Masrat Alam's Party Ban: कौन है मसरत आलम, जिसके संगठन मुस्लिम लीग पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध
मसरत आलम भट 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। वह जम्मू कश्मीर मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गिलानी गुट के अंतरिम अध्यक्ष माना जाता है।
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केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी की अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहे मसरत आलम के संगठन जम्मू कश्मीर मुस्लिम लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस संगठन पर लोगों को भड़काने, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। यूएपीए के तहत यह कार्रवाई की गई है।
मसरत आलम भट 2019 से जेल में बंद है। वह जम्मू कश्मीर मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गिलानी गुट का अंतरिम अध्यक्ष माना जाता है। मसरत को गिलानी के काफी नजदीकी माना जाता रहा है।
2010 की कश्मीर पथराव रैलियों में शामिल था। 2010 में, केंद्र द्वारा विरोध कैलेंडर जारी करने के लिए उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम की घोषणा के बाद वह भाग गया था। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और 2015 की शुरुआत तक कैद में रहा। सरकार ने मसरत आलम पर 27 आपराधिक मामले दर्ज किए, लेकिन इनमें से ज्यादातर में उन्हें अदालतों ने या तो दोषमुक्त कर दिया है या जमानत दे दी।
2015 में मुफ्ती मोहम्मद सईद के जम्मू-कश्मीर के सीएम के रूप में पदभार संभालने के बाद उन्हें रिहा कर दिया था। इसके बाद अप्रैल 2015 में कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर में पाकिस्तान का झंडा फहराने और देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में उसे फिर गिरफ्तार किया। कश्मीर बाढ़ आपदा के बाद मसरत ने यह कहकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था कि कश्मीर घाटी को प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में लोगों को बचाने के लिए भारतीय बलों की जरूरत नहीं है।
मसरत आलम का जन्म श्रीनगर के हब्बा कदल क्षेत्र के जैनदार मोहल्ला में वर्ष 1971 को हुआ। जब कश्मीर घाटी में 90 की दशक में हालात खराब हुए तब मसरत की उम्र करीब 20 वर्ष के आसपास थी और मसरत भी इस विचारधारा से काफी हद तक प्रभावित था और कश्मीर में बन्दूक की लहर चरम पर थी।
मसरत आलम को पहली बार बीएसएफ द्वारा तब श्रीनगर में वर्ष 1990 में गिरफ्तार किया गया और उसे तब आतंकी कमांडर मुश्ताक अहमद के करीबी सहयोगी होने की बात सामने आई थी। मसरत आलम इसके बाद रिहा हुआ और फिर वह दादा की दुकान पर काम करने लगा। इस बीच कश्मीर विश्वविद्यालय से मसरत ने ग्रेजुएशन की।
वर्ष 1999 में मसरत ने सीधे तौर पर ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस जोकि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गीलानी द्वारा चलाई जा रही थी में शामिल हो गया और हुर्रियत कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरू किया। इससे मसरत आलम को प्रमुख कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के साथ रह कर एक पहचान मिली।