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Srinagar News: 'वाइब्रेंट विलेज का टैग भी जुरिमंज गांव को नहीं दे पाया लाभ

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jammu kashmir news
बांदीपोरा। केंद्र सरकार की विकास पहल के तहत ''''वाइब्रेंट विलेज'''' घोषित किए जाने के बावजूद बांदीपोरा जिले में वुलर झील के किनारे बसा जुरिमंज गांव आजीविका के बढ़ते संकट से जूझ रहा है। वुलर झील का बढ़ता जलस्तर गांव को जिले के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली एकमात्र सड़क को लगातार डुबो रहा है।
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वुलर झील के अंदर स्थित होने के कारण स्थानीय रूप से कभी ''''बांग्लादेश गांव'''' के नाम से मशहूर जुरिमंज गर्मियों के महीनों में एक छोटे पर्यटन स्थल के रूप में उभरा था, जो शिकारा की सवारी और झील के नज़ारों के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता था।
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निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में गांव तक पहुंचने वाली सड़क पर बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण गांव की पर्यटन अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ साल पहले गांव में लगभग 25 शिकारे चलते थे लेकिन पर्यटन गतिविधियों में भारी गिरावट के कारण आज केवल आठ ही चालू हालत में हैं। एक स्थानीय शिकारा मालिक गुलाम मोहम्मद ने कहा कि लोगों ने शिकारे खरीदने और उनके रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च किए। इस उम्मीद में कि गांव को ''''वाइब्रेंट विलेज'''' घोषित किए जाने के बाद पर्यटन में सुधार होगा लेकिन अब हम पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं।
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उन्होंने आगे कहा कि कभी-कभी हमारी रोज की कमाई 200 रुपये भी पार नहीं कर पाती। निवासियों ने बताया कि जुरिमंज को बांदीपोरा-सोपोर राजमार्ग से जोड़ने वाली सड़क वसंत और गर्मियों की शुरुआत में वुलर झील का जलस्तर बढ़ने के कारण अक्सर पानी में डूब जाती है। सड़क के पानी में डूबे हुए हिस्से स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए आवागमन मुश्किल बना देते हैं। इसके चलते कई पर्यटक इस इलाके में आने से पूरी तरह परहेज करने लगे हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में वर्षों की देरी की है। उन्होंने कहा कि सड़क की बहाली और मरम्मत के कार्यों के लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपये के जो टेंडर जारी किए गए थे, वे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। जमीन पर कोई भी काम होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है।
एक अन्य निवासी अब्दुल रशीद ने कहा कि हमें बताया गया था कि पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं हमारी जिंदगी बदल देंगी, लेकिन जमीन पर कोई सुधार नहीं हुआ है। हर साल सड़क पानी में डूब जाती है और पर्यटक आना बंद कर देते हैं। ऐसे में यहां के लोग गुजारा कैसे करेंगे। गांव वालों ने बताया कि पर्यटन, मछली पकड़ने और झील के किनारे चलने वाले छोटे-मोटे व्यवसायों पर निर्भर कई परिवार अब अपनी आजीविका चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। (संवाद)
उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे तुरंत एक एलिवेटेड रोड (ऊंची सड़क) का निर्माण करें और गांव को मौसमी बाढ़ से बचाने के लिए दीर्घकालिक उपाय अपनाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया गया तो बची-खुची पर्यटन गतिविधियां भी पूरी तरह से खत्म हो सकती हैं।

कोट
विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए पहले ही टेंडर जारी कर दिए हैं। उम्मीद है कि काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को 2.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अनुमानित लागत पर शुरू किया गया है। टेंडर पहले ही मंगाए जा चुके हैं और हमें उम्मीद है कि अगले 15 दिनों के भीतर काम शुरू हो जाएगा।
शाहिद सलीम, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, आरएंडबी बांदीपोरा
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