऐसा अकल्पनीय हादसा हुआ जिसने तीन भाइयों के घरों के चिराग बुझा दिए। पूरा चंदरगीर गांव सदमे में है। शुक्रवार शाम को घरों के चूल्हे तक नहीं जले। साथ रहने, साथ खाने और साथ ही जिंदगी को अलविदा कह जाने वाले तीनों चचेरे भाइयों को सुपुर्द-ए-खाक भी शुक्रवार देर शाम एक साथ किया गया।
परिजन के अनुसार हाजिन के चंदरगीर गांव के रहने वाले गुलाम नबी डार, बशीर अहमद डार और मोहम्मद जमाल डार आपस में भाई हैं। इनका वैवाहिक और सामाजिक कार्यक्रमों में टेंट लगाने का पारिवारिक कारोबार है। उनके इसी काम में तीनों के बड़े बेटे सोहेल, आदिल और समीर भी हाथ बटाते थे।
शुक्रवार को तीनों जुमे की नमाज के बाद टेंट का सामान धोनी हाजिन में झेलम नदी के किनारे पहुंचे। एक सामान्य दिन की तरह उन्होंने अपना नियमित कार्य शुरू किया लेकिन उन्हें क्या पता था कि नियति को आज कुछ और ही मंजूर है। तीनों भाई हंसते-खिलखिलाते अपने काम में जुटे थे और कालीन धोते समय यह दर्दनाक हादसा हो गया।
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डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद जब पुलिस, एसडीआरएफ और बचाव कार्य में लगे युवाओं ने तीनों के शव निकाले तो नदी किनारे जमा परिजन और गांव के लोगों में कोहराम मच गया। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जब देर शाम शव चंदरगीर पहुंचे, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। संकरी गलियों में मातम की चीखें गूंज उठीं, और रिश्तेदार अविश्वास में एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे।
रोती रही महिलाएं, होती रहीं सलामती की दुआएं
जैसे ही परिजन और लोगों को तीनों भाइयों के झेलम में गिरने की खबर मिली तो वह नदी की ओर दौड़े। युवकों ने बिना किसी हिचकिचाहट के पानी में छलांग लगा दी, जबकि अन्य लोगों ने रस्सियां जुटाईं और लड़कों को बचाने की बेताब कोशिश में नदी के किनारों पर खोजबीन की। इस दौरान गांव की महिलाएं रोती ओर युवकों की सलामती की दुआ करती रहीं। स्थानीय लोगों, स्वयंसेवकों, पुलिस कर्मियों और बचाव दलों द्वारा घंटों तक चलाए गए बचाव प्रयासों के बावजूद इन चचेरे भाइयों को बचाया नहीं जा सका। बाद में उनके शव एक-एक करके नदी से निकाले गए। जैसे ही गांव में यह खबर फैली, महिलाएं फूट-फूटकर रो पड़ीं। बुजुर्ग पुरुष नदी के किनारे अवाक खड़े रहे जबकि सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए।
सरल स्वभाव के और मेहनती थे तीनों भाई
स्थानीय निवासियों ने अमर उजाला को बताया कि तीनों चचेरे भाई अपनी सादगी और मेहनती स्वभाव के लिए जाने जाते थे। तीनों काफी सरल स्वभाव के थे और लोगों की मदद करने में कभी पीछे नहीं रहते थे। वह साथ रहते, साथ खाते और साथ ही काम करते थे। इस हादसे ने लोगों को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों ने नदी के पास बचाव सुविधाओं की कमी को लेकर अपना गुस्सा भी जाहिर किया। उन्होंने दावा किया कि हर कुछ साल में इस इलाके का कोई न कोई व्यक्ति झेलम नदी में जान गवां देता है। इस बार भी शुरुआती बचाव अभियान स्थानीय युवकों ने ही अपने दम पर चलाया था। बाद में पुलिस और एसडीआरएफ ने बचाव अभियान शुरू किया लेकिन तीनों को बचाया नहीं जा सका।
जुटी रही सेना, एसडीआरएफ और पुलिस
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, सेना की 13 आरआर, एसडीआरएफ और सीडीआरएफ की टीमों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से एक विशाल बचाव अभियान शुरू किया गया। एसएसपी बांदीपोरा और सेना के अधिकारी भी बचाव अभियान की निगरानी के लिए मौके पर पहुंचे। वहीं हाजिन के एसएचओ मीर सलीम पूरे अभियान के दौरान सक्रिय रहे और यह सुनिश्चित किया कि घटनास्थल पर कानून-व्यवस्था बनी रहे। नदी के किनारे मौजूद शोक संतप्त लोगों और तमाशबीनों को शांत रखा जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और बचाव दल बिना किसी बाधा के अपना अभियान जारी रख सके।
बांदीपोरा और सोनवारी के विधायकों ने जताया शोक
बांदीपोरा के विधायक निजामुद्दीन भट ने सोहेल, आदिल और समीर के शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताया। दिवंगत आत्माओं की चिर शांति तथा परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की। उन्होंने दुख की इस घड़ी में हाजिन के लोगों के साथ एकजुटता भी व्यक्त की। वहीं सोनवारी के विधायक ने अपने शोक संदेश में विधायक ने इस घटना को अत्यंत हृदयविदारक बताया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की चिर शांति और परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की।
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अजीम यूसुफ/भट शहजाद
