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गोलियों की गूंज से पहले की खामोशी: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच सहमे केरन सेकटरवासी, कर रहे अमन की दुआ

Fri, 02 May 2025 01:23 PM IST
निकिता गुप्ता अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 02 May 2025 01:23 PM IST
सार

भारत-पाक तनाव के बीच कुपवाड़ा के एलओसी से सटे केरन सेक्टर में दहशत का माहौल है, जहां लोग अमन-चैन की दुआ कर रहे हैं। सीमावर्ती गांवों में पर्यटक गतिविधियां थम गई हैं और बंकरों की कमी से लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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Keran sector residents are scared amid India-Pakistan tension, praying for peace pahalgam
पीओके में नागरिक गतिविधियां हुईं कम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले का एलओसी के करीब बसा केरन सेक्टर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) की लोअर नीलम वैली से केवल 60 से 70 फीट की दूरी पर है। बीच में किशनगंगा दरिया है। इसे वहां के लोग नीलम दरिया के नाम से जानते हैं। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच बने तनाव के माहौल से केरनवासी सहमे हैं। किशनगंगा की लहरों के शोर और अजान की आवाज के बीच एक अजीब सी उदासी है। ऐसे वक्त में सभी अमन और शांति के लिए दुआ कर रहे हैं।

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2021 के बाद पहली बार पर्यटकों के लिए खुला था केरन
केरन के रहने वाले नसीम दुरानी ने कहा कि काफी समय बाद इस इलाके में आशा की किरण जगी थी। 2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम समझौते के बाद गांव ने पहली बार पर्यटकों को आकर्षित किया। इससे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का एक अनूठा दृश्य देखने को मिलने लगा। इससे पहले केवल सेना और स्थानीय लोगों को ही गांव में जाने की अनुमति थी।

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तनाव ने फिर तोड़ी उम्मीदें, रोजगार पर लगा ब्रेक
केरन में स्थापित इंडियन फ्लैग पॉइंट पर खड़े होने पर सीधा पीओके की लोअर नीलम वैली दिखाई देती है। गाड़ियों की आवाजाही और टूरिस्ट रिसोर्ट की चहल-पहल पर्यटकों को आकर्षित करने लगी थी। इससे स्थानीय लोगों में रोज़गार को लेकर उम्मीद की किरण जगी थी। अब सभी की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। लोगाें के पास फिलहाल रोजगार नहीं रह गए हैं।अब हम फिर से उस दौर में पहुंच गए। 

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सबसे अधिक नुकसान LOC पर रहने वालों को
स्थानीय निवासी वकार ने कहा कि उन्होंने कुछ वर्ष पहले होम स्टे शुरू किया था। अल्लाह के फजल से जो अमन शांति की फिजा यहां लौटी थी, उसके चलते देश के कोने-कोने से पर्यटक यहां आने लगे थे। अब हम फिर से उस दौर में पहुंच गए हैं। हम दुआ करते हैं कि सब ठीक हो जाए, क्योंकि गोलाबारी में एलओसी पर रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।

सुरक्षित रहने के लिए पर्याप्त नहीं बंकर 
नसीम ने कहा कि आखिरी बार इस इलाके में 2018 में पाकिस्तानी गोलाबारी हुई थी। अब पीओके की तरफ भी नागरिकों की आवाजाही पहले से कम दिख रही है। लगता हैं कि पीओके के लोगों में हमले का खौफ है। नसीम ने कहा कि केरन गांव 60-70 फीट की दूरी पर है, वहां 3 बंकर हैं, जबकि पीओके से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पात्रो गांव में दो ही बंकर हैं। गोलाबारी के दौरान सुरक्षित रहने के लिए यह पर्याप्त नहीं हैं।

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