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Srinagar News: इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव को कम करने के उपायों पर हुई चर्चा
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- श्रीनगर में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग की कमिश्नर सेक्रेटरी की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग की कमिश्नर सेक्रेटरी शीतल नंदा ने इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव की बढ़ती घटनाओं व उन्हें कम करने के उपायों का आकलन करने को बैठक आहूत की। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) व मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. सुनीश बक्सी, वन विभाग के सचिव राजिंदर सिंह तारा, तकनीकी सचिव, जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय वन्यजीव वार्डन और केंद्र शासित प्रदेश के सभी वन्यजीव वार्डन शामिल हुए।
डॉ. सुनीश बक्सी ने केंद्र शासित प्रदेश में इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव की मौजूदा स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी और इसे कम करने के लिए विभाग द्वारा की गई पहलों की रूपरेखा बताई। शीतल नंदा ने सभी संबंधित अधिकारियों को इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव की घटनाओं को वैज्ञानिक, प्रभावी और समय पर कम करने के लिए प्रजाति-विशिष्ट और स्थिति-विशिष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभाग को पीड़ितों के लिए मुआवजे के मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने एसओएस कॉल पर तत्काल प्रतिक्रिया के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग के संबद्ध विभागों के साथ अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने जिला-स्तरीय समन्वय समितियों के गठन का निर्देश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग की कमिश्नर सेक्रेटरी शीतल नंदा ने इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव की बढ़ती घटनाओं व उन्हें कम करने के उपायों का आकलन करने को बैठक आहूत की। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) व मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. सुनीश बक्सी, वन विभाग के सचिव राजिंदर सिंह तारा, तकनीकी सचिव, जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय वन्यजीव वार्डन और केंद्र शासित प्रदेश के सभी वन्यजीव वार्डन शामिल हुए।
डॉ. सुनीश बक्सी ने केंद्र शासित प्रदेश में इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव की मौजूदा स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी और इसे कम करने के लिए विभाग द्वारा की गई पहलों की रूपरेखा बताई। शीतल नंदा ने सभी संबंधित अधिकारियों को इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव की घटनाओं को वैज्ञानिक, प्रभावी और समय पर कम करने के लिए प्रजाति-विशिष्ट और स्थिति-विशिष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभाग को पीड़ितों के लिए मुआवजे के मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने एसओएस कॉल पर तत्काल प्रतिक्रिया के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग के संबद्ध विभागों के साथ अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने जिला-स्तरीय समन्वय समितियों के गठन का निर्देश दिया।
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