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Srinagar News: फर्जी फॉरेक्स स्कीम में कश्मीरी निवेशकों से 16.78 लाख की ठगी
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- स्पेशल क्राइम विंग ने यूपी के आरोपी के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
- कम समय में भारी मुनाफे का लालच देकर श्रीनगर के 12 लोगों को बनाया था शिकार
- गाजियाबाद निवासी सुनील सिंह के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में आरोप-पत्र पेश
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच की स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर ने फर्जी निवेश योजना के नाम पर कश्मीर के 12 नागरिकों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय ठग के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया है। आरोपी ने खुद को दिल्ली आधारित एक आकर्षक फॉरेक्स इन्वेस्टमेंट कंपनी का संचालक बताकर निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच दिया था और उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली थी।
स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस स्टेशन एससीडब्ल्यू में दर्ज प्राथमिकी की जांच पूरी होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीनगर की अदालत में आरोप-पत्र पेश किया गया है। चार्जशीट में नामजद आरोपी की पहचान सुनील सिंह निवासी प्रताप विहार, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियंत्रित जमा योजना पाबंदी अधिनियम, 2019 के तहत गंभीर आरोप तय किए गए हैं।
मामले की शुरुआत श्रीनगर निवासी आबिद हुसैन जू और 11 अन्य नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई संयुक्त शिकायत से हुई थी। पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उन्हें ट्रॉनिक्स पावर एंड कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम दिल्ली नाम की एक कथित फॉरेक्स निवेश परियोजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित और आकर्षित किया। आरोपी ने दावा किया था कि कम समय के भीतर उनकी निवेशित रकम पर अप्रत्याशित और आकर्षक मुनाफा दिया जाएगा। इन झूठे वादों के झांसे में आकर सभी 12 शिकायतकर्ताओं ने बैंकिंग चैनलों (ऑनलाइन ट्रांसफर) के माध्यम से कुल 16,78,500 रुपये आरोपी से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होते ही आरोपी ने न तो कोई मुनाफा दिया और न ही मूल रकम लौटाई, जिसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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आरबीआई की पुष्टि: कोई वैध पंजीकरण नहीं था
क्राइम ब्रांच की विस्तृत जांच में भारतीय रिजर्व बैंक से भी जानकारी साझा की गई। आरबीआई ने औपचारिक रूप से पुष्टि की कि उक्त तथाकथित निवेश कार्यक्रम या कंपनी उसके पास किसी भी श्रेणी में पंजीकृत नहीं थी और यह पूरी तरह से एक गैर-कानूनी व अनियंत्रित योजना चलाई जा रही थी। सभी दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने न्यायिक विचार और कानूनी कार्यवाही के लिए चार्जशीट अदालत में जमा कर दी है।
जनता से अपील, पूरी जांच-पड़ताल कर लें
इस मामले के खुलासे के साथ ही स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह के ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग, मल्टी-लेवल मार्केटिंग या अवास्तविक रिटर्न का दावा करने वाली निवेश योजनाओं में पैसा लगाने से पहले संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ उनकी वैधता और पंजीकरण की पूरी जांच-पड़ताल कर लें। किसी भी संदिग्ध निवेश धोखाधड़ी की सूचना तुरंत संबंधित पुलिस और साइबर क्राइम सेल को दें।
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- कम समय में भारी मुनाफे का लालच देकर श्रीनगर के 12 लोगों को बनाया था शिकार
- गाजियाबाद निवासी सुनील सिंह के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में आरोप-पत्र पेश
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच की स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर ने फर्जी निवेश योजना के नाम पर कश्मीर के 12 नागरिकों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय ठग के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया है। आरोपी ने खुद को दिल्ली आधारित एक आकर्षक फॉरेक्स इन्वेस्टमेंट कंपनी का संचालक बताकर निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच दिया था और उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली थी।
स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस स्टेशन एससीडब्ल्यू में दर्ज प्राथमिकी की जांच पूरी होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीनगर की अदालत में आरोप-पत्र पेश किया गया है। चार्जशीट में नामजद आरोपी की पहचान सुनील सिंह निवासी प्रताप विहार, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियंत्रित जमा योजना पाबंदी अधिनियम, 2019 के तहत गंभीर आरोप तय किए गए हैं।
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मामले की शुरुआत श्रीनगर निवासी आबिद हुसैन जू और 11 अन्य नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई संयुक्त शिकायत से हुई थी। पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उन्हें ट्रॉनिक्स पावर एंड कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम दिल्ली नाम की एक कथित फॉरेक्स निवेश परियोजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित और आकर्षित किया। आरोपी ने दावा किया था कि कम समय के भीतर उनकी निवेशित रकम पर अप्रत्याशित और आकर्षक मुनाफा दिया जाएगा। इन झूठे वादों के झांसे में आकर सभी 12 शिकायतकर्ताओं ने बैंकिंग चैनलों (ऑनलाइन ट्रांसफर) के माध्यम से कुल 16,78,500 रुपये आरोपी से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होते ही आरोपी ने न तो कोई मुनाफा दिया और न ही मूल रकम लौटाई, जिसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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आरबीआई की पुष्टि: कोई वैध पंजीकरण नहीं था
क्राइम ब्रांच की विस्तृत जांच में भारतीय रिजर्व बैंक से भी जानकारी साझा की गई। आरबीआई ने औपचारिक रूप से पुष्टि की कि उक्त तथाकथित निवेश कार्यक्रम या कंपनी उसके पास किसी भी श्रेणी में पंजीकृत नहीं थी और यह पूरी तरह से एक गैर-कानूनी व अनियंत्रित योजना चलाई जा रही थी। सभी दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने न्यायिक विचार और कानूनी कार्यवाही के लिए चार्जशीट अदालत में जमा कर दी है।
जनता से अपील, पूरी जांच-पड़ताल कर लें
इस मामले के खुलासे के साथ ही स्पेशल क्राइम विंग कश्मीर ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह के ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग, मल्टी-लेवल मार्केटिंग या अवास्तविक रिटर्न का दावा करने वाली निवेश योजनाओं में पैसा लगाने से पहले संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ उनकी वैधता और पंजीकरण की पूरी जांच-पड़ताल कर लें। किसी भी संदिग्ध निवेश धोखाधड़ी की सूचना तुरंत संबंधित पुलिस और साइबर क्राइम सेल को दें।