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Srinagar News: डॉ. फारूक ने की पैगंबर के माफी के संदेश को अपनाने की अपील
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- यौम-ए-फतह-ए-मक्का की पूर्व संध्या पर एनसी अध्यक्ष ने दिया संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। यौम-ए-फतह-ए-मक्का से एक दिन पहले जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने लोगों से मक्का की जीत के ऐतिहासिक दिन पर इस्लाम के पैगंबर, हजरत मुहम्मद की ओर से दिखाई गई दया, रहम और माफी के हमेशा रहने वाले सबक पर सोचने की अपील की।
डॉ. फारूक ने कहा कि यह दिन इस्लामी इतिहास में एक अहम पल है जब पैगंबर साहब ने सालों की ज़ुल्म, देश निकाला और मुश्किलों के बाद, 630 ईस्वी में रमजान के पवित्र महीने में इज्जत और विनम्रता के साथ पवित्र शहर मक्का में कदम रखा। उनका और उनके मानने वालों का विरोध करने वालों और उन्हें ज़ुल्म करने वालों से बदला लेने की ताकत होने के बावजूद, उन्होंने रहम का रास्ता चुना और आम माफी का ऐलान किया।
डॉ. फारूक ने कहा कि यौम-ए-फतह-ए-मक्का का संदेश आज की दुनिया में भी बहुत काम का है। उन्होंने कहा, इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद ने दिखाया कि सच्ची ताकत माफी और हिम्मत में होती है। अपने सबसे कड़े विरोधियों के सामने भी, उन्होंने बदले के बजाय दया और बंटवारे के बजाय सुलह को चुना।
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उन्होंने लोगों से इस ऐतिहासिक दिन से प्रेरणा लेने और दया, न्याय, सहनशीलता और शांतिपूर्ण साथ रहने पर आधारित समाज बनाने की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने लोगों के बीच शांति, एकता और मेल-मिलाप के लिए भी प्रार्थना की और उम्मीद जताई कि इस दिन दिखाए गए मूल्य इंसानियत को समझ और भाईचारे की ओर ले जाते रहेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। यौम-ए-फतह-ए-मक्का से एक दिन पहले जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने लोगों से मक्का की जीत के ऐतिहासिक दिन पर इस्लाम के पैगंबर, हजरत मुहम्मद की ओर से दिखाई गई दया, रहम और माफी के हमेशा रहने वाले सबक पर सोचने की अपील की।
डॉ. फारूक ने कहा कि यह दिन इस्लामी इतिहास में एक अहम पल है जब पैगंबर साहब ने सालों की ज़ुल्म, देश निकाला और मुश्किलों के बाद, 630 ईस्वी में रमजान के पवित्र महीने में इज्जत और विनम्रता के साथ पवित्र शहर मक्का में कदम रखा। उनका और उनके मानने वालों का विरोध करने वालों और उन्हें ज़ुल्म करने वालों से बदला लेने की ताकत होने के बावजूद, उन्होंने रहम का रास्ता चुना और आम माफी का ऐलान किया।
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डॉ. फारूक ने कहा कि यौम-ए-फतह-ए-मक्का का संदेश आज की दुनिया में भी बहुत काम का है। उन्होंने कहा, इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद ने दिखाया कि सच्ची ताकत माफी और हिम्मत में होती है। अपने सबसे कड़े विरोधियों के सामने भी, उन्होंने बदले के बजाय दया और बंटवारे के बजाय सुलह को चुना।
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उन्होंने लोगों से इस ऐतिहासिक दिन से प्रेरणा लेने और दया, न्याय, सहनशीलता और शांतिपूर्ण साथ रहने पर आधारित समाज बनाने की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने लोगों के बीच शांति, एकता और मेल-मिलाप के लिए भी प्रार्थना की और उम्मीद जताई कि इस दिन दिखाए गए मूल्य इंसानियत को समझ और भाईचारे की ओर ले जाते रहेंगे।