{"_id":"693485ffa4211862130e5ce1","slug":"srinagar-kpdcl-urge-to-peoples-for-electricity-use-srinagar-news-c-10-lko1027-780112-2025-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: सर्दियों में बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: सर्दियों में बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करें
विज्ञापन
- रोजाना करीब 45 ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग और अन्य कारणों से हो रहे हैं खराब : अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड (केपीडीसीएल) ने कश्मीर संभाग में उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस सर्दी में बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करें ताकि बिजली कटौती से बचा जा सके और ट्रांसफार्मरों को नुकसान न हो।
विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कड़ाके की ठंड की शुरुआत के साथ बिजली की खपत में बढ़ोतरी हुई है। कश्मीर घाटी में रोजाना अलग-अलग लोड कैपेसिटी वाले लगभग 45 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) खराब हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण ओवरलोडिंग और लोकल मेड हीटिंग गैजेट्स का इस्तेमाल है।
केपीडीसीएल के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पिछले एक महीने में बड़ी संख्या में डीटी खराब हुए हैं। कुछ को तुरंत ठीक कर दिया जाता है जबकि दूसरों को मरम्मत के लिए वर्कशॉप में भेजा जाता है। इनमें से ज्यादातर नुकसान ग्रामीण इलाकों में होता है जहां ज्यादातर उपभोक्ताओं के पास मीटर नहीं लगे हैं।अधिकारी ने वित्तीय असर के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि एक खराब डीटी की मरम्मत का खर्च औसतन करीब 2 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच आता है।''''
विज्ञापन
केपीडीसीएल ने उपभोक्ताओं से ट्रांसफार्मर को खराब होने से बचाने के लिए बिजली कटौती के बाद बिजली आने पर अपने हीटिंग लोड को सही से प्रबंधित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बिजली आने के 15-20 मिनट के भीतर बिजली कटौती मुख्य रूप से हीटिंग गैजेट्स के एक साथ इस्तेमाल के कारण होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर हीटिंग लोड को उपभोक्ताओं की मंजूर लिमिट के हिसाब से इस्तेमाल किया जाए तो बिना बताए होने वाली बिजली कटौती को कम किया जा सकता है।
इस बीच गांदरबल जिले के कार्यकारी इंजीनियर शमीम अहमद ने कहा कि हम अपने कंज्यूमर्स को बिना रुकावट बिजली सप्लाई देने की कोशिश करते हैं लेकिन ज्यादा ओवरलोडिंग से ट्रांसफार्मर खराब हो जाते हैं। लोगों को बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए ताकि सर्दियों में कंज्यूमर्स को बिना रुकावट बिजली सप्लाई मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि स्मार्ट मीटर अभी कुछ ही इलाकों में लगाए गए हैं जबकि बाकी इलाकों में भविष्य में लगाए जाएंगे।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि कंगन में बन रही वर्कशॉप पूरे कंगन सब-डिवीजन को कवर करेगी और सभी खराब ट्रांसफार्मर उसी वर्कशॉप में रिपेयर किए जाएंगे और कंज्यूमर्स को सर्दियों में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
डीटी खराब होने के कारण
- तेल की विस्कोसिटी :
ठंड से ट्रांसफार्मर का तेल गाढ़ा हो जाता है जिससे गर्म ट्रांसफर की कूलिंग में रुकावट आती है।
- मटीरियल का टूटना:
बहुत ज्यादा ठंड से इंसुलेटिंग मटीरियल, सील और बुशिंग टूट-फूट जाते हैं जिससे दरारें और लीक होने का खतरा बढ़ जाता है।
- कंडेंसेशन: तापमान में उतार-चढ़ाव से अंदर नमी जमा हो सकती है जिससे इंसुलेशन खराब हो सकता है और आर्क या शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
