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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Srinagar: Terrorists started reaching the valley again through the infiltration routes of the nineties.

Srinagar : घुसपैठ के लिए 90 के दशक वाले रास्ते पकड़ने लगे दहशतगर्द, कर रहे हैं कवचभेदी गोलियों का इस्तेमाल

Sun, 11 Aug 2024 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 11 Aug 2024 05:51 AM IST
सार

उस दौर में सियोज और वाडवन में आतंकी कैंप भी सक्रिय थे। लाल द्रमन के सजर गांव में ही करीब 40 स्थानीय आतंकी थे, जो 90 के दशक में मारे गए। अब ये रास्ते घुसपैठ के लिए फिर प्रयोग किए जा रहे हैं।

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Srinagar: Terrorists started reaching the valley again through the infiltration routes of the nineties.
demo pic... - फोटो : साकिव नबी

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में 90 के दशक के शुरुआती दौर में आतंकी घुसपैठ करने के लिए पठानकोट, डुडु-बसंतगढ़, सियोज, भलेसा, जय वैली, गंदोह, ठाठरी, किशतवाड़, मुर्गन टॉप के रास्ते घाटी में दाखिल होते थे। उस दौर में सियोज और वाडवन में आतंकी कैंप भी सक्रिय थे। लाल द्रमन के सजर गांव में ही करीब 40 स्थानीय आतंकी थे, जो 90 के दशक में मारे गए। अब ये रास्ते घुसपैठ के लिए फिर प्रयोग किए जा रहे हैं।

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अनंतनाग जिले के कोकरनाग के गडोल जंगल क्षेत्र में बीते एक साल के भीतर आतंकियों के साथ सुरक्षा बलों की शनिवार को दूसरी बार मुठभेड़ हुई। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, गडोल के जंगल में घिरे आतंकियों के हाल ही में जुलाई में डोडा जिले के देसा में सुरक्षा बलों पर हमले में शामिल होने की आशंका है।
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सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली कुछ आतंकी घटनाओं पर नजर डालें तो आतंकवादी एक बार फिर पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों पर सक्रिय हो गए हैं। 12 जून को जम्मू संभाग के डोडा जिले के छत्रगलां और गंदोह भलेसा इलाके में आतंकी हमले में सात सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी। 26 जून को डोडा जिले के गंदोह, भद्रवाह सेक्टर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में इसी ग्रुप के तीन विदेशी आतंकवादी मारे गए।

दहशतगर्दों ने 16 जुलाई को फिर डोडा में हमला कर दिया, जिसमें चार सैनिक और एक पुलिसकर्मी बलिदान हो गया। इसी ग्रुप में शामिल दो आतंकी देसा से दक्षिण कश्मीर के गडोल जंगल क्षेत्र में दाखिल हुए, जहां सुरक्षाबलों ने इन्हें घेर लिया है। आतंकी अधिकांश हमलों में कवच भेदी गोलियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी नोक कठोर स्टील से ढकी हुई है। एम4 कारबाइल राइफल भी इस्तेमाल की जा रही है। इनका उपयोग अफगानिस्तान में तालिबान से साथ युद्ध में अमेरिकी और नाटो बलों द्वारा किया जाता रहा है।

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