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Srinagar News: तनवीर ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत फिर से शुरू करने की अपील का स्वागत किया
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- यह पहल दोनों देशों की प्रमुख हस्तियों की शांति और दोस्ती की साझा इच्छा को दिखाती है
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान की 100 से ज्यादा जानी-मानी हस्तियों की उस अपील का स्वागत किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय बातचीत और सामान्य राजनयिक संबंध बहाल करने का आग्रह किया गया है। इन सुझावों में हाई कमिश्नरों की बहाली, वीज़ा सेवाओं को फिर से शुरू करना और एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) को दोबारा खोलना शामिल है।
इस पहल का स्वागत करते हुए तनवीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस हमेशा से भारत और पाकिस्तान के बीच शांति, बातचीत और संबंधों को सामान्य बनाने की पक्षधर रही है। हमारे नेतृत्व का दशकों से यह मानना रहा है कि दक्षिण एशिया में शांति और समृद्धि, भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंधों से जुड़ी हुई है। लंबे समय तक अविश्वास और बातचीत न होने से कोई रणनीतिक फ़ायदा नहीं होता। इस क्षेत्र के लोगों, खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही लगातार बनी हुई दूरियों का सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और दक्षिण एशिया की सामूहिक प्रगति के लिए दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगातार बातचीत ज़रूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पड़ोसी देशों के साथ शुरुआती संपर्क की पहल का ज़िक्र करते हुए सादिक ने कहा कि उन पहलों से पूरे क्षेत्र में उम्मीद जगी थी। पड़ोसी देशों के साथ सहयोग पर प्रधानमंत्री मोदी का ज़ोर यह दिखाता है कि वे समझते थे कि क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए राजनीतिक साहस और राजनयिक बातचीत की ज़रूरत है। उस भावना को फिर से जिंदा करने का स्वागत वे सभी लोग करेंगे जो एक स्थिर और समृद्ध दक्षिण एशिया चाहते हैं।
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सादिक ने यह भी कहा कि भारतीय समाज के अलग-अलग वर्गों - जिनमें RSS से जुड़े लोग भी शामिल हैं - की ओर से पाकिस्तान के साथ फिर से बातचीत की वकालत करना एक बदलती हुई आम सहमति को दिखाता है कि द्विपक्षीय संबंधों को संभालने के लिए कूटनीति ही सबसे असरदार ज़रिया है।
साथ ही, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सार्थक बातचीत के साथ-साथ भरोसे को मज़बूत करने वाले ठोस कदम भी उठाए जाने चाहिए। पाकिस्तान को भारत सरकार द्वारा लगातार उठाए जा रहे जायज़ मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। इस्लामाबाद की यह ज़िम्मेदारी है कि वह ऐसे हालात बनाए जो भरोसा जगाएं और लगातार बातचीत को राजनीतिक और राजनयिक रूप से संभव बनाएं। शांति सिर्फ़ बातों से नहीं आ सकती; इसे ज़िम्मेदार व्यवहार और आपसी सम्मान से मज़बूत किया जाना चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए, सादिक ने कहा कि पार्टी का मानना है कि बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक जुड़ाव ही इस क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और समृद्धि के एकमात्र टिकाऊ रास्ते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान की 100 से ज्यादा जानी-मानी हस्तियों की उस अपील का स्वागत किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय बातचीत और सामान्य राजनयिक संबंध बहाल करने का आग्रह किया गया है। इन सुझावों में हाई कमिश्नरों की बहाली, वीज़ा सेवाओं को फिर से शुरू करना और एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) को दोबारा खोलना शामिल है।
इस पहल का स्वागत करते हुए तनवीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस हमेशा से भारत और पाकिस्तान के बीच शांति, बातचीत और संबंधों को सामान्य बनाने की पक्षधर रही है। हमारे नेतृत्व का दशकों से यह मानना रहा है कि दक्षिण एशिया में शांति और समृद्धि, भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंधों से जुड़ी हुई है। लंबे समय तक अविश्वास और बातचीत न होने से कोई रणनीतिक फ़ायदा नहीं होता। इस क्षेत्र के लोगों, खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही लगातार बनी हुई दूरियों का सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और दक्षिण एशिया की सामूहिक प्रगति के लिए दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगातार बातचीत ज़रूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पड़ोसी देशों के साथ शुरुआती संपर्क की पहल का ज़िक्र करते हुए सादिक ने कहा कि उन पहलों से पूरे क्षेत्र में उम्मीद जगी थी। पड़ोसी देशों के साथ सहयोग पर प्रधानमंत्री मोदी का ज़ोर यह दिखाता है कि वे समझते थे कि क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए राजनीतिक साहस और राजनयिक बातचीत की ज़रूरत है। उस भावना को फिर से जिंदा करने का स्वागत वे सभी लोग करेंगे जो एक स्थिर और समृद्ध दक्षिण एशिया चाहते हैं।
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सादिक ने यह भी कहा कि भारतीय समाज के अलग-अलग वर्गों - जिनमें RSS से जुड़े लोग भी शामिल हैं - की ओर से पाकिस्तान के साथ फिर से बातचीत की वकालत करना एक बदलती हुई आम सहमति को दिखाता है कि द्विपक्षीय संबंधों को संभालने के लिए कूटनीति ही सबसे असरदार ज़रिया है।
साथ ही, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सार्थक बातचीत के साथ-साथ भरोसे को मज़बूत करने वाले ठोस कदम भी उठाए जाने चाहिए। पाकिस्तान को भारत सरकार द्वारा लगातार उठाए जा रहे जायज़ मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। इस्लामाबाद की यह ज़िम्मेदारी है कि वह ऐसे हालात बनाए जो भरोसा जगाएं और लगातार बातचीत को राजनीतिक और राजनयिक रूप से संभव बनाएं। शांति सिर्फ़ बातों से नहीं आ सकती