Mirwaiz Umar Farooq: मौलवी मीरवाइज उमर के नमाज पढ़ाने के फैसले पर क्या बोले कश्मीर के राजनीतिक नेता
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आखिरकार मीरवाइज उमर फारूक स्वतंत्र व्यक्ति की तरह घूम सकेंगे। जबकि, उपराज्यपाल प्रशासन द्वारा वर्षों से उनकी हिरासत को लेकर इनकार किया जाता रहा है।
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पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, अपनी पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी सहित अन्य घाटी के राजनीतिक नेताओं ने मौलवी मीरवाइज उमर फारूक के शुक्रवार की नमाज पढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। कड़ी सुरक्षा के बीच मीरवाइज उमर श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद पहुंचे। इस दौरान लोगों ने भरपूर जोश के साथ उनका स्वागत किया।
#WATCH | Mirwaiz Umar Farooq leads Friday prayers at Srinagar's Jamia Masjid pic.twitter.com/min4gUhCW6
— ANI (@ANI) September 22, 2023विज्ञापन
इसे लेकर उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'मैं मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंदी से रिहा करने के लिए जम्मू-कश्मीर में प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि वे उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने, लोगों के साथ बातचीत करने और अपनी सामाजिक व धार्मिक जिम्मेदारियों को फिर से शुरू करने की अनुमति देंगे। आज कश्मीर में निगाहें मीरवाइज पर होंगी क्योंकि वह 2019 के बाद जामिया मस्जिद में अपना पहला शुक्रवार का उपदेश देंगे।'
महबूबा मुफ्ती ने भाजपा नेताओं को घेरा
वहीं, महबूबा मुफ्ती ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, ' आखिरकार मीरवाइज उमर फारूक स्वतंत्र व्यक्ति की तरह घूम सकेंगे। जबकि, उपराज्यपाल प्रशासन द्वारा वर्षों से उनकी हिरासत को लेकर इनकार किया जाता रहा है। एक धार्मिक प्रमुख के रूप में पूरे जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों द्वारा उनका बहुत सम्मान किया जाता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी रिहाई का श्रेय लेने के लिए भाजपा के विभिन्न राजनीतिक संगठनों के बीच खींचतान शुरू हो चुकी है।'
अल्ताफ बुखारी ने गृहमंत्री शाह और एलजी मनोज सिन्हा का जताया आभार
जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने इस फैसले के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का शुक्रिया किया है। उन्होंने कहा, ' मीरवाइज उमर फारूक को ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व करने की अनुमति देने के फैसले के लिए मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को धन्यवाद देना चाहता हूं। उम्मीद है कि मीरवाइज एक बेहतर और शांतिपूर्ण कल के लिए समाज को सकारात्मक तरीके से आकार देने में अपनी भूमिका निभाएंगे।'
मीरवाइज नजरबंद का आरोप, सरकार का जवाब
मीरवाइज उमर ने बार-बार आरोप लगाया है कि 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें नजरबंद किया है। हालांकि, उनके बयान का खंडन करते हुए, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पिछले महीने श्रीनगर में मीडिया से कहा था कि उमर फारूक हिरासत में नहीं थे। इससे पहले अगस्त में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के अपने फैसले की चौथी वर्षगांठ मनाई थी।
कौन हैं मीरवाइज मौलवी उमर फारूक
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक फारूक के बेटे हैं, जिनकी 21 मई 1990 को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। इस साल मई की शुरुआत में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने मामले में हिजबुल मुजाहिदीन के दो फरार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आतंकवादी जावेद अहमद भट और जहूर अहमद भट्ट श्रीनगर के निवासी थे। वे 21 मई 1990 को मीरवाइज फारूक की हत्या के बाद से फरार थे।
डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के मुख्य प्रवक्ता सलमान निजामी ने सभी मौलवियों की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा, '“आज, सरकार ने मीरवाइज उमर फारूक को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में सामूहिक प्रार्थना का नेतृत्व करने की अनुमति देने का फैसला किया। यह एक स्वागत योग्य कदम है और हम बार-बार उन धार्मिक मौलवियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं जो हमारे समाज में प्रभावशाली हैं, उनका ज्ञान और प्रभाव का सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है।