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Srinagar News: मन की बात में पीएम ने सुनाई बारामुला में प्राचीन बौद्ध स्थल की कहानी
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- प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू और कश्मीर के गहरे इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के बारे में बात की
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में जम्मू और कश्मीर के गहरे इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के बारे में बात की। उन्होंने बारामुला में प्राचीन बौद्ध स्थल की कहानी सुनाई जिसे दशकों तक प्राकृतिक मिट्टी के टीलों के रूप में नजरअंदाज किए जाने के बाद फिर से सामने लाया गया।
मन की बात के 129वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा कि इस स्थल की खोज से क्षेत्र के बहुत पुराने सभ्यतागत संबंधों का पता चलता है और यह भारत के गौरव को बढ़ाता है। सालों तक, जहानपोरा गांव के लोगों ने खेतों में फैले ऊंचे-नीचे टीले देखे। ज्यादातर लोगों का मानना था कि ये सामान्य मिट्टी की संरचनाएं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका असली मतलब तब तक छिपा रहा जब तक कि उस इलाके में काम कर रहे एक पुरातत्वविद् ने देखा कि ये संरचनाएं प्राकृतिक होने के लिए बहुत ज्यादा व्यवस्थित और असामान्य थीं।
इसके बाद विशेषज्ञों ने एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू किया। हवाई तस्वीरों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया और जमीन की विस्तार से मैपिंग की। अध्ययन ने पुष्टि की कि ये टीले एक बड़े मानव निर्मित धार्मिक परिसर का हिस्सा थे, न कि प्रकृति की देन। बाद में विदेश से एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। एक फ्रांसीसी संग्रहालय में रखी एक बहुत पुरानी धुंधली तस्वीर में बारामूला के तीन बौद्ध स्तूप दिखाए गए थे।
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मोदी ने कहा कि हालांकि तस्वीर धुंधली थी लेकिन यह शोधकर्ताओं के लिए जहानपोरा में स्थल का तस्वीर से मिलान करने और इसकी बौद्ध उत्पत्ति की पुष्टि करने के लिए एक मुख्य संदर्भ बिंदु बन गई। यह परिसर लगभग 2,000 साल पुराना है जो साबित करता है कि कश्मीर में कभी बौद्ध धर्म की मजबूत उपस्थिति थी और यह प्राचीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक शिक्षा का हिस्सा था।
कश्मीर सदियों से विचारों, आध्यात्मिकता और सीखने का केंद्र रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह खोज दिखाती है कि कश्मीर हमेशा से सिर्फ एक सुंदर जगह से कहीं ज्यादा रहा है। यह सदियों से विचारों, आध्यात्मिकता और सीखने का केंद्र रहा है। इस स्थल को फिर से खोजने में नई तकनीक और वैश्विक सहयोग की भूमिका इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक उपकरणों से इतिहास की रक्षा कैसे की जा सकती है। ऐसी विरासत स्थलों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी जड़ों को समझ सकें और अपने अतीत पर गर्व कर सकें। जम्मू और कश्मीर का इतिहास ज्ञान, सद्भाव और साझा संस्कृति के सबक देता है, जो आज भी प्रेरणा देते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में जम्मू और कश्मीर के गहरे इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के बारे में बात की। उन्होंने बारामुला में प्राचीन बौद्ध स्थल की कहानी सुनाई जिसे दशकों तक प्राकृतिक मिट्टी के टीलों के रूप में नजरअंदाज किए जाने के बाद फिर से सामने लाया गया।
मन की बात के 129वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा कि इस स्थल की खोज से क्षेत्र के बहुत पुराने सभ्यतागत संबंधों का पता चलता है और यह भारत के गौरव को बढ़ाता है। सालों तक, जहानपोरा गांव के लोगों ने खेतों में फैले ऊंचे-नीचे टीले देखे। ज्यादातर लोगों का मानना था कि ये सामान्य मिट्टी की संरचनाएं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका असली मतलब तब तक छिपा रहा जब तक कि उस इलाके में काम कर रहे एक पुरातत्वविद् ने देखा कि ये संरचनाएं प्राकृतिक होने के लिए बहुत ज्यादा व्यवस्थित और असामान्य थीं।
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इसके बाद विशेषज्ञों ने एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू किया। हवाई तस्वीरों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया और जमीन की विस्तार से मैपिंग की। अध्ययन ने पुष्टि की कि ये टीले एक बड़े मानव निर्मित धार्मिक परिसर का हिस्सा थे, न कि प्रकृति की देन। बाद में विदेश से एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। एक फ्रांसीसी संग्रहालय में रखी एक बहुत पुरानी धुंधली तस्वीर में बारामूला के तीन बौद्ध स्तूप दिखाए गए थे।
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मोदी ने कहा कि हालांकि तस्वीर धुंधली थी लेकिन यह शोधकर्ताओं के लिए जहानपोरा में स्थल का तस्वीर से मिलान करने और इसकी बौद्ध उत्पत्ति की पुष्टि करने के लिए एक मुख्य संदर्भ बिंदु बन गई। यह परिसर लगभग 2,000 साल पुराना है जो साबित करता है कि कश्मीर में कभी बौद्ध धर्म की मजबूत उपस्थिति थी और यह प्राचीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक शिक्षा का हिस्सा था।
कश्मीर सदियों से विचारों, आध्यात्मिकता और सीखने का केंद्र रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह खोज दिखाती है कि कश्मीर हमेशा से सिर्फ एक सुंदर जगह से कहीं ज्यादा रहा है। यह सदियों से विचारों, आध्यात्मिकता और सीखने का केंद्र रहा है। इस स्थल को फिर से खोजने में नई तकनीक और वैश्विक सहयोग की भूमिका इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक उपकरणों से इतिहास की रक्षा कैसे की जा सकती है। ऐसी विरासत स्थलों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी जड़ों को समझ सकें और अपने अतीत पर गर्व कर सकें। जम्मू और कश्मीर का इतिहास ज्ञान, सद्भाव और साझा संस्कृति के सबक देता है, जो आज भी प्रेरणा देते हैं।