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Srinagar News: अनंतनाग के युवक पर लगा पीएसए हाईकोर्ट ने किया रद्द, तुरंत रिहा करने का आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिए गए अनंतनाग के 23 वर्षीय युवक की निवारक हिरासत को रद्द करते हुए उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल आशंकाओं पर आधारित थी, कथित आपराधिक गतिविधि से इसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और हिरासत के खिलाफ दिए गए प्रतिवेदन के निपटारे में हुआ अत्यधिक विलंब भी कानूनी प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की पीठ ने बिजबिहाड़ा के मुखदमपोरा, मरहामा निवासी गुलजार अहमद वैद द्वारा अपने पिता के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की। याचिका में 31 दिसंबर 2024 को जारी हिरासत आदेश को चुनौती दी गई थी। पुलिस रिकॉर्ड में अनंतनाग थाने में दर्ज एक पुरानी प्राथमिकी का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया था कि वैद ओवर-ग्राउंड वर्करों के संपर्क में था और आतंकियों को साजो-सामान व आवागमन की सुविधा मुहैया करा रहा था। हालांकि, अदालत ने रेखांकित किया कि प्रशासन ने खुद स्वीकार किया था कि जांच एजेंसी अभी पुख्ता सबूत जुटा रही है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही औपचारिक गिरफ्तारी की जाएगी।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के केवल आशंका के आधार पर किसी को हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिए गए अनंतनाग के 23 वर्षीय युवक की निवारक हिरासत को रद्द करते हुए उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल आशंकाओं पर आधारित थी, कथित आपराधिक गतिविधि से इसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और हिरासत के खिलाफ दिए गए प्रतिवेदन के निपटारे में हुआ अत्यधिक विलंब भी कानूनी प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की पीठ ने बिजबिहाड़ा के मुखदमपोरा, मरहामा निवासी गुलजार अहमद वैद द्वारा अपने पिता के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की। याचिका में 31 दिसंबर 2024 को जारी हिरासत आदेश को चुनौती दी गई थी। पुलिस रिकॉर्ड में अनंतनाग थाने में दर्ज एक पुरानी प्राथमिकी का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया था कि वैद ओवर-ग्राउंड वर्करों के संपर्क में था और आतंकियों को साजो-सामान व आवागमन की सुविधा मुहैया करा रहा था। हालांकि, अदालत ने रेखांकित किया कि प्रशासन ने खुद स्वीकार किया था कि जांच एजेंसी अभी पुख्ता सबूत जुटा रही है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही औपचारिक गिरफ्तारी की जाएगी।
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अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के केवल आशंका के आधार पर किसी को हिरासत में नहीं रखा जा सकता।