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दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन युवाओं के गुस्से का प्रतीक, केंद्र सरकार करे बातचीत: उमर अब्दुल्ला
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह आंदोलन देश के युवाओं के भीतर व्याप्त भारी गुस्से का प्रतीक है। उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि स्थिति को संभालने के लिए आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि युवाओं को अपनी मांगें रखने का पूरा हक है और यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस प्रदर्शन को आगे जारी रहने देना चाहती है या बातचीत से इसका समाधान निकालती है। सीजेपी द्वारा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को गैर-समझौतावादी बताए जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि ये युवा पीछे हटने के मूड में नहीं दिखते। उन्होंने आगे कहा कि सोनम वांगचुक ने अपना विरोध खत्म कर दिया है, लेकिन युवाओं ने अपना आंदोलन वापस नहीं लिया है। केंद्र उनकी मांगें मानता है या नहीं और यह सिलसिला कब तक चलता है, यह पूरी तरह सरकार के रुख पर निर्भर है।
प्रदर्शन के स्वरूप पर चर्चा करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब यह आंदोलन केवल सीजेपी के नियंत्रण में नहीं रहा है, बल्कि इससे कहीं आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि मैंने इस हफ्ते दिल्ली की सड़कों पर जिन युवाओं को देखा, उनमें से अधिकांश किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं थे, वे विशुद्ध रूप से अपने गुस्से के कारण सड़कों पर उतरे थे। इसलिए केंद्र सरकार को इन सभी मुद्दों पर युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खुद भी 20 जुलाई को अपनी पार्टी के नेताओं के साथ जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं।
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श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह आंदोलन देश के युवाओं के भीतर व्याप्त भारी गुस्से का प्रतीक है। उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि स्थिति को संभालने के लिए आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि युवाओं को अपनी मांगें रखने का पूरा हक है और यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस प्रदर्शन को आगे जारी रहने देना चाहती है या बातचीत से इसका समाधान निकालती है। सीजेपी द्वारा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को गैर-समझौतावादी बताए जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि ये युवा पीछे हटने के मूड में नहीं दिखते। उन्होंने आगे कहा कि सोनम वांगचुक ने अपना विरोध खत्म कर दिया है, लेकिन युवाओं ने अपना आंदोलन वापस नहीं लिया है। केंद्र उनकी मांगें मानता है या नहीं और यह सिलसिला कब तक चलता है, यह पूरी तरह सरकार के रुख पर निर्भर है।
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प्रदर्शन के स्वरूप पर चर्चा करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब यह आंदोलन केवल सीजेपी के नियंत्रण में नहीं रहा है, बल्कि इससे कहीं आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि मैंने इस हफ्ते दिल्ली की सड़कों पर जिन युवाओं को देखा, उनमें से अधिकांश किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं थे, वे विशुद्ध रूप से अपने गुस्से के कारण सड़कों पर उतरे थे। इसलिए केंद्र सरकार को इन सभी मुद्दों पर युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खुद भी 20 जुलाई को अपनी पार्टी के नेताओं के साथ जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं।
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