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अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी हिंसा पूरी तरह खत्म नहीं हुई: डॉ. फारूक
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जम्मू। नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को केरल में कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने को आतंकवाद के समाधान के तौर पर पेश किया गया था, फिर भी हिंसा पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। पुलवामा, पहलगाम और उधमपुर जैसी पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या पक्की शांति का वादा सच में पूरा हुआ है।
केरल समिट में हिस्सा लेने गए डॉ. फारूक ने कहा कि सभी धर्मों और हर इंसान का बराबर सम्मान करने का केरल का तरीका पूरे देश के लिए एक मिसाल है। केरल में स्टेट प्लानिंग बोर्ड द्वारा आयोजित विज़न 2031 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई राज्यों के नेता शामिल हुए थे।
उन्होंने आगे कहा कि भारत इस समय एक बड़े संकट से गुज़र रहा है जिसमें सच बोलना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि कश्मीरी गर्वित भारतीय हैं और हमेशा रहेंगे, उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत इसकी विविधता में है। फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि सेब, अखरोट और बादाम उगाने वाले किसानों पर भारत-यूएस ट्रेड का बुरा असर पड़ेगा।
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उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर चलाने के मौजूदा सिस्टम पर नाखुशी जताई। उन्होंने कहा कि कई कानूनी फैसले अभी भी पेंडिंग हैं और एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों में ज़्यादा स्पष्टता व पारदर्शिता की ज़रूरत है। उन्होंने राज्य का दर्जा वापस पाने की मांग की और कहा कि भारत के संवैधानिक ढांचे के लिए केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का सही बंटवारा ज़रूरी है।
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केरल समिट में हिस्सा लेने गए डॉ. फारूक ने कहा कि सभी धर्मों और हर इंसान का बराबर सम्मान करने का केरल का तरीका पूरे देश के लिए एक मिसाल है। केरल में स्टेट प्लानिंग बोर्ड द्वारा आयोजित विज़न 2031 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई राज्यों के नेता शामिल हुए थे।
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उन्होंने आगे कहा कि भारत इस समय एक बड़े संकट से गुज़र रहा है जिसमें सच बोलना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि कश्मीरी गर्वित भारतीय हैं और हमेशा रहेंगे, उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत इसकी विविधता में है। फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि सेब, अखरोट और बादाम उगाने वाले किसानों पर भारत-यूएस ट्रेड का बुरा असर पड़ेगा।
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उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर चलाने के मौजूदा सिस्टम पर नाखुशी जताई। उन्होंने कहा कि कई कानूनी फैसले अभी भी पेंडिंग हैं और एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों में ज़्यादा स्पष्टता व पारदर्शिता की ज़रूरत है। उन्होंने राज्य का दर्जा वापस पाने की मांग की और कहा कि भारत के संवैधानिक ढांचे के लिए केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का सही बंटवारा ज़रूरी है।