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Srinagar News: प्रतिबंधों में ढील दें तभी मिलेगा पर्यटन को बढ़ावा
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पैंगोंग में सीमावर्ती गांवों के प्रतिनिधियों ने संसदीय समिति को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। पैंगोंग दौरे पर पहुंची पर्यटन, परिवहन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति को मान-पैंगोंग ए और बी के सीमावर्ती गांवों के प्रतिनिधियों ने आजीविका, पर्यटन, आधारभूत संरचना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चांगथांग शीत मरुस्थलीय वन्यजीव अभयारण्य के तहत लागू प्रतिबंधों में ढील देने का भी अनुरोध किया, ताकि सतत पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं तथा युवाओं के विकास कार्यक्रमों का लाभ बेहतर ढंग से मिल सके।
उन्होंने वर्ष 2020 के सीमा तनाव के बाद पारंपरिक चरागाह क्षेत्रों के नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से घुमंतू पशुपालकों को नियंत्रित रूप से चरागाहों तक पहुंच प्रदान करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने सीमांत गांवों के निवासियों की समस्याओं को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करने के लिए समिति का आभार व्यक्त किया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि इन सीमावर्ती समुदायों ने 1962, 1971 और 1999 के युद्धों के साथ-साथ वर्ष 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध के दौरान भी भारतीय सशस्त्र बलों का महत्वपूर्ण सहयोग किया था। प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय युद्ध स्मारकों में उनकी इस भूमिका को आधिकारिक मान्यता देने की मांग की।
ज्ञापन में मठों के लिए वित्तीय सहायता, पारंपरिक घुमंतू आवासों के संरक्षण, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फोबरंग–त्सोगत्सल्लू सड़क के बेहतर रखरखाव के लिए उसे रक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित करने तथा चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य की सीमा का पुनर्निर्धारण कर संरक्षण और सीमावर्ती समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की भी मांग की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। पैंगोंग दौरे पर पहुंची पर्यटन, परिवहन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति को मान-पैंगोंग ए और बी के सीमावर्ती गांवों के प्रतिनिधियों ने आजीविका, पर्यटन, आधारभूत संरचना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चांगथांग शीत मरुस्थलीय वन्यजीव अभयारण्य के तहत लागू प्रतिबंधों में ढील देने का भी अनुरोध किया, ताकि सतत पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं तथा युवाओं के विकास कार्यक्रमों का लाभ बेहतर ढंग से मिल सके।
उन्होंने वर्ष 2020 के सीमा तनाव के बाद पारंपरिक चरागाह क्षेत्रों के नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से घुमंतू पशुपालकों को नियंत्रित रूप से चरागाहों तक पहुंच प्रदान करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने सीमांत गांवों के निवासियों की समस्याओं को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करने के लिए समिति का आभार व्यक्त किया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि इन सीमावर्ती समुदायों ने 1962, 1971 और 1999 के युद्धों के साथ-साथ वर्ष 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध के दौरान भी भारतीय सशस्त्र बलों का महत्वपूर्ण सहयोग किया था। प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय युद्ध स्मारकों में उनकी इस भूमिका को आधिकारिक मान्यता देने की मांग की।
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ज्ञापन में मठों के लिए वित्तीय सहायता, पारंपरिक घुमंतू आवासों के संरक्षण, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फोबरंग–त्सोगत्सल्लू सड़क के बेहतर रखरखाव के लिए उसे रक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित करने तथा चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य की सीमा का पुनर्निर्धारण कर संरक्षण और सीमावर्ती समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की भी मांग की गई।
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