उमर कैबिनेट विस्तार से सियासी हलचल: मुबारक गुल के समर्थकों का प्रदर्शन, सतीश शर्मा मंत्रिमंडल से बाहर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल विस्तार में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री बनाया सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया। कश्मीर घाटी को सात और जम्मू क्षेत्र को केवल दो मंत्री मिलने पर भाजपा ने क्षेत्रीय असंतुलन का आरोप लगाया।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए चार नए मंत्रियों को शामिल किया। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और पहलगाम के विधायक अल्ताफ अहमद वानी (कलू) शामिल हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में सभी को पद की शपथ दिलाई।
इस विस्तार के साथ मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। वहीं, छंब से निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने फेरबदल की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मुख्यमंत्री को अपने इस्तीफे सौंपे थे।
अनुभवी नेताओं को मिली तरजीह
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल में अनुभवी नेताओं को जगह दी है। अली मोहम्मद सागर सात बार विधायक रह चुके हैं और 1983 में पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में अब तक कोई विधानसभा चुनाव नहीं हारा है। वह पहले भी फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकारों में मंत्री रह चुके हैं।
मीर सैफुल्ला भी पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने 2009 से 2014 तक उमर अब्दुल्ला सरकार में कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी पहली बार मंत्री बने हैं। हब्बाकदल से विधायक फिरदौस ने 2024 में तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीता था। वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के महिला विंग की अध्यक्ष भी हैं और मंत्रिमंडल में सकीना इटू के बाद दूसरी महिला मंत्री बनी हैं।
कश्मीर को सात जम्मू को दो मंत्री
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सभी चार नए मंत्री कश्मीर घाटी से हैं। अब नौ सदस्यीय मंत्रिपरिषद में घाटी के सात मंत्री हैं जबकि जम्मू क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा ही प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
भाजपा ने इस फेरबदल को क्षेत्रीय और सांस्कृतिक असंतुलन बताते हुए सरकार की आलोचना की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि सरकार को सभी क्षेत्रों समुदायों और वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए लेकिन इस विस्तार में ऐसा दिखाई नहीं दिया।
मुबारक गुल के समर्थकों का प्रदर्शन
मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और ईदगाह के विधायक मुबारक गुल के समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली। पार्टी मुख्यालय नवाए सुब्ह में समर्थकों ने प्रदर्शन किया और नेतृत्व के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की।
मुबारक गुल ने कहा कि वह 20 शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल हो चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया। उन्होंने कहा कि वह उचित समय पर अपनी बात रखेंगे।
नाराजगी को शांत करने के प्रयास में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी का नया महासचिव नियुक्त कर दिया। उन्होंने अली मोहम्मद सागर की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता अब्दुल मजीद भट लर्मी ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर दुख जताया हालांकि उन्होंने नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने की बात कही।
राज्य का दर्जा बहाल होने तक सरकार में शामिल नहीं होगी कांग्रेस
सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने का अपना रुख फिर दोहराया है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि जब तक जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता तब तक कांग्रेस मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल में बदलाव को अच्छा कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए मंत्री लोगों की परेशानियों और समस्याओं को दूर करने के लिए काम करेंगे।