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Srinagar News: प्रिंसिपल को रिटायरमेंट के फायदे जारी करने का निर्देश
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- सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल के मामले में दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल श्रीनगर बेंच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को एक रिटायर्ड प्रिंसिपल की पूरी पेंशन और रिटायरमेंट के सभी फायदे जारी करने का निर्देश दिया है।
सदस्य (ज्यूडिशियल) एमएस लतीफ और सदस्य (एडमिनिस्ट्रेटिव) प्रशांत कुमार की बेंच ने यह आदेश फिरदौस अहमद इत्तू की ओर से दायर एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। इत्तू 30 अप्रैल 2024 को गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज पुलवामा से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुए थे।
बेंच ने कहा, हमें यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी गलती के उसकी पेंशन और उससे जुड़े फायदों से वंचित किया गया है। वह भी तब जब वह अपनी सक्रिय सेवा से पूरी तरह रिटायर हो चुके थे और उनके खिलाफ कोई जांच लंबित नहीं थी। न ही कोई जांच शुरू की गई थी और न ही उसके नौकरी के दौरान उसके खिलाफ कोई एफआईआर लंबित थी।
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इत्तू ने 4 सितंबर 2024 के एक सरकारी आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत उसे केवल अंतरिम पेंशन दी गई थी जबकि ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट के अन्य फायदे एक लंबित एफआईआर के कथित आधार पर रोक दिए गए थे।
ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस साल 30 मार्च को पारित आदेश की तामील की तारीख से छह हफ्तों के भीतर पेंशन और उससे जुड़े सभी फायदों को प्रोसेस करके जारी करें। ट्रिब्यूनल ने आगे आदेश में कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो अधिकारियों को 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल श्रीनगर बेंच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को एक रिटायर्ड प्रिंसिपल की पूरी पेंशन और रिटायरमेंट के सभी फायदे जारी करने का निर्देश दिया है।
सदस्य (ज्यूडिशियल) एमएस लतीफ और सदस्य (एडमिनिस्ट्रेटिव) प्रशांत कुमार की बेंच ने यह आदेश फिरदौस अहमद इत्तू की ओर से दायर एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। इत्तू 30 अप्रैल 2024 को गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज पुलवामा से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुए थे।
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बेंच ने कहा, हमें यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी गलती के उसकी पेंशन और उससे जुड़े फायदों से वंचित किया गया है। वह भी तब जब वह अपनी सक्रिय सेवा से पूरी तरह रिटायर हो चुके थे और उनके खिलाफ कोई जांच लंबित नहीं थी। न ही कोई जांच शुरू की गई थी और न ही उसके नौकरी के दौरान उसके खिलाफ कोई एफआईआर लंबित थी।
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इत्तू ने 4 सितंबर 2024 के एक सरकारी आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत उसे केवल अंतरिम पेंशन दी गई थी जबकि ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट के अन्य फायदे एक लंबित एफआईआर के कथित आधार पर रोक दिए गए थे।
ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस साल 30 मार्च को पारित आदेश की तामील की तारीख से छह हफ्तों के भीतर पेंशन और उससे जुड़े सभी फायदों को प्रोसेस करके जारी करें। ट्रिब्यूनल ने आगे आदेश में कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो अधिकारियों को 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।