श्रीनगर/बांदीपोरा। हाजिन में शुक्रवार को एक ऐसा अकल्पनीय हादसा हुआ जिसने तीन भाइयों के घरों के चिराग बुझा दिए। पूरा चंदरगीर गांव सदमे में है। शुक्रवार शाम को घरों के चूल्हे तक नहीं जले। साथ रहने, साथ खाने और साथ ही जिंदगी को अलविदा कह जाने वाले तीनों चचेरे भाइयों को सुपुर्द-ए-खाक भी शुक्रवार देर शाम एक साथ किया गया।
परिजन के अनुसार हाजिन के चंदरगीर गांव के रहने वाले गुलाम नबी डार, बशीर अहमद डार और मोहम्मद जमाल डार आपस में भाई हैं। इनका वैवाहिक और सामाजिक कार्यक्रमों में टेंट लगाने का पारिवारिक कारोबार है। उनके इसी काम में तीनों के बड़े बेटे सोहेल, आदिल और समीर भी हाथ बटाते थे।
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शुक्रवार को तीनों जुमे की नमाज के बाद टेंट का सामान धोनी हाजिन में झेलम नदी के किनारे पहुंचे। एक सामान्य दिन की तरह उन्होंने अपना नियमित कार्य शुरू किया लेकिन उन्हें क्या पता था कि नियति को आज कुछ और ही मंजूर है। तीनों भाई हंसते-खिलखिलाते अपने काम में जुटे थे और कालीन धोते समय यह दर्दनाक हादसा हो गया।
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डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद जब पुलिस, एसडीआरएफ और बचाव कार्य में लगे युवाओं ने तीनों के शव निकाले तो नदी किनारे जमा परिजन और गांव के लोगों में कोहराम मच गया। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जब देर शाम शव चंदरगीर पहुंचे, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। संकरी गलियों में मातम की चीखें गूंज उठीं, और रिश्तेदार अविश्वास में एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे।
रोती रही महिलाएं, होती रहीं सलामती की दुआएं
जैसे ही परिजन और लोगों को तीनों भाइयों के झेलम में गिरने की खबर मिली तो वह नदी की ओर दौड़े। युवकों ने बिना किसी हिचकिचाहट के पानी में छलांग लगा दी, जबकि अन्य लोगों ने रस्सियां जुटाईं और लड़कों को बचाने की बेताब कोशिश में नदी के किनारों पर खोजबीन की। इस दौरान गांव की महिलाएं रोती ओर युवकों की सलामती की दुआ करती रहीं। स्थानीय लोगों, स्वयंसेवकों, पुलिस कर्मियों और बचाव दलों द्वारा घंटों तक चलाए गए बचाव प्रयासों के बावजूद इन चचेरे भाइयों को बचाया नहीं जा सका। बाद में उनके शव एक-एक करके नदी से निकाले गए। जैसे ही गांव में यह खबर फैली, महिलाएं फूट-फूटकर रो पड़ीं। बुजुर्ग पुरुष नदी के किनारे अवाक खड़े रहे जबकि सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए।
सरल स्वभाव के और मेहनती थे तीनों भाई
स्थानीय निवासियों ने अमर उजाला को बताया कि तीनों चचेरे भाई अपनी सादगी और मेहनती स्वभाव के लिए जाने जाते थे। तीनों काफी सरल स्वभाव के थे और लोगों की मदद करने में कभी पीछे नहीं रहते थे। वह साथ रहते, साथ खाते और साथ ही काम करते थे। इस हादसे ने लोगों को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों ने नदी के पास बचाव सुविधाओं की कमी को लेकर अपना गुस्सा भी जाहिर किया। उन्होंने दावा किया कि हर कुछ साल में इस इलाके का कोई न कोई व्यक्ति झेलम नदी में जान गवां देता है। इस बार भी शुरुआती बचाव अभियान स्थानीय युवकों ने ही अपने दम पर चलाया था। बाद में पुलिस और एसडीआरएफ ने बचाव अभियान शुरू किया लेकिन तीनों को बचाया नहीं जा सका।
जुटी रही सेना, एसडीआरएफ और पुलिस
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, सेना की 13 आरआर, एसडीआरएफ और सीडीआरएफ की टीमों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से एक विशाल बचाव अभियान शुरू किया गया। एसएसपी बांदीपोरा और सेना के अधिकारी भी बचाव अभियान की निगरानी के लिए मौके पर पहुंचे। वहीं हाजिन के एसएचओ मीर सलीम पूरे अभियान के दौरान सक्रिय रहे और यह सुनिश्चित किया कि घटनास्थल पर कानून-व्यवस्था बनी रहे। नदी के किनारे मौजूद शोक संतप्त लोगों और तमाशबीनों को शांत रखा जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और बचाव दल बिना किसी बाधा के अपना अभियान जारी रख सके।
बांदीपोरा और सोनवारी के विधायकों ने जताया शोक
बांदीपोरा के विधायक निजामुद्दीन भट ने सोहेल, आदिल और समीर के शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताया। दिवंगत आत्माओं की चिर शांति तथा परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की। उन्होंने दुख की इस घड़ी में हाजिन के लोगों के साथ एकजुटता भी व्यक्त की। वहीं सोनवारी के विधायक ने अपने शोक संदेश में विधायक ने इस घटना को अत्यंत हृदयविदारक बताया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की चिर शांति और परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की।