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सुपर 30 प्रोग्राम से सेना संवार रही युवाओं का भविष्य
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श्रीनगर। भारतीय सेना ‘सुपर-30’ नाम से चलाए जा रहे शिक्षा अभियान के तहत पिछले तीन वर्षों में 68 छात्रो का भविष्य संवार चुकी है। इस अभियान के जरिये सेना युवाओं को मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा (नीट) और जेईई के लिए तैयार करती है।
घाटी में सेना की 15 कोर ने नेशनल इंटीग्रिटी एंड एजुकेशनल डेवलेपमेंट आर्गेनाइजेशन (एनआईईडीओ) के साथ मिलकर 15 जून 2018 को सुपर 30 प्रोग्राम शुरू किया था। हर साल 10 प्रतिशत छात्रो को कोचिंग के लिए चुना गया है।
चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे की अगुवाई में इस प्रोग्राम की शुरुआत हुई थी, जब वह किलो फॉर्स के जीओसी थे। उस समय सिर्फ लड़कों के लिए कोचिंग का प्रबंध था, लेकिन प्रोग्राम की सफलता के बाद अब 20 लड़कियों को भी हर साल इस प्रोग्राम में शामिल करने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि एक महीने के अंदर ही 20 लड़कियों का चयन कर अब यह सुपर-50 प्रोग्राम बन जाएगा।
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पिछले तीन सालों में चुने गए छात्रों में से 68 छात्र सफल होकर विभिन मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं जबकि तीसरे बैच के 35 छात्र इस महीने नीट-जेईई की परीक्षा देकर अब रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
कोचिंग सेंटर के इंचार्ज डॉ. रोहित श्रीवास्तव के अनुसार लद्दाख के दुर्गम जंस्कार से आया एक छात्र सुपर-30 की कोचिंग के जरिये मेडिकल कॉलेज में पढाई कर रहा है और जंस्कार का पहला डॉक्टर होगा।
पहले साल में सुपर-30 प्रोग्राम में शामिल 35 छात्र थे जिसमें से 19 एमबीबीएस में सिलेक्ट हुए। उसके बाद दूसरे साल में 33 छात्र थे, जिनमें से 6 एमबीबीएस, 7 बच्चे बीडीएस, 2 बीवीएससी और भारत सरकार के आयुष प्रोग्राम के तहत आने वाले बीयूएमएस में 5 बच्चे सेलेक्ट हुए थे। तीसरे बैच में 38 छात्र हैं। सुपर 30 प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कुछ मानदंड हैं जिनमें से छात्र द्वारा 12वी की परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक हासिल किये हों और साथ ही उसके परिवार की सालाना इनकम 3.5 लाख से कम हो।
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घाटी में सेना की 15 कोर ने नेशनल इंटीग्रिटी एंड एजुकेशनल डेवलेपमेंट आर्गेनाइजेशन (एनआईईडीओ) के साथ मिलकर 15 जून 2018 को सुपर 30 प्रोग्राम शुरू किया था। हर साल 10 प्रतिशत छात्रो को कोचिंग के लिए चुना गया है।
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चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे की अगुवाई में इस प्रोग्राम की शुरुआत हुई थी, जब वह किलो फॉर्स के जीओसी थे। उस समय सिर्फ लड़कों के लिए कोचिंग का प्रबंध था, लेकिन प्रोग्राम की सफलता के बाद अब 20 लड़कियों को भी हर साल इस प्रोग्राम में शामिल करने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि एक महीने के अंदर ही 20 लड़कियों का चयन कर अब यह सुपर-50 प्रोग्राम बन जाएगा।
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पिछले तीन सालों में चुने गए छात्रों में से 68 छात्र सफल होकर विभिन मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं जबकि तीसरे बैच के 35 छात्र इस महीने नीट-जेईई की परीक्षा देकर अब रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
कोचिंग सेंटर के इंचार्ज डॉ. रोहित श्रीवास्तव के अनुसार लद्दाख के दुर्गम जंस्कार से आया एक छात्र सुपर-30 की कोचिंग के जरिये मेडिकल कॉलेज में पढाई कर रहा है और जंस्कार का पहला डॉक्टर होगा।
पहले साल में सुपर-30 प्रोग्राम में शामिल 35 छात्र थे जिसमें से 19 एमबीबीएस में सिलेक्ट हुए। उसके बाद दूसरे साल में 33 छात्र थे, जिनमें से 6 एमबीबीएस, 7 बच्चे बीडीएस, 2 बीवीएससी और भारत सरकार के आयुष प्रोग्राम के तहत आने वाले बीयूएमएस में 5 बच्चे सेलेक्ट हुए थे। तीसरे बैच में 38 छात्र हैं। सुपर 30 प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कुछ मानदंड हैं जिनमें से छात्र द्वारा 12वी की परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक हासिल किये हों और साथ ही उसके परिवार की सालाना इनकम 3.5 लाख से कम हो।