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बैंंगनी क्रांति से बदल रही जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था, 8,000 युवाओं को मिला रोजगार : डॉ. जितेंद्र सिंह
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स्कॉस्ट में आयोजित सस्टेनेबल माउंटेन समिट की पहली बैठक को किया संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में बैंगनी क्रांति (पर्पल रिवॉल्यूशन) आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिख रही है। इसके तहत लगभग 8,000 युवाओं को रोजगार मिला है। श्रीनगर स्थित स्कॉस्ट में आयोजित सस्टेनेबल माउंटेन समिट की पहली बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि घाटी से शुरू हुई लैवेंडर की खेती का दायरा अब हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नगालैंड और मिजोरम जैसे अन्य पहाड़ी राज्यों तक फैल चुका है।
सरकार इस तकनीक के लिए पूरा वित्तीय सहयोग और बाजार उपलब्ध करा रही है, जिसके चलते बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कॉरपोरेट नौकरियां छोड़कर कई युवा अब जम्मू-कश्मीर लौटकर इस मिशन से जुड़ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने हिमालयी क्षेत्र के महत्व और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति इसकी संवेदनशीलता पर चर्चा करते हुए कहा कि मौसम संबंधी सटीक पूर्वानुमान के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। वर्ष 2014 की भीषण बाढ़ और किश्तवाड़ के बादलों के फटने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लद्दाख से लेकर किश्तवाड़ तक कई स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए गए हैं। देश में रडार स्टेशनों की संख्या 2014 के 17 से बढ़कर अब 50 हो चुकी है और मिशन मौसम के तहत 50 नए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय से ग्लेशियोलॉजी में देश के पहले क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की भी घोषणा की, जिसमें देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में बैंगनी क्रांति (पर्पल रिवॉल्यूशन) आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिख रही है। इसके तहत लगभग 8,000 युवाओं को रोजगार मिला है। श्रीनगर स्थित स्कॉस्ट में आयोजित सस्टेनेबल माउंटेन समिट की पहली बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि घाटी से शुरू हुई लैवेंडर की खेती का दायरा अब हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नगालैंड और मिजोरम जैसे अन्य पहाड़ी राज्यों तक फैल चुका है।
सरकार इस तकनीक के लिए पूरा वित्तीय सहयोग और बाजार उपलब्ध करा रही है, जिसके चलते बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कॉरपोरेट नौकरियां छोड़कर कई युवा अब जम्मू-कश्मीर लौटकर इस मिशन से जुड़ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने हिमालयी क्षेत्र के महत्व और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति इसकी संवेदनशीलता पर चर्चा करते हुए कहा कि मौसम संबंधी सटीक पूर्वानुमान के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। वर्ष 2014 की भीषण बाढ़ और किश्तवाड़ के बादलों के फटने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लद्दाख से लेकर किश्तवाड़ तक कई स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए गए हैं। देश में रडार स्टेशनों की संख्या 2014 के 17 से बढ़कर अब 50 हो चुकी है और मिशन मौसम के तहत 50 नए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय से ग्लेशियोलॉजी में देश के पहले क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की भी घोषणा की, जिसमें देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
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