- ओवरलोडिंग: सर्दियों में ज्यादा हीटिंग की मांग से सिस्टम पर दबाव पड़ता है जिससे अक्सर ओवरलोडिंग हो जाती है खासकर ज्यादा बिना मीटर वाले इस्तेमाल से जिससे कुछ इलाकों में रोजाना ट्रांसफार्मर खराब हो जाते हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड (केपीडीसीएल) ने कश्मीर संभाग में उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस सर्दी में बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करें ताकि बिजली कटौती से बचा जा सके और ट्रांसफार्मरों को नुकसान न हो।
विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कड़ाके की ठंड की शुरुआत के साथ बिजली की खपत में बढ़ोतरी हुई है। कश्मीर घाटी में रोजाना अलग-अलग लोड कैपेसिटी वाले लगभग 45 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) खराब हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण ओवरलोडिंग और लोकल मेड हीटिंग गैजेट्स का इस्तेमाल है।
विज्ञापन
केपीडीसीएल के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पिछले एक महीने में बड़ी संख्या में डीटी खराब हुए हैं। कुछ को तुरंत ठीक कर दिया जाता है जबकि दूसरों को मरम्मत के लिए वर्कशॉप में भेजा जाता है। इनमें से ज्यादातर नुकसान ग्रामीण इलाकों में होता है जहां ज्यादातर उपभोक्ताओं के पास मीटर नहीं लगे हैं।अधिकारी ने वित्तीय असर के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि एक खराब डीटी की मरम्मत का खर्च औसतन करीब 2 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच आता है।''''
विज्ञापन
केपीडीसीएल ने उपभोक्ताओं से ट्रांसफार्मर को खराब होने से बचाने के लिए बिजली कटौती के बाद बिजली आने पर अपने हीटिंग लोड को सही से प्रबंधित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बिजली आने के 15-20 मिनट के भीतर बिजली कटौती मुख्य रूप से हीटिंग गैजेट्स के एक साथ इस्तेमाल के कारण होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर हीटिंग लोड को उपभोक्ताओं की मंजूर लिमिट के हिसाब से इस्तेमाल किया जाए तो बिना बताए होने वाली बिजली कटौती को कम किया जा सकता है।
इस बीच गांदरबल जिले के कार्यकारी इंजीनियर शमीम अहमद ने कहा कि हम अपने कंज्यूमर्स को बिना रुकावट बिजली सप्लाई देने की कोशिश करते हैं लेकिन ज्यादा ओवरलोडिंग से ट्रांसफार्मर खराब हो जाते हैं। लोगों को बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए ताकि सर्दियों में कंज्यूमर्स को बिना रुकावट बिजली सप्लाई मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि स्मार्ट मीटर अभी कुछ ही इलाकों में लगाए गए हैं जबकि बाकी इलाकों में भविष्य में लगाए जाएंगे।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि कंगन में बन रही वर्कशॉप पूरे कंगन सब-डिवीजन को कवर करेगी और सभी खराब ट्रांसफार्मर उसी वर्कशॉप में रिपेयर किए जाएंगे और कंज्यूमर्स को सर्दियों में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
डीटी खराब होने के कारण
- तेल की विस्कोसिटी :
ठंड से ट्रांसफार्मर का तेल गाढ़ा हो जाता है जिससे गर्म ट्रांसफर की कूलिंग में रुकावट आती है।
- मटीरियल का टूटना:
बहुत ज्यादा ठंड से इंसुलेटिंग मटीरियल, सील और बुशिंग टूट-फूट जाते हैं जिससे दरारें और लीक होने का खतरा बढ़ जाता है।
- कंडेंसेशन: तापमान में उतार-चढ़ाव से अंदर नमी जमा हो सकती है जिससे इंसुलेशन खराब हो सकता है और आर्क या शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
- ओवरलोडिंग: सर्दियों में ज्यादा हीटिंग की मांग से सिस्टम पर दबाव पड़ता है जिससे अक्सर ओवरलोडिंग हो जाती है खासकर ज्यादा बिना मीटर वाले इस्तेमाल से जिससे कुछ इलाकों में रोजाना ट्रांसफार्मर खराब हो जाते हैं।