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Srinagar News: वाइल्डलाइफ एसओएस ने एक सप्ताह में कई सांपों को बचाया

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Srinagar, Wildlife, SOS, One Week, Save Snakes
सांप पकड़ते वाइल्ड लाइफ एसओएस के कर्मी। स्रोत एसओएस - फोटो : Administration
- कश्मीर में निजी किचन गार्डन और सरकारी परिसरों से बचाव अभियान चलाए गए
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। वाइल्डलाइफ एसओएस ने जम्मू-कश्मीर के अवंतिपोरा और वथोरा इलाकों से सांपों के प्रजनन के मौजूदा मौसम के चलते, सांपों के दो जोड़े, एक जोड़ा इंडियन रैट स्नेक और एक जोड़ा लेवेंटाइन वाइपर को सफलतापूर्वक बचाया।
अधिकारियों के अनुसार इन रेंगने वाले जीवों को वहां के निवासियों ने अपने किचन गार्डन में देखा था जो धान के खेतों और जल एवं सिंचाई विभाग के परिसर के पास स्थित थेश्र इसके बाद वाइल्डलाइफ एसओएस की बचाव टीम को सूचना दी गई। बचाव टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सांपों के दोनों जोड़ों को सुरक्षित रूप से पकड़ा और दूसरी जगह पहुंचाया। लेवेंटाइन वाइपर को बचाते समय खास सावधानियां बरती गईं क्योंकि यह कश्मीर घाटी में पाए जाने वाले कुछ जहरीले सांपों में से एक है।
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ये वाइपर सूखे, पथरीले और पहाड़ी इलाकों में पाए जाते हैं लेकिन इनके रहने की जगहों के बंट जाने और इंसानी बस्तियों से मेल-जोल बढ़ने की वजह से, अब ये शहरी और रिहायशी इलाकों में भी ज्यादा दिखने लगे हैं। सावधानी से पकड़ने और जांच-परख करने के बाद चारों सांपों को इंसानी बस्तियों से दूर जंगल में उनके लिए सही जगहों पर सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया ताकि सांपों और वहाँ के निवासियों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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अप्रैल और मई के महीनों में सांपों के दिखने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। यह समय घाटी में सांपों की कई प्रजातियों के प्रजनन का मुख्य मौसम होता है। सांप अक्सर रहने की जगह और अंडे देने के लिए सुरक्षित जगहों की तलाश में, इंसानी बस्तियों के करीब शांत और एकांत जगहों पर चले आते हैं। मादा सांप बाद में अंडे देने की तैयारी करती हैं और आमतौर पर अगस्त में, मॉनसून के मौसम के दौरान अंडों से बच्चे बाहर निकलते हैं।

वाइल्डलाइफ एसओएस की जम्मू-कश्मीर प्रोग्राम हेड, आलिया मीर ने कहा, प्रजनन के मौसम में सुरक्षित जगहों की तलाश करते हुए सांपों का इंसानी बस्तियों के करीब आ जाना एक आम बात है। हम निवासियों से अपील करते हैं कि वे घबराएं नहीं और न ही खुद से सांपों को पकड़ने की कोशिश करें।


वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, प्रजनन के मौसम के दौरान सांपों को बचाते समय अतिरिक्त सावधानी और संवेदनशीलता बरतने की जरूरत होती है। खासकर जब जहरीले सांपों से निपटना हो। समय पर हस्तक्षेप करने से निवासियों के बीच घबराहट फैलने से रोकने में मदद मिलती है। साथ ही यह भी सुनिश्चित होता है कि पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी इन सांपों को सुरक्षित रूप से वापस जंगल में पहुंचा दिया जाए।
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