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Srinagar News: लद्दाख में आपदा चेतावनी प्रणाली विकसित कर रहा इसरो
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संवाद न्यूज एजेसी
लेह। केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि इसरो लद्दाख में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, भूस्खलन और अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं के लिए एक उन्नत सैटेलाइट आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में आपदा पूर्व तैयारी और प्रबंधन को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसरो लद्दाख में ग्लेशियरों की निगरानी, सैटेलाइट आधारित हिम आवरण (स्नो कवर) मानचित्रण और भूस्खलन आकलन जैसी परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहा है। अब तक 2,000 से अधिक ग्लेशियरों और 3,219 हिमनदीय झीलों का मानचित्रण किया जा चुका है। इसके अलावा संवेदनशील झीलों के लिए ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के जोखिम का आकलन भी पूरा को चुका है। केंद्र सरकार ने बताया कि लामा, सिलास और जियो-लद्दाख जैसी परियोजनाएं मौसम पूर्वानुमान, भूस्खलन की पूर्व चेतावनी और भू-स्थानिक निगरानी को बेहतर बना रही हैं। साथ ही, सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग आपदा राहत एवं प्रतिक्रिया के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
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लेह। केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि इसरो लद्दाख में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, भूस्खलन और अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं के लिए एक उन्नत सैटेलाइट आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में आपदा पूर्व तैयारी और प्रबंधन को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसरो लद्दाख में ग्लेशियरों की निगरानी, सैटेलाइट आधारित हिम आवरण (स्नो कवर) मानचित्रण और भूस्खलन आकलन जैसी परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहा है। अब तक 2,000 से अधिक ग्लेशियरों और 3,219 हिमनदीय झीलों का मानचित्रण किया जा चुका है। इसके अलावा संवेदनशील झीलों के लिए ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के जोखिम का आकलन भी पूरा को चुका है। केंद्र सरकार ने बताया कि लामा, सिलास और जियो-लद्दाख जैसी परियोजनाएं मौसम पूर्वानुमान, भूस्खलन की पूर्व चेतावनी और भू-स्थानिक निगरानी को बेहतर बना रही हैं। साथ ही, सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग आपदा राहत एवं प्रतिक्रिया के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
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