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Srinagar News: हाईकोर्ट ने बीआरओ के मेजर की याचिका खारिज की
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन के एक मेजर की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने आकस्मिक वेतनभोगी मजदूर की भर्ती और वेतन भुगतान में कथित अनियमितता को लेकर उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को सही ठहराया।
न्यायमूर्ति संजय धार की पीठ ने मेजर बी. किशन की याचिका को खारिज किया। मेजर ने अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही और केंद्रीय सिविल सेवा सीसीए नियम 1965 के तहत लगाए गए दंड को चुनौती दी थी।
मेजर नवंबर 2019 से मार्च 2022 तक हेडक्वार्टर 81 आरसीसी ग्रिफ के कमांडिंग ऑफिसर थे। उन पर बीआरओ के दिशा-निर्देशों का पालन न करने का आरोप था। उन पर सीपीएल के लिए बैंक खाते न खुलवाना, भर्ती रिकॉर्ड सही से न रखना और पहचान पत्र जारी करने में देरी के आरोप लगे थे।
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अधिकारियों के अनुसार करीब 60 सीपीएल को बैंक खातों के बजाय आईसीआईसीआई बैंक के पे-डायरेक्ट कार्ड से भुगतान किया गया। साथ ही केवाईसी वेरिफिकेशन, बैंक स्टेटमेंट और कैश-बुक रिकॉर्ड भी ठीक से नहीं रखे। दस्तावेजों में गड़बड़ी व मजदूरों को पहचान पत्र जारी करने में देरी पाई गई।
प्राधिकरण ने मेजर पर तीन साल तक वेतनमान में एक स्टेज की कटौती का दंड लगाया। इस दौरान उन्हें वेतन वृद्धि लेने की अनुमति दी गई और कहा गया कि दंड अवधि के बाद भविष्य की वेतन वृद्धि पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
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न्यायमूर्ति संजय धार की पीठ ने मेजर बी. किशन की याचिका को खारिज किया। मेजर ने अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही और केंद्रीय सिविल सेवा सीसीए नियम 1965 के तहत लगाए गए दंड को चुनौती दी थी।
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मेजर नवंबर 2019 से मार्च 2022 तक हेडक्वार्टर 81 आरसीसी ग्रिफ के कमांडिंग ऑफिसर थे। उन पर बीआरओ के दिशा-निर्देशों का पालन न करने का आरोप था। उन पर सीपीएल के लिए बैंक खाते न खुलवाना, भर्ती रिकॉर्ड सही से न रखना और पहचान पत्र जारी करने में देरी के आरोप लगे थे।
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अधिकारियों के अनुसार करीब 60 सीपीएल को बैंक खातों के बजाय आईसीआईसीआई बैंक के पे-डायरेक्ट कार्ड से भुगतान किया गया। साथ ही केवाईसी वेरिफिकेशन, बैंक स्टेटमेंट और कैश-बुक रिकॉर्ड भी ठीक से नहीं रखे। दस्तावेजों में गड़बड़ी व मजदूरों को पहचान पत्र जारी करने में देरी पाई गई।
प्राधिकरण ने मेजर पर तीन साल तक वेतनमान में एक स्टेज की कटौती का दंड लगाया। इस दौरान उन्हें वेतन वृद्धि लेने की अनुमति दी गई और कहा गया कि दंड अवधि के बाद भविष्य की वेतन वृद्धि पर इसका असर नहीं पड़ेगा।