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Srinagar News: कश्मीर स्वर्ग है और यहां किसी तरह का खतरा नहीं
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डल किनारे बंगलुरू के पर्यटक यश । संवाद
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- पहलगाम हमले की बरसी से पहले डल पहुंचे पर्यटक बोले-पूरी तरह सुरक्षित है घाटी, लोग बेहद मददगार
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। पहलगाम की बायसरन घाटी में आतंकी हमले की पहली बरसी 22 अप्रैल से पहले कश्मीर का माहौल सामान्य नजर आ रहा है। पर्यटक घाटी में खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं। उनका कहना है कि कश्मीर स्वर्ग है और यहां किसी तरह का खतरा नहीं है।
बता दें कि बायसरन में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। हालांकि अब हालात पूरी तरह से सामान्य होते दिख रहे हैं। डल झील के किनारे बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के पुणे से आए विनोद कुटे ने बताया कि वह पहली बार कश्मीर आए हैं। उन्होंने कहा, कश्मीर सच में जन्नत है। गुलमर्ग, सोनमर्ग और डल लेक देखकर दिल को सुकून मिला। यहां किसी भी तरह का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा। जो डर हमने खबरों में सुना था वैसा कुछ भी यहां नहीं दिख रहा। लोग बहुत मददगार हैं और माहौल पूरा शांत है। एक घटना के आधार पर पूरे कश्मीर को नहीं देखा जा सकता।
बंगलूरू से आए पर्यटक यश ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कश्मीर आकर उन्हें बेहद खुशी हुई। पहलगाम भी गए और वहां बहुत अच्छा लगा। यहां हम पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लोग ईमानदारी से व्यवहार करते हैं और डर जैसी कोई चीज नजर नहीं आती। सभी देशवासियों को यहां जरूर आना चाहिए।
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वहीं दिल्ली से आए एपी शर्मा ने कहा कि वह पिछले तीन दिनों से कश्मीर में हैं और यहां का अनुभव बेहद सुखद रहा। कश्मीर को यूं ही जन्नत नहीं कहा जाता। पहलगाम घटना से पूरा देश दुखी था लेकिन अब यहां माहौल पूरी तरह ठीक है। यहां की वादियों से ज्यादा खूबसूरत यहां के लोग हैं। हवा में मिठास है और मौसम में मासूमियत। हमने शंकराचार्य मंदिर में दर्शन भी किए। हर चीज सामान्य है और कोई खतरा नहीं लग रहा।
इस बीच एक शिकारा चालक गुलाम कादिर ने बात करते हुए कहा कि वह बचपन से ही यह काम कर रहे हैं, लेकिन इस साल कारोबार में गिरावट आई है। पिछले साल इस समय तक बहुत अच्छा काम था और शिकारा खाली नहीं मिलते थे लेकिन इस बार कई शिकारे खाली खड़े हैं। पहलगाम घटना के बाद पर्यटकों की संख्या कम हुई जिसका असर अभी भी दिख रहा है। दुआ करते हैं कि पर्यटक फिर से बड़ी संख्या में आएं ताकि हमारी रोजी-रोटी बेहतर चल सके। पर्यटक बिना किसी डर के कश्मीर आएं। हम स्वागत के लिए हमेशा तैयार हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। पहलगाम की बायसरन घाटी में आतंकी हमले की पहली बरसी 22 अप्रैल से पहले कश्मीर का माहौल सामान्य नजर आ रहा है। पर्यटक घाटी में खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं। उनका कहना है कि कश्मीर स्वर्ग है और यहां किसी तरह का खतरा नहीं है।
बता दें कि बायसरन में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। हालांकि अब हालात पूरी तरह से सामान्य होते दिख रहे हैं। डल झील के किनारे बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के पुणे से आए विनोद कुटे ने बताया कि वह पहली बार कश्मीर आए हैं। उन्होंने कहा, कश्मीर सच में जन्नत है। गुलमर्ग, सोनमर्ग और डल लेक देखकर दिल को सुकून मिला। यहां किसी भी तरह का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा। जो डर हमने खबरों में सुना था वैसा कुछ भी यहां नहीं दिख रहा। लोग बहुत मददगार हैं और माहौल पूरा शांत है। एक घटना के आधार पर पूरे कश्मीर को नहीं देखा जा सकता।
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बंगलूरू से आए पर्यटक यश ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कश्मीर आकर उन्हें बेहद खुशी हुई। पहलगाम भी गए और वहां बहुत अच्छा लगा। यहां हम पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लोग ईमानदारी से व्यवहार करते हैं और डर जैसी कोई चीज नजर नहीं आती। सभी देशवासियों को यहां जरूर आना चाहिए।
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वहीं दिल्ली से आए एपी शर्मा ने कहा कि वह पिछले तीन दिनों से कश्मीर में हैं और यहां का अनुभव बेहद सुखद रहा। कश्मीर को यूं ही जन्नत नहीं कहा जाता। पहलगाम घटना से पूरा देश दुखी था लेकिन अब यहां माहौल पूरी तरह ठीक है। यहां की वादियों से ज्यादा खूबसूरत यहां के लोग हैं। हवा में मिठास है और मौसम में मासूमियत। हमने शंकराचार्य मंदिर में दर्शन भी किए। हर चीज सामान्य है और कोई खतरा नहीं लग रहा।
इस बीच एक शिकारा चालक गुलाम कादिर ने बात करते हुए कहा कि वह बचपन से ही यह काम कर रहे हैं, लेकिन इस साल कारोबार में गिरावट आई है। पिछले साल इस समय तक बहुत अच्छा काम था और शिकारा खाली नहीं मिलते थे लेकिन इस बार कई शिकारे खाली खड़े हैं। पहलगाम घटना के बाद पर्यटकों की संख्या कम हुई जिसका असर अभी भी दिख रहा है। दुआ करते हैं कि पर्यटक फिर से बड़ी संख्या में आएं ताकि हमारी रोजी-रोटी बेहतर चल सके। पर्यटक बिना किसी डर के कश्मीर आएं। हम स्वागत के लिए हमेशा तैयार हैं।