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लेह: लद्दाख के चांगथांग को बचाने का मास्टर प्लान तैयार, पांच साल में बदलेगी संरक्षण की तस्वीर

Tue, 13 Oct 2026 01:05 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, लेह
अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 13 Oct 2026 01:05 PM IST
सार

लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र, चरागाहों और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ पशुपालकों की आजीविका मजबूत करने के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की गई है

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Master plan ready to save Ladakh's Changthang
चांगथांग संरक्षण योजना - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने और स्थानीय पशुपालकों की आजीविका को मजबूत बनाने के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की गई है। विजन फ्रॉम द हाईलैंड्स बिल्डिंग अ शेयर्ड फ्यूचर फॉर रेंजलैंड्स, वाइल्डलाइफ एंड कम्युनिटीज' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ चांगपा समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं और जीवनशैली को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

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यह रिपोर्ट डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, सेंटर फॉर पास्टोरलिज्म, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी), लेह और लद्दाख प्रशासन ने संयुक्त रूप से तैयार की है। इसमें न्योमा और दुर्बुक क्षेत्रों के 13 गांवों तथा 11 बस्तियों के करीब 1,050 लोगों के साथ किए गए विचार-विमर्श को शामिल किया गया है। रिपोर्ट का विमोचन मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया।

छह प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
रिपोर्ट में छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें पशुपालन आधारित आजीविका और संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना, सतत पर्यटन और कचरा प्रबंधन, जल सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूलन, नीतिगत समन्वय तथा सांस्कृतिक और संस्थागत मजबूती शामिल हैं।

कार्ययोजना के तहत क्षतिग्रस्त चरागाहों और जल स्रोतों को बहाल करने पशुधन की सुरक्षा के उपाय मजबूत करने तथा मुआवजा व्यवस्था में सुधार करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा गांव स्तर पर चरागाह और वन्यजीव प्रबंधन समितियां गठित करने तथा जैव विविधता की निगरानी में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

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समन्वय के लिए बनेगा विशेष मंच
रिपोर्ट में चांगथांग रेंजलैंड एवं आजीविका मंच गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें स्थानीय समुदायों, सरकारी विभागों, सेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), एलएएचडीसी और नागरिक समाज संगठनों को शामिल करने की सिफारिश की गई है। इस मंच के माध्यम से विकास योजनाओं के लिए संयुक्त रूप से काम करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और स्थानीय विवादों का समाधान करने में मदद मिलेगी।

प्राकृतिक विरासत के साथ आजीविका का संरक्षण
रिपोर्ट में पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को चांगथांग के सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें ऐसे विकास मॉडल को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ चांगपा समुदाय की आजीविका तथा सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रह सके।

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