फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   jammu kashmir news

एक ही घटना के लिए कई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती : उच्च न्यायालय

विज्ञापन
jammu kashmir news
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि एक ही घटना के लिए कई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकतीं। अदालत ने दिल्ली स्थित एक व्हिसलब्लोअर (मुखबिर) के खिलाफ बडगाम में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। रियल एस्टेट कंपनी द्वारा शुरू की गई इस कार्यवाही को फोरम शॉपिंग और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया।
विज्ञापन

न्यायमूर्ति एमए चौधरी की पीठ ने बडगाम के स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट द्वारा 1 नवंबर, 2021 को दिए गए उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
विज्ञापन

याचिकाकर्ता विश्वेंद्र सिंह ने डब्ल्यूटीसी फरीदाबाद इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा पुलिस स्टेशन बडगाम में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी। कंपनी ने एक सोशल मीडिया अभियान से संबंधित समान आरोपों पर श्रीनगर, बडगाम और नई दिल्ली में कई आपराधिक कार्रवाइयां शुरू की थीं। उसने डब्ल्यूटीसी समूह से जुड़े एक कथित रियल एस्टेट घोटाले का पर्दाफाश किया था और दिल्ली में अधिकारियों के पास शिकायतें दर्ज कराई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रतिशोध के रूप में कंपनी ने समान तथ्यों पर उसके खिलाफ कई जगहों पर समानांतर आपराधिक कार्यवाही शुरू कर दी। अदालत ने पाया कि कंपनी ने पहले 7 अक्तूबर 2021 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीनगर से समन आदेश प्राप्त किया था। इसके तुरंत बाद पिछली कार्यवाही का खुलासा किए बिना बडगाम अदालत में एक और मामला दर्ज कराने के लिए पहुंच गई। कोर्ट ने इसे धोखाधड़ी बताया।
कोर्ट ने कहा कि एक ही ट्विटर ट्रेंड के आधार पर कई न्यायालयों में कार्यवाही शुरू करना “फोरम शॉपिंग” का एक आदर्श उदाहरण है। इसका एकमात्र उद्देश्य याचिकाकर्ता को परेशान करना और उसके संसाधनों को थकाना था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही घटना से उत्पन्न विभिन्न अपराधों को अलग-अलग शिकायतों में नहीं बांटा जा सकता। अदालत ने कहा कि एक ही घटना के तथ्यों को टुकड़ों में बांटकर कई शिकायतें दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आपराधिक कानून की व्यवस्था यही है कि एक ही घटना से उत्पन्न सभी अपराधों की जांच और सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए।
अदालत ने पाया कि श्रीनगर और बडगाम में दर्ज दोनों शिकायतें एक-दूसरे की “कार्बन कॉपी” थीं और 12 सितंबर 2021 को शुरू हुए एक कथित ट्विटर ट्रेंड से संबंधित थीं।

हाईकोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि बडगाम एफआईआर को जारी रखना न्याय का उपहास होगा। अदालत ने उस एफआईआर आर उसके नतीजतन होने वाली सